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गोवा चुनाव: कांग्रेस नेता चिदबंरम ने टीएमसी पर साधा निशाना, कहा- 'राकांपा-शिवसेना से गठबंधन नहीं, लेकिन वे फिर भी दोस्त रहेंगे'
Sun, 30 Jan 2022 04:14 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पणजी
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 30 Jan 2022 04:14 PM IST
सार
चिदंबरम को गोवा में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ चुनाव प्रेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने राज्य चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के कूदने को लेकर भी निशाना साधा।
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पी चिदंबरम (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने रविवार को गोवा विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की तैयारियों पर बात की। उन्होंने कहा कि गोवा के लिए कांग्रेस का शिवसेना या राकांपा से गठबंधन नहीं हो पाया, जबकि उन्होंने इसके लिए काफी कोशिशें कीं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन न हो पाने के बावजूद इन दोनों पार्टियों की कांग्रेस के साथ दोस्ती रहेगी और वे आगे साथ काम करने के मौके तलाशती रहेंगी।
चिदंबरम को गोवा में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ चुनाव प्रेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने राज्य चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के कूदने को लेकर भी निशाना साधा। चिदंबरम ने कहा कि टीएमसी ने कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं किया, जबकि उन्हें इसका प्रस्ताव भी दिया गया था। लेकिन उस पार्टी (टीएमसी) ने कांग्रेस नेताओं को लालच देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने साफ किया कि उन्हें पार्टी नेतृत्व की तरफ से टीएमसी से चर्चा करने का कोई निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने कहा, "मुझे भरोसा है कि पार्टी नेतृत्व ने सभी तथ्यों और हालात को देखते हुए अपनी नीति तैयार की है।" गोवा के लिए कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किए जाने को लेकर हुए सवाल पर चिदंबरम ने कहा कि इसका फैसला सभी प्रत्याशियों से चर्चा के बाद ही लिया जा सकता है। सीएम सभी की सहमति के बाद ही तय होगा।
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'भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है सीधा मुकाबला'
चिदंबरम ने कहा कि गोवा के विधानसभा चुनाव कांग्रेस-गोवा फॉरवर्ड पार्टी और भाजपा के बीच हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस इन चुनावों में आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना के साथ गठजोड़ क्यों नहीं कर पाई, चिदंबरम ने कहा कि राकांपा और शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी हैं और वह उन्हें गोवा में भी सहयोगी बनाना पसंद करती।
'प्रस्तावों पर नहीं बनी सहमति'
चिदंबरम ने कहा, ‘‘हमने कोशिश की। उन्होंने कुछ प्रस्ताव दिए। हमने कुछ प्रस्ताव दिए। दुर्भाग्य से इस बारे में कोई बैठक नहीं हो पाई। मैं स्वीकार करता हूं कि दोनों पक्षों की मजबूरियां थीं और हमारे सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद हम बैठक के बिंदु पर नहीं पहुंच पाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, हम दोस्त हैं और दोस्त रहेंगे। चुनाव के बाद हम राकांपा और शिवसेना के साथ मिलकर काम करने के अवसर तलाशते रहेंगे।’’
महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए राकांपा और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया, जिसे महाविकास आघाड़ी (एमवीए) नाम दिया गया। शिवसेना और राकांपा ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि वे गोवा चुनाव एक साथ लड़ेंगे।
'तृणमूल कांग्रेस ने हमारे नेताओं को दिया लालच'
गठजोड़ नहीं करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस की स्थिति को समझने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वे कुछ महीने पहले गोवा में दाखिल हुए और मेरी खास मित्र ममता जी ने गोवा में घोषणा की कि टीएमसी ने गठबंधन किया है और उनके गठबंधन में शामिल होने के लिए किसी भी अन्य पार्टी का स्वागत है। टीएमसी के महासचिव ने घोषणा की कि टीएमसी सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। फिर उन्होंने कांग्रेस विधायक लुइजिन्हो फलेरियो को टीएमसी में आने का प्रलोभन दिया।’’
उन्होंने घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 16 दिसंबर को मौजूदा विधायक रेजिनाल्ड लॉरेन्को के नाम समेत अपने उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा की और चार दिन बाद, 20 दिसंबर को लॉरेन्को को टीएमसी में शामिल कराया गया था। चिदंबरम ने कहा, ‘‘24 दिसंबर को टीएमसी के उपाध्यक्ष ने मुझसे मुलाकात की और सुझाव दिया कि दोनों पार्टियों को गोवा में मिलकर काम करना चाहिए। मैं अपने नेतृत्व को इस सुझाव के बारे में अवगत कराने के लिए सहमत हुआ और मैंने तुरंत ऐसा किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, टीएमसी ने हमारे नेताओं, सरपंचों, पंचों, अन्य को तोड़ना जारी रखा, उदाहरण के लिए वास्को और मरमुगाओ के नाम हैं।’’
'वफादारी पार्टी के लिए सर्वोच्च प्रथामिकता'
वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों के भाजपा में जाने और आगे ऐसा ना हो इसे रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं, इस पर कांग्रेस के गोवा चुनाव प्रभारी ने कहा कि वफादारी पार्टी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण उपाय, जिसे 30 निर्वाचन क्षेत्रों में लागू किया गया है वह यह है कि ब्लॉक द्वारा अनुशंसित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए चुना गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद, यदि अन्य दल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने को तैयार हैं, तो कांग्रेस परिस्थितियों के आधार पर फैसला करेगी।
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चिदंबरम को गोवा में विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ चुनाव प्रेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने राज्य चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के कूदने को लेकर भी निशाना साधा। चिदंबरम ने कहा कि टीएमसी ने कांग्रेस के साथ कोई गठबंधन नहीं किया, जबकि उन्हें इसका प्रस्ताव भी दिया गया था। लेकिन उस पार्टी (टीएमसी) ने कांग्रेस नेताओं को लालच देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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कांग्रेस के इस वरिष्ठ नेता ने साफ किया कि उन्हें पार्टी नेतृत्व की तरफ से टीएमसी से चर्चा करने का कोई निर्देश नहीं मिला है। उन्होंने कहा, "मुझे भरोसा है कि पार्टी नेतृत्व ने सभी तथ्यों और हालात को देखते हुए अपनी नीति तैयार की है।" गोवा के लिए कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किए जाने को लेकर हुए सवाल पर चिदंबरम ने कहा कि इसका फैसला सभी प्रत्याशियों से चर्चा के बाद ही लिया जा सकता है। सीएम सभी की सहमति के बाद ही तय होगा।
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'भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है सीधा मुकाबला'
चिदंबरम ने कहा कि गोवा के विधानसभा चुनाव कांग्रेस-गोवा फॉरवर्ड पार्टी और भाजपा के बीच हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस इन चुनावों में आसानी से बहुमत हासिल कर लेगी। यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और शिवसेना के साथ गठजोड़ क्यों नहीं कर पाई, चिदंबरम ने कहा कि राकांपा और शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी हैं और वह उन्हें गोवा में भी सहयोगी बनाना पसंद करती।
'प्रस्तावों पर नहीं बनी सहमति'
चिदंबरम ने कहा, ‘‘हमने कोशिश की। उन्होंने कुछ प्रस्ताव दिए। हमने कुछ प्रस्ताव दिए। दुर्भाग्य से इस बारे में कोई बैठक नहीं हो पाई। मैं स्वीकार करता हूं कि दोनों पक्षों की मजबूरियां थीं और हमारे सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद हम बैठक के बिंदु पर नहीं पहुंच पाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, हम दोस्त हैं और दोस्त रहेंगे। चुनाव के बाद हम राकांपा और शिवसेना के साथ मिलकर काम करने के अवसर तलाशते रहेंगे।’’
महाराष्ट्र में 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए राकांपा और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया, जिसे महाविकास आघाड़ी (एमवीए) नाम दिया गया। शिवसेना और राकांपा ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा की थी कि वे गोवा चुनाव एक साथ लड़ेंगे।
'तृणमूल कांग्रेस ने हमारे नेताओं को दिया लालच'
गठजोड़ नहीं करने को लेकर तृणमूल कांग्रेस की आलोचना के बारे में पूछे जाने पर चिदंबरम ने कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस की स्थिति को समझने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वे कुछ महीने पहले गोवा में दाखिल हुए और मेरी खास मित्र ममता जी ने गोवा में घोषणा की कि टीएमसी ने गठबंधन किया है और उनके गठबंधन में शामिल होने के लिए किसी भी अन्य पार्टी का स्वागत है। टीएमसी के महासचिव ने घोषणा की कि टीएमसी सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। फिर उन्होंने कांग्रेस विधायक लुइजिन्हो फलेरियो को टीएमसी में आने का प्रलोभन दिया।’’
उन्होंने घटनाक्रम का विवरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 16 दिसंबर को मौजूदा विधायक रेजिनाल्ड लॉरेन्को के नाम समेत अपने उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा की और चार दिन बाद, 20 दिसंबर को लॉरेन्को को टीएमसी में शामिल कराया गया था। चिदंबरम ने कहा, ‘‘24 दिसंबर को टीएमसी के उपाध्यक्ष ने मुझसे मुलाकात की और सुझाव दिया कि दोनों पार्टियों को गोवा में मिलकर काम करना चाहिए। मैं अपने नेतृत्व को इस सुझाव के बारे में अवगत कराने के लिए सहमत हुआ और मैंने तुरंत ऐसा किया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, टीएमसी ने हमारे नेताओं, सरपंचों, पंचों, अन्य को तोड़ना जारी रखा, उदाहरण के लिए वास्को और मरमुगाओ के नाम हैं।’’
'वफादारी पार्टी के लिए सर्वोच्च प्रथामिकता'
वर्तमान विधानसभा में कांग्रेस के विधायकों के भाजपा में जाने और आगे ऐसा ना हो इसे रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं, इस पर कांग्रेस के गोवा चुनाव प्रभारी ने कहा कि वफादारी पार्टी के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण उपाय, जिसे 30 निर्वाचन क्षेत्रों में लागू किया गया है वह यह है कि ब्लॉक द्वारा अनुशंसित उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए चुना गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद, यदि अन्य दल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने को तैयार हैं, तो कांग्रेस परिस्थितियों के आधार पर फैसला करेगी।