Congress Political Crisis: पार्टी को सोनिया गांधी के 'बड़े दिल' पर भरोसा, जल्दी खत्म हो जाएगा असमंजस
Congress Political Crisis: कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल इस समय पार्टी संगठन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। वह राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हैं पर उनकी निगाह हमेशा अपने दायित्व पर टिकी है। उन्हें भरोसा है कि 30 सितंबर तक सब ठीक हो जाएगा...
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कांग्रेस के तमाम वरिष्ठ नेता मानते हैं कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी बड़े दिल वाली नेता हैं और उनका मकसद बस कांग्रेस को एकजुटता के साथ आगे बढ़ाना है। कभी सोनिया गांधी के सलाहकारों में शामिल रहे पूर्व महासचिव का कहना है कि राजस्थान का संकट हल करने में उन्होंने क्षमता का परिचय दिया है। अब सब ठीक होगा। सूत्र का कहना है कि वह सोनिया गांधी को बहुत अच्छी तरह से और दशकों से जानते हैं। जयपुर से लौटकर पार्टी के पर्यवेक्षक मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन ने जो रिपोर्ट दी है, इसमें कांग्रेस अध्यक्ष का मार्गदर्शन भी साफ नजर आ रहा है। वह कहते हैं कि इसके आगे उन्हें कुछ नहीं बोलना है।
उधर बेंगलुरु में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि जयपुर में जो भी कुछ घटा, उसे भूल जाइए। मुझे भी उसके बारे में जानकारी नहीं है। सूत्र का कहना है कि वह मंगलवार को दिल्ली से लौटे हैं। उन्हें पूरा भरोसा है कि राजस्थान में अशोक गहलोत का मान रहेगा और सचिन पायलट की युवा शक्ति भी। पार्टी अध्यक्ष सांप मर जाए और लाठी भी न टूटे वाले फॉर्मूले पर चल रही है। वह कहते हैं कि किसी की चापलूसी नहीं कर रहे हैं। लेकिन कहना चाहते हैं कि यही कांग्रेस पार्टी के भीतर के लोकतंत्र की खूबसूरती भी है। आप देखिएगा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने और नाम वापसी की तारीख बीतने तक सभी स्थितियां साफ हो जाएंगी।
कांग्रेस अध्यक्ष सभी नेताओं से राय लेकर आगे बढ़ेंगी
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल इस समय पार्टी संगठन पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। वह राहुल गांधी के साथ भारत जोड़ो यात्रा में शामिल हैं पर उनकी निगाह हमेशा अपने दायित्व पर टिकी है। उन्हें भरोसा है कि 30 सितंबर तक सब ठीक हो जाएगा। बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष ने पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी से मुलाकात की। अशोक गहलोत भी उनसे मिलने के लिए दिल्ली में हैं। माना जा रहा है कि अशोक गहलोत जयपुर से अपनी बात रखने के बाद नतमस्तक भाव में आए हैं। अशोक गहलोत अपनी बात रखना और राज्य के मुख्यमंत्री का फैसला कांग्रेस अध्यक्ष पर छोड़ देना चाहते हैं। इससे पहले गहलोत से बात करने वालों में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी, आनंद शर्मा और मल्लिकार्जुन खड़गे थे।
बताते हैं ऑपरेशन डैमेज कंट्रोल के तहत काफी कुछ ठीक किया जा चुका है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सक्रिय हैं और सचिन पायलट भी दिल्ली में हैं। पायलट ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत तमाम वरिष्ठ नेताओं से भी संपर्क साधा है। वह विक्टिम कार्ड खेल रहे हैं। पायलट के पास बस एक ही सवाल प्रमुखता से है कि आखिर कब तक उन्हें बार-बार अपमानित होना पड़ेगा। इससे पहले सोनिया गांधी ने कमलनाथ से चर्चा की थी। दिग्विजय सिंह से भी उनकी बात होनी है और वह तमाम नेताओं के संपर्क में हैं। कांग्रेस अध्यक्ष पार्टी में अध्यक्ष पद के चुनाव के बाबत भी लोगों का मन टटोल रही हैं।
क्या अशोक गहलोत दाखिल करेंगे अध्यक्ष पद का पर्चा?
राहुल गंधी के करीबियों में शामिल सूत्र का कहना है कि इसे लेकर पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। अशोक गहलोत राज्य के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ना उनका अधिकार है। सूत्र का कहना है कि यह खबर सरासर गलत है कि कांग्रेस पार्टी या इसकी नेता अध्यक्ष पद पर कोई अपना उम्मीदवार उतार रही हैं। पार्टी के शीर्ष पद का चुनाव लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। कांग्रेस संगठन को दशकों तक अपनी सेवाएं देने वाले मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेता का कहना है कि राजस्थान में जो कुछ हुआ है, उसे लेकर मीडिया में चाहे जो चर्चा हो, लेकिन कांग्रेस पार्टी के स्तर यह अंदरूनी मामले के सिवा कुछ नहीं है। वह कहते हैं कि लोगों को समझना चाहिए कि न तो अशोक गहलोत ने कोई पार्टी विरोधी काम किया है और न ही सचिन पायलट ने। दोनों हमारे नेता हैं। जिन नेताओं ने पार्टी के अनुशासन की अवहेलना की है, अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले उनका पक्ष जानने के लिए कारण बताओं नोटिस दिया जा चुका है।
अशोक गहलोत को क्लीन चिट, सचिन पायलट का खेमा मौन
सचिन पायलट के सचिवालय में तीन दिन से फोन की घंटी खूब घनघना रही है। उनके एक सहायक का कहना है कि लोग पायलट और उनके नेतृत्व से प्यार करते हैं। सूत्र का कहना है कि अब फैसला कांग्रेस अध्यक्ष को लेना है। पायलट साहब को उनपर पूरा भरोसा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पर्यवेक्षकों द्वारा क्लीन चिट देने के सवाल पर सूत्र का कहना है कि जो उन्होंने देखा, महसूस किया और जो जानकारी मिली है, उसी आधार पर रिपोर्ट दी है। पायलट गुट के एक विधायक का भी कहना है कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट सोच समझकर आई है। उन्हें पार्टी और इसके नेतृत्व पर पूरा भरोसा है।