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कांग्रेस पार्टी ने साधा केंद्र सरकार पर निशाना, गलवां घाटी में शहीदों को लेकर पूछे कई तीखे सवाल

Thu, 18 Jun 2020 03:56 PM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Thu, 18 Jun 2020 03:56 PM IST
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Congress party targets central government, many questions asked about martyrs in Galvan valley
रणदीप सुरजेवाला - फोटो : PTI

पूर्वी लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सैनिकों की तरफ से हुई हिंसक झड़प और उसमें 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद कांग्रेस पार्टी की तरफ से लगातार केंद्र सरकार पर हमले किए जा रहे हैं। देश की मुख्य राजनीतिक पार्टी और उनके नेताओं की तरफ से सरकार से इस बाबत सवाल पूछे जा रहे हैं।

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इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को राहुल गांधी के बयान के बाद कांग्रेस पार्टी की तरफ से एक विज्ञप्ति जारी की गई जिसमें एक बार फिर से केंद्र सरकार पर हमला किया गया और सैनिकों की शहादत और भारत की तैयारियों को लेकर कई सवाल जवाब किए गए। इस दौरान कांग्रेस की तरफ से सभी शहीदों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई।  

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का बयान

आज जब पूरा देश हमारे वीर सैन्य अफसरों तथा सैनिकों की शहादत पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा है, तो स्वाभाविक तौर पर देशवासियों के मन में अत्यंत पीड़ा भी है, आक्रोश भी और गुस्सा भी। अब यह साफ है कि चीन ने अक्षम्य अपराध किया है। चीनी सैनिकों ने राईफल की संगीनों, लोहे की रॉड, कंटीली बाड़ वाली लाठियों, डंडों व अन्य हथियारों से जानबूझकर हमारे जांबाज सैन्य अधिकारी व सैनिकों पर हमला किया।

130 करोड़ देशवासियों का मन यह सोचकर कांप उठता है कि जिस निर्दयता और निमर्मतापूर्वक तरीके से हमारे वीर जवानों को चीन द्वारा शहीद किया गया, वह सबसे अधिक आवेशित करने वाली, नामंजूर व तकलीफदेह बात है।

आज हर मन में वेदना और हर जुबान पर भारी रोष है। पूरे देश को न केवल इस बात की नाकाबिले बर्दाश्त पीड़ा है कि भारत मां के रणबांकुरों की निमर्मतापूर्वक शहादत हुई, अपितु इस बात का आक्रोश भी है कि उन्हें चीन से निहत्थे लोहा लेने के लिए क्यों व किसने बाध्य किया। 

  • क्या प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री देश को जवाब देंगे?
  • हमारे जांबाज सैन्य अधिकारी व सैनिकों को दुश्मन के पास निहत्थे क्यों भेजा गया?
  • किस हुक्मरान ने हमारे सैन्य अधिकारी व सैनिकों को यह आदेश दिया?
  • जब हमारे सैन्य अधिकारी व सैनिकों को बगैर हथियार भेजा जा रहा था, तो आर्मी प्रोटोकॉल के अनुरूप उनकी सुरक्षा के लिए हथियारबंद ‘बैकअप फोर्स’ क्यों उपलब्ध नहीं थी? यदि बैकअप फोर्स थी, तो उसे क्यों नहीं भेजा गया? 
  • चीन के शत्रुतापूर्ण मनसूबों व हमारे शूरवीरों पर षड़यंत्रकारी तौर से हमला करने के बारे में अग्रिम जानकारी व सूचना सरकार के पास क्यों नहीं थी?
  • क्या चीन की मंशा समझने में भारी चूक केंद्रीय सरकार व उनके नेतृत्व की घोर विफलता का प्रतीक नहीं?

आज हर मन इस बात से बेहद व्यथित है कि दिन-रात खुद के ‘मजबूत नेतृत्व’ का ढोल पीटने वाले दिल्ली के हुक्मरानों की कूटनीतिक चूक की कीमत देश को सैन्य अधिकारी व सैनिकों की शहादत से चुकानी पड़ी।

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