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अगर चुनाव आयोग मोदी-शाह पर ले यह फैसला तो बन जाएगी नजीर
Tue, 23 Apr 2019 09:08 PM IST
अमर शर्मा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 23 Apr 2019 09:08 PM IST
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नरेंद्र मोदी- अमित शाह
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कांग्रेस पार्टी अब चुनाव आयोग के चक्कर पे चक्कर काट रही है। कभी ईवीएम को लेकर तो कभी आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन बाबत। मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के नेता चुनाव आयोग पहुंचे। इस बार उन्होंने आयोग को अपनी शिकायत या ज्ञापन तो दिया ही, मगर साथ ही एक मांग भी रख दी। ये कहिए कि मांग के साथ-साथ आयोग को एक सलाह भी दे डाली। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, हमने आयोग को पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के वीडियो दिखाकर यह मांग की है कि इनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो। इन दोनों पर कम से कम 72 घंटे का प्रतिबंध लगाया जाए।
सिंघवी का कहना है कि कोई नेता एक बार आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर दे तो वह दूसरी बार करने से पहले कई बार सोचता है। वह नेता यह सोचता है कि उसके उल्लंघन पर लोग क्या कहते होंगे, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल विपरित है।
प्रधानमंत्री जैसे बड़े शक्तिशाली एवं गरिमामय पद पर विराजमान मोदी को चुनाव आयोग और आदर्श चुनाव आचार संहिता की कोई परवाह ही नहीं है। वे बार बार इसका उल्लंघन कर रहे हैं।
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सिंघवी के मुताबिक, उन्होंने तीसरी या चौथी बार आचार संहिता का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि हमने इस बाबत सोमवार को भी चुनाव आयोग को शिकायत दी थी कि पीएम मोदी जब वोट करते हैं तो वे आयोग के नियमों का उल्लंघन कर जुलूस निकालते हैं।
उन्होंने 2014 में भी ऐसा ही किया था। आज भी उन्होंने जब अपना वोट डाला तो उसके बाद जुलूस निकाला और भाषण भी दिया। देश के पीएम द्वारा इससे ज्यादा उल्लंघन और क्या हो सकता है।
हमारे देश के संविधान और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें पीएम या किसी दूसरे नेता को चुनाव प्रचार के दौरान उल्लंघन करने की छूट मिलती हो। चुनाव प्रचार के दौरान सभी नेता बराबर हैं। सभी पर आदर्श चुनाव आचार संहिता एक समान रूप से लागू होती है। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग को मोदी और शाह द्वारा किए गए उल्लंघन के वीडियो दिखाए हैं।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर सेना को राजनीति में घसीटा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बार-बार पुलवामा, पाकिस्तान और बालाकोट का नाम लिया। वे वोट के लिए इन शब्दों का जिक्र करते रहे। ये कानून का मजाक नहीं तो क्या है। वे कभी सेना को मोदी जी की सेना कह देते हैं।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऊपर के लोगों पर कार्रवाई करने की बात आती तो आयोग की झिझक सामने आती है। जब बात पीएम और शाह की हो तो आयोग पीछे हट जाता है।
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सिंघवी का कहना है कि कोई नेता एक बार आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर दे तो वह दूसरी बार करने से पहले कई बार सोचता है। वह नेता यह सोचता है कि उसके उल्लंघन पर लोग क्या कहते होंगे, लेकिन यहां स्थिति बिल्कुल विपरित है।
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प्रधानमंत्री जैसे बड़े शक्तिशाली एवं गरिमामय पद पर विराजमान मोदी को चुनाव आयोग और आदर्श चुनाव आचार संहिता की कोई परवाह ही नहीं है। वे बार बार इसका उल्लंघन कर रहे हैं।
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सिंघवी के मुताबिक, उन्होंने तीसरी या चौथी बार आचार संहिता का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि हमने इस बाबत सोमवार को भी चुनाव आयोग को शिकायत दी थी कि पीएम मोदी जब वोट करते हैं तो वे आयोग के नियमों का उल्लंघन कर जुलूस निकालते हैं।
उन्होंने 2014 में भी ऐसा ही किया था। आज भी उन्होंने जब अपना वोट डाला तो उसके बाद जुलूस निकाला और भाषण भी दिया। देश के पीएम द्वारा इससे ज्यादा उल्लंघन और क्या हो सकता है।
हमारे देश के संविधान और कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें पीएम या किसी दूसरे नेता को चुनाव प्रचार के दौरान उल्लंघन करने की छूट मिलती हो। चुनाव प्रचार के दौरान सभी नेता बराबर हैं। सभी पर आदर्श चुनाव आचार संहिता एक समान रूप से लागू होती है। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग को मोदी और शाह द्वारा किए गए उल्लंघन के वीडियो दिखाए हैं।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक बार फिर सेना को राजनीति में घसीटा। उन्होंने पश्चिम बंगाल में बार-बार पुलवामा, पाकिस्तान और बालाकोट का नाम लिया। वे वोट के लिए इन शब्दों का जिक्र करते रहे। ये कानून का मजाक नहीं तो क्या है। वे कभी सेना को मोदी जी की सेना कह देते हैं।
चुनाव आयोग पीछे क्यों हट जाता है
सिंघवी ने कहा, चुनाव आयोग ने हमारी बात ध्यान से सुनी है। हमें भरोसा दिलाया है कि इस मामले में कार्रवाई करेंगे। हालांकि चुनाव आयोग ने पहले भी हमारी शिकायतों पर कार्रवाई की है, लेकिन पीएम और शाह के मामले में वैसी कार्रवाई दिखाई नहीं देती।यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऊपर के लोगों पर कार्रवाई करने की बात आती तो आयोग की झिझक सामने आती है। जब बात पीएम और शाह की हो तो आयोग पीछे हट जाता है।