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अटल ने शुरू की थी GST पर पहल, यूपीए सरकार में बीजेपी ने किया था विरोध

Thu, 28 Jul 2016 01:20 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Jul 2016 01:20 PM IST
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congress opposes Modi government over GST
जिस वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) बिल को भारत में लागू करने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी ने साल 2000 में सबसे पहले विचार किया था और इसके बाद यूपीए सरकार ने साल 2007 से 2010 तक काफी जद्दोजहद की थी उसे 2016 में मंजूरी मिलती दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को केंद्र सरकार ने जीएसटी संविधान विधेयक में कुछ प्रमुख बदलावों को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही राज्यों को एक प्रतिशत अतिरिक्त विनिर्माण कर लगाने संबंधी प्रावधान भी हटा लिया है। इसमें जीएसटी लागू होने के पांच साल के दौरान राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई की गारंटी पर भी मुहर लगा दी है। 
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कांग्रेस की तीन मांगों में से एक को मानते हुए केंद्र सरकार ने अंतर-राज्यीय कर को समाप्त कर दिया है। वहीं कांग्रेस की दो मांग, जीएसटी की अधिकतम दर का संविधान में उल्लेख किया जाए और कर विवाद का निपटारा सुप्रीम कोर्ट के जज की अध्यक्षता वाली संस्था से कराया जाए पर कोई पहल नहीं हुई।
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बताते चलें कि जीएसटी के लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट/ सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स और लग्जरी टैक्स खत्म हो जाएंगे। इसके बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे। 
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जीएसटी को भारत में लागू करने का विचार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में साल 2000 में लाया गया। इसके बाद इस मामले पर यूपीए सरकार में साल 2007 में ठोस कदम उठाए गए और वित्तमंत्री ने राज्यों के वित्तमंत्रियों की संयुक्त समिति का गठन कर साल 2010 में इसे लागू करने की घोषणा की। हालांकि, राज्यों के विरोध के कारण सरकार इसे लागू करने में सफल नहीं हो पाई। 
 

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जीएसटी
मोदी सरकार जीएसटी को अपने आर्थिक सुधारों का केंद्र बिंदु बता रही है। इसके बाद 122वां संविधान संशोधन विधेयक दिसंबर, 2014 में संसद में पेश किया। सरकार का मानना है कि जीएसटी से टैक्स सुधरेगा, जीडीपी में बढ़ोत्तरी होगी और नए रोजगार मिलेंगे।

कांग्रेस जीएसटी का तीन मुद्दे पर विरोध कर रही है। हालांकि, इस बिल की सूत्रधार कांग्रेस जब इसे आगे ला रही थी तो बीजेपी-शासित गुजरात जैसे राज्य इसका विरोध करते थे। 
 

congress opposes Modi government over GST
जीएसटी
कांग्रेस की मांग है कि महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु जैसे उत्पादक राज्यों को मिलने वाले एक फीसदी अतिरिक्त टैक्स के लाभ को खत्म किया जाए। वहीं, वह चाहती है कि बिल में टैक्स की ऊपरी सीमा 18 प्रतिशत तय कर इसका प्रावधान संविधान संशोधन में किया जाए, जिससे भविष्य में सरकार मनमाने तरीके से टैक्स में बढ़ोतरी न कर सके। सरकार ने कांग्रेस पार्टी की इस मांग पर विचार करने के लिए मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में एक कमिटी का गठन किया है, जिसकी रिपोर्ट बहुत जल्द आने की उम्मीद है। इसके साथ ही कांग्रेस की मांग है कि केंद्र और राज्यों के बीच टैक्स विवाद निपटाने के लिए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में ट्रिब्यूनल पंचाट के गठन का प्रावधान हो, जिसमें जीएसटी काउंसिल का दखल न हो।

कांग्रेस चाहती है कि बिल को सिलेक्ट कमिटी को भेजना चाहिए। राज्यों को डर है कि उन्हें पहले से कम टैक्स मिलेगा। वहीं राज्य 27 फीसदी से ज्यादा जीएसटी चाहते हैं और पेट्रोल-डीजल को इससे बाहर रखना चाहती है।
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