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MGNREGA: 'मनरेगा के नियमों से छेड़छाड़ कर रही केंद्र सरकार', कांग्रेस सांसद का आरोप- यह तानाशाही

Tue, 07 Oct 2025 02:32 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Tue, 07 Oct 2025 02:32 PM IST
सार

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि 'मनरेगा का फंड किसी अन्य योजना पर खर्च करने से ग्राम सभा की शक्ति छिन जाती है। अब ग्रामीण और ग्राम सभा तय नहीं करते कि फंड कहां इस्तेमाल होगा बल्कि मोदी सरकार तय करती है।'

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Congress mp manickam tagore accuses centre for tweaking mgnrega funds called dictatorship
मनरेगा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने केंद्र सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून) कानून के नियमों से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। कांग्रेस सांसद ने कहा कि मनरेगा के 60 फीसदी फंड का जल संबंधी योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार ने मनरेगा योजना को तबाह कर दिया है। 
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'यह दिल्ली की तानाशाही'
एक अखबार के लेख को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए मणिकम टैगोर ने लिखा कि 'मोदी सरकार ने चुपचाप मनरेगा के नियमों में फेरबदल कर दिया है। मनरेगा का 60 प्रतिशत फंड जल संबंधी परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा रहा है। मनरेगा योजना गरीब ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी देने और गांवों के विकास जैसे सड़क, घर, तालाब और स्कूलों आदि के निर्माण के लिए शुरू की गई थी। लेकिन अब केंद्र सरकार तय कर रही है कि इसका फंड कहां खर्च होगा। यह विकेंद्रीकरण नहीं बल्कि दिल्ली की तानाशाही है।' 
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'मनरेगा योजना को तबाह कर दिया गया'
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि 'मनरेगा का फंड किसी अन्य योजना पर खर्च करने से ग्राम सभा की शक्ति छिन जाती है। अब ग्रामीण और ग्राम सभा तय नहीं करते कि फंड कहां इस्तेमाल होगा बल्कि मोदी सरकार तय करती है। मनरेगा की पूरी भावना है, नीचे से ऊपर की ओर विकास, लेकिन इसे तबाह कर दिया गया है।' कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि 'इससे भी बुरी बात ये है कि जिन योजनाओं के लिए फंड इस्तेमाल किया जा रहा है, वह पानी बचाने के बारे में नहीं है बल्कि सरकार की साख बचाने के बारे में है। सरकार वर्षों से भूजल संकट को नजरअंदाज कर रही है और ये सिर्फ साल 2029 में बड़े आंकड़ें दिखाना चाहते हैं।'
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'सरकार के प्रचार के लिए कल्याणकारी योजनाओं को नए सिरे से तैयार किया जा रहा है'
मणिकम टैगोर ने कहा कि 'मनरेगा के 35,000 करोड़ रुपये अब लोगों की जरूरतों पर नहीं, बल्कि पीआर सुर्खियों के लिए चुनी गई परियोजनाओं पर खर्च किए जाएंगे। इस बीच, मनरेगा में श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान नहीं हो रहा है, जॉब कार्ड निष्क्रिय हैं, और काम की मांग कम हो रही है।' उन्होंने कहा कि 'इस सरकार में हर कल्याणकारी योजना को प्रचार के लिए नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। मनरेगा ने कभी गरीबों को सशक्त बनाया था, अब इसे शक्तिशाली लोगों की सेवा के लिए तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है।'

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