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एसआईआर पर उठे सवाल: कांग्रेस बोली- ज्ञानेश कुमार को पद पर रहने का हक नहीं; जज की टिप्पणी का दिया हवाला
Sun, 04 Oct 2026 08:46 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 04 Oct 2026 08:46 PM IST
सार
कांग्रेस ने जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की मतदान के अधिकार पर कथित टिप्पणी का हवाला देकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा विवाद उठाया है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा होने के बावजूद वोटिंग के अधिकार से नागरिकों को वंचित करना मनमानी है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोला है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के जज उज्ज्वल भुइयां की मतदान के अधिकार पर कथित टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार ने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें जस्टिस भुइयां की टिप्पणी का जिक्र था। रमेश ने दावा किया कि यह टिप्पणी दिखाती है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान की भावना और उसके प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
वोटिंग के अधिकार पर जस्टिस भुइयां ने क्या कहा?
जयराम रमेश ने जिस मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, उसके मुताबिक जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया से लाखों भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार छिन जाता है और उन्हें अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जस्टिस भुइयां ने मजबूती से अपनी राय रखी है कि वोट देने का अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से यह साबित होता है कि सांविधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान के प्रावधानों और उसकी भावना, दोनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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यह भी पढ़ें: जयशंकर ने यूरोप को दिया दो टूक जवाब: बोले- रूस तब भी भारत के साथ था, जब कई देश पाकिस्तान के समर्थन में थे
एसआईआर को लेकर पहले से क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों पर क्या जवाब दिया?
दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर आपत्तियां उठाए जाने की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में मतभेद होना चर्चा और विचार-विमर्श का हिस्सा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन हासिल है और उन्हें स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किया जाता है।
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वोटिंग के अधिकार पर जस्टिस भुइयां ने क्या कहा?
जयराम रमेश ने जिस मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया, उसके मुताबिक जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि अगर किसी प्रक्रिया से लाखों भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार छिन जाता है और उन्हें अपने ही देश में दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है, तो ऐसी प्रक्रिया अपने आप में मनमानी है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जस्टिस भुइयां ने मजबूती से अपनी राय रखी है कि वोट देने का अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।
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कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए?
जयराम रमेश ने कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी से यह साबित होता है कि सांविधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ने संविधान के प्रावधानों और उसकी भावना, दोनों का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणी ने ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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एसआईआर को लेकर पहले से क्यों उठ रहे हैं सवाल?
हाल ही में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का दावा किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन फैसलों और आदेशों को अपनी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों पर क्या जवाब दिया?
दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कथित तौर पर आपत्तियां उठाए जाने की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखा। आयोग ने कहा कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में मतभेद होना चर्चा और विचार-विमर्श का हिस्सा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन हासिल है और उन्हें स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किया जाता है।