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कांग्रेस का घोषणा-पत्र: लद्दाख में सेना 65 बिंदुओं में 26 पर पहुंच से वंचित, वन रैंक-वन पेंशन पर दिया ये भरोसा

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 05 Apr 2024 05:42 PM IST
सार

लोकसभा चुनाव शुरू होने में कुछ ही दिन बचे हैं। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को होना है। ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने आखिरी दांव खेल रही हैं। इसी बीच आज कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपना घोषणापत्र जारी कर दिया। 

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Congress manifesto Army deprived of access to 26 out of 65 points in Ladakh, gave this assurance on OROP
Congress Manifesto - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। इसमें विभिन्न मुद्दों का जिक्र किया गया है। कांग्रेस ने रक्षा न्याय यानी 'सुरक्षा के माध्यम से न्याय' में कई बातों पर अपनी नीति स्पष्ट की है। कांग्रेस ने चुनावी घोषणा पत्र में कहा, 2020 में लद्दाख में चीनी घुसपैठ एवं गलवान झड़प ने कई दशकों में राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी असफलता का प्रमाण दिया है। 21 दौर की सैन्य स्तरीय वार्ता के बावजूद, चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जा किया हुआ है। भारतीय बलों को पूर्वी लद्दाख में 2000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र के बराबर, 65 गश्त बिंदुओं में से 26 तक पहुंच से वंचित कर दिया है। डोकलाम में चीनी निर्माण से सिलीगुड़ी कॉरिडोर को खतरा है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। कांग्रेस ने 'वन रैंक वन पेंशन' को लेकर कहा है कि इसे यूपीए सरकार के 26 फरवरी 2014 के आदेश के अनुसार लागू किया जाएगा। 
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संस्थागत बनेगी सीडीएस की नियुक्ति प्रक्रिया
कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में कहा है, औपचारिक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के अभाव के कारण तदर्थ और व्यक्तिगत नीति निर्माण हुआ है। विस्तृत विचार विमर्श के बाद कांग्रेस एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति जारी करेगी। रक्षा मंत्री के ऑपरेशनल निर्देश, सशस्त्र बलों की युद्ध योजना को निर्धारित करते हैं। यूपीए सरकार ने आखिरी निर्देश 2009 में जारी किया था। मौजूदा दो मोर्चों की चुनौती से निपटने के लिए कांग्रेस एक नया ऑपरेशनल निर्देश लाएगी। कुल व्यय के अनुपात के रूप में रक्षा व्यय में कटौती को समाप्त करेगी। यह सुनिश्चित करेगी कि सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन आवंटित और खर्च किया जाएगा। कांग्रेस सरकार अग्निपथ योजना को खत्म करेगी। सशस्त्र बलों में लड़ाकू और गैर लड़ाकू भूमिकाओं में महिलाओं के लिए सेवा के अवसरों का व्यवस्थित रूप से विस्तार करेगी। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय संसद की एक चयन समिति की निगरानी में लाया जाएगा। सैन्य सुधार, तैयारियों और संयुक्त अभियानों के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद है। पारदर्शिता और सैन्य सहमति सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस, सीडीएस की नियुक्ति की प्रक्रिया को संस्थागत बनाएगी।   
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राहुल ने भी 'एलएसी' को लेकर सरकार को घेरा
बता दें कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 'लद्दाख' और 'अरुणाचल प्रदेश' का मुद्दा उठाया है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी बॉर्डर से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर मुखर रहे हैं। पिछले सप्ताह कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि लद्दाख में अनेकों पेट्रोलिंग प्वाइंट पर चीन ने कब्जा किया है। चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अरुणाचल प्रदेश की 30 जगहों को नए नाम दे दिए हैं। लद्दाख के साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भी, चीन लगातार भारतीय जमीन पर कब्जा कर रहा है। 
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सितंबर 2023 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। सोनिया ने अपने पत्र में जिन 'नौ' मुद्दों का जिक्र किया था, उनमें चीन द्वारा लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में की जा रही घुसपैठ भी शामिल थी। राहुल गांधी भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल 'एलएसी' को लेकर कई बार केंद्र सरकार को घेर चुके हैं। 

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने संसद में कहा था कि हमारे 50-60 हजार सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के ऊपर तैनात हैं। ये बुनियादी सवाल इसलिए उत्पन्न होता है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013 से लेकर अब तक 19 बार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिल चुके हैं। पांच बार प्रधानमंत्री मोदी चीन गए हैं। भारत का कोई भी प्रधानमंत्री 1947 से लेकर 2023 तक इतनी बार चीन नहीं गया होगा। 

डीजीपी/आईजीपी कॉन्फ्रेंस में हुआ था खुलासा
कांग्रेस नेता, मनीष तिवारी के अनुसार, दिसंबर, 2022 में जब डीजीपी और आईजीपी की कॉन्फ्रेंस हुई तो वहां एसएसपी लद्दाख की तरफ से 'Security issues pertaining to unfenced border' प्रस्तुत किया जाता है। उसमें लिखा था कि भारत ने 65 पेट्रोलिंग प्वाइंट्स में से 26 प्वाइंट पर अपनी पहुंच खो दी है। इस रिपोर्ट के बाद गत वर्ष कांग्रेस एवं दूसरे विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की थी कि इस विषय पर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाए। विपक्ष को भरोसे में लेकर, सरकार को विस्तारपूर्वक यह बताना चाहिए कि पिछले तीन वर्ष में बॉर्डर पर क्या घटनाक्रम हुआ है। उसका ब्यौरा क्या है, किस तरह की नेगोसिएशन चल रही हैं, इसका एक सार, विपक्ष के समक्ष रखना चाहिए। गत वर्ष संसद के मानसून सत्र में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने चीन से लगती सीमा पर पेट्रोलिंग पॉइंट्स को लेकर मोदी सरकार से कई सवाल पूछे थे। इनमें चीन बॉर्डर पर 65 में से 26 पेट्रोलिंग पॉइंट्स से भारत का अधिकार छिनना, और 'बफर' जोन भी हमारी जमीन में तैयार होना, शामिल था। 


एक इंच जमीन पर कब्जा नहीं किया है
केंद्र सरकार ने कांग्रेस पार्टी के आरोपों को सिरे से नकार दिया था। लद्दाख के उपराज्यपाल बीडी मिश्रा ने कहा था कि चीन ने भारत की एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। हमारे सशस्त्र बल किसी भी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं। मिश्रा ने यह बात कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों के जवाब में कही थी, जिनमें लद्दाख की भूमि के एक भूमि के एक बड़े हिस्से पर चीन का कब्जा होने की बात कही गई थी। मिश्रा ने कहा था, मैं किसी के बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगा, लेकिन मैं वही कहूंगा जो सही तथ्य हैं। मैंने जमीनी तौर पर खुद देखा है कि चीन ने एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं किया है।
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