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रायशुमारी: पंजाब के कांग्रेस विधायकों को दिल्ली बुलाकर टटोला जा रहा बगावत में दम
Tue, 01 Jun 2021 03:14 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 01 Jun 2021 03:14 AM IST
सार
- विधायकों की रायशुमारी से कांग्रेस तय करेगी अगली कैप्टनसी
- विधायकों को बयानबाजी न करने की हिदायत
- 25 विधायकों-मंत्रियों ने पक्ष रखा, सिद्धू आज और कैप्टन बुधवार को कमेटी के सदस्यों से मिलेंगे
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ पार्टी में लंबे समय से उठ रही बगावत की आवाज में कितना दम है, इसकी सुनवाई और पड़ताल सोमवार से दिल्ली में शुरू हो गई। पहले दिन कांग्रेस के 25 विधायकों जिसमें आठ मंत्री भी शामिल हैं नेतृत्व की ओर से गठित तीन सदस्यों की कमेटी के सामने अपना पक्ष रखने पंहुचे। साथ ही भविष्य की दिशा पर अपने सुझाव भी दिए। अगले दो दिन अन्य विधायकों, सांसद, पूर्व अध्यक्षों के साथ बुधवार को मुख्यमंत्री भी कमेटी के सामने अपना पक्ष रखेंगे। पहले दिन की बैठक आठ घंटे से अधिक चली।
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वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, जयप्रकाश अग्रवाल और प्रभारी हरीश रावत की कमेटी ने विधायकों से सरकार की कार्यप्रणाली, कमियों और विधायकों को आ रही दिक्कतों पर उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया। कमेटी के सदस्यों ने न सिर्फ वर्तमान घमासान को समझने की कोशिश की बल्कि ये भी टटोल रही है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव किसकी कैप्टनसी में लड़ी जाए। कमेटी ने मिलने पंहुचे सभी नेताओं को अब किसी भी प्रकार की बयानबाजी न करने की हिदायत दी है। सबसे पहले प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ा के साथ कमेटी ने आधा घंटे उनका पक्ष जाना।
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मंगलवार को नवजोत सिंह सिद्धू को समय दिया गया है। दरअसल कहीं न कहीं सिद्धू के तेवरों ने असंतुष्टों की संख्या में इजाफा कर दिया है। कोटकपूरा पुलिस फायरिंग केस की जांच हाईकोर्ट में खारिज होने के बाद कैप्टन पर कई कांग्रेसी नेता बादल परिवार से मिली भगत का आरोप लगा रहे हैं। पिछले एक महीने से सिद्धू के साथ दो मंत्रियों और कई विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। कमेटी के सामने कुछ विधायकों ने इस विषय पर भी अपनी बात रखी है। कमेटी इस बात से आश्वस्त है कि जिन लोगों के साथ बात हुई है उससे राज्य में अलग-अलग गुटबाजी जैसा नहीं है।
ये तय है कि कांग्रेस पंजाब में चुनाव के पहले अपना कैप्टन बदलकर कोई जोखिम उठाना चाहेगी, लेकिन जिस तेजी से बगावती स्वर उठ रहे हैं और असंतुष्ट नेताओं की संख्या बढ़ रही है उसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहती है। लिहाजा कैप्टन सरकार में हर हाल संतुलन बनाकर पावर का विकेंद्रीकरण करना चाहती है। नेतृत्व को बड़ी चिंता अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर है। पार्टी में टकराव और खेमेबाजी का नुकसान न उठाना पड़े इसी को ध्यान में रखकर हर पक्ष को संतुष्ट करने का खाका तैयार किया जाना है। चुनाव से पहले नेतृत्व कैप्टन और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के झगड़े को निपटाने के साथ सरकार के दो मंत्रियों, करीब दो दर्जन नाराज विधायकों, पंजाब के सांसद और संगठन के बीच मनमुटाव को समाप्त कर लेना चाहता है।
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने मीडिया से कहा कि कमेटी के सामने रखी बात मेरे और कमेटी के बीच है। उनका कहना है कि मुख्य मुद्दा पार्टी को कैसे मजबूत किया जाए इस पर नेताओं की राय ली जा रही है। उनका कहना है कि पिछली बार पंजाब की जनता ने हमें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। अगर कहीं किसी तरह का मतभेद है तो उसे कैसे दूर किया जाए और आगे की प्लानिंग कैसे की जाए।