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Karnataka: मंगलूरु में शिवाजी की प्रतिमा लगाने के फैसले का कांग्रेस ने किया विरोध, सीमा विवाद का असर

Thu, 01 Dec 2022 03:15 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरु
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरु Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Thu, 01 Dec 2022 03:15 PM IST
सार

कांग्रेस नेता डिसूजा ने निगम परिषद को सुझाव दिया कि शिवाजी की मूर्ति के स्थान पर तुलुनाडु के योद्धाओं कोटि-चेन्नया की मूर्ति स्थापित की जा सकती है। कांग्रेस सदस्य शशिधर हेगड़े ने भी कहा कि तटीय क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमा पर विचार किया जाना चाहिए।

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Congress opposes Chhatrapati Shivaji statue in Mangaluru
छत्रपति शिवाजी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक व महाराष्ट्र के बीच गहराते सीमा विवाद के बीच कांग्रेस ने मंगलूरु के एक चौराहे पर छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा लगाने विरोध किया है। मंगलूरु सिटी कार्पोरेशन (MCC) ने 29 अक्तूबर को हुई बैठक में प्रतिमा स्थापित करने का फैसला किया। 

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मराठा नायक वीर शिवाजी की प्रतिमा मंगलूरु के महावीर सर्कल (Pumpwell circle) पर लगाई जाएगी। छत्रपति शिवाजी मराठा संगठन की मांग पर एमसीसी ने यह फैसला किया है। बुधवार को जब मंगलूरू निगम परिषद की बैठक हुई तो विपक्ष के नेता नवीन डिसूजा ने सदस्यों का ध्यान महाराष्ट्र एकीकरण समिति (MES) द्वारा कर्नाटक के खिलाफ कही गई बातों की ओर दिलाया। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में जबकि एमईएस महाराष्ट्र कर्नाटक सीमा पर शांति भंग करने का प्रयास कर रही है, मंगलूरु में शिवाजी की प्रतिमा स्थापित करना अनुचित होगा। 
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शिवाजी की बजाए कोटि-चेन्नया की प्रतिमाएं लगाएं
कांग्रेस नेता डिसूजा ने निगम परिषद को सुझाव दिया कि शिवाजी की मूर्ति के स्थान पर तुलुनाडु के जुड़वां योद्धाओं कोटि-चेन्नया की मूर्ति स्थापित की जा सकती है। कांग्रेस सदस्य शशिधर हेगड़े ने भी कहा कि तटीय क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानियों और उपलब्धियों में से एक की प्रतिमा पर विचार किया जाना चाहिए।
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हिंदू योद्धाओं का विरोध, कांग्रेस की आदत : भाजपा
उधर, भाजपा सदस्यों ने कांग्रेस की आपत्ति का विरोध करते हुए कहा कि इस पार्टी ने हिंदू योद्धाओं का विरोध करना अपनी आदत बना लिया है। भाजपा पार्षदों ने कहा कि शिवाजी का नाम केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। इसे लेकर निगम पार्षदों के बीच जुबानी जंग जारी रही। इस पर परिषद के मुख्य सचेतक प्रेमानंद शेट्टी ने कहा कि पिछली बैठक में ही शिवाजी की प्रतिमा के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई थी। इसके साथ ही विपक्ष की आपत्तियां भी दर्ज की गई थीं।

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