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गुजरात नहीं मोदी मॉडल था, जो अब बेनकाब हो गयाः गहलोत

Tue, 05 Dec 2017 08:34 PM IST
संजय मिश्र/ अहमदाबाद
संजय मिश्र/ अहमदाबाद Updated Tue, 05 Dec 2017 08:34 PM IST
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Congress Gujarat in charge Ashok Gehlot says people's trust in PM Modi is dead

हिंदुत्व की प्रयोगशाला कहे जाने वाले गुजरात में विधानसभा का चुनाव लंबे अरसे के बाद जातीय रंग में रंगता दिख रहा है। राज्य में बीते 22 वर्षों से राजनीतिक रूप से अप्रभावी दिखने वाली कांग्रेस पार्टी आज भाजपा की सबसे सफल जोड़ी पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को उनके ही गृह प्रदेश में उन्हें हर मामले में चुनौती पेश करती दिख रही है। यही नहीं सियासी गलियारे को रास न आने वाले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब गुजरात की सधी रणनीति के बदौलत अब एक सफल नेता के रूप में नजर आने लगे हैं।  

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गुजरात में कांग्रेस पार्टी के इस बदले रुख का श्रेय प्रदेश प्रभारी एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत की रणनीति को दिया जा रहा है। बतौर प्रभारी अपने अल्प काल में गहलोत ने प्रदेश कांग्रेस की गंदगी को साफ करते हुए हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश की तिकड़ी को साधकर भाजपा को उसके सबसे मजबूत किले में ही घेर दिया है। यही नहीं उनकी रणनीति के आगे भाजपा के हर हथकंडे फेल हो रहे हैं। 
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धर्म और राष्ट्रवाद के मुद्दों के बजाय इस दफे का चुनाव जाति पर ही केंद्रित नजर आ रहा है। सटीक चुनावी रणनीति के बदौलत गहलोत ने जता दिया है कि उन्हें राजस्थान का गांधी यूं ही नहीं कहा जाता है। गांधी और पटेल के गुजरात में कांग्रेस की स्थिति और पार्टी में आये अचानक बदलाव को करीब से समझने के लिए अमर उजाला के विशेष संवाददाता ने गहलोत से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश:-
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सवाल:- गुजरात विधानसभा के चुनाव अंतिम दौर में हैं। क्या लगता हैं इस दफे कांग्रेस यहां भाजपा के तिलिस्म को तोड़ पाएगी?

जवाब:- कांग्रेस पार्टी यहां गुजरात में चुनाव जीत रही है। अंडर करंट चल रहा है। हम जीत रहे हैं और बौखलाहट के वजह से पीएम मोदी और अमित शाह कांग्रेस पार्टी और उसके चुनाव पर सियासी अटैक कर रहे हैं। इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि पीएम स्तर के व्यक्ति ने किसी पार्टी संगठन के चुनाव पर इस तरह का सियासी अटैक किया हो।

कांग्रेस संगठन के चुनाव पर पीएम मोदी ने ऐसे व्यक्ति का नाम लेकर अटैक किया है, जो कि उस चुनाव का वोटर नहीं है। पीएम मोदी के जरिये ऐसे नामों का सहारा लेकर राहुल पर अटैक दर्शाता है कि आप कितने घबरा गए हो, हार के डर से बौखला गए हो। वो (पीएम मोदी) क्या बोल रहे हैं, खुद को ज्ञान नहीं है। कांग्रेस के लोकतंत्र की बात कर रहे हैं अपनी नहीं। भाजपा में कैसा लोकतंत्र है सबको पता है। कौन पार्टी अध्यक्ष, कौन पीएम और कौन सीएम बनेगा यह सब आरएसएस तय करता है। और अब ये कांग्रेस की बात कर रहे हैं।
 
सवाल:- भाजपा ने आपके गांधी और पटेल को अपना लिया है, आपने भी गुजरात चुनाव के घोषणापत्र में विवेकानंद की बात की है। ऐसा तो नहीं कि आप उनके वैचारिक चेहरों को हाईजैक करना चाहते हैं? 
 
जवाब: देखिए, ये ऐसे हिप्पोक्रेट हैं जो कि गांधी जी को अपनाने लगे हैं। पटेल ने आरएसएस को बैन लगाया था, ये उनको अपना रहे हैं। मोदी और शाह इतने घमंड में चल रहे हैं कि इन्हें फर्क नहीं पता। नेहरू, पटेल अथवा मौलाना आज़ाद, गांधी जी के सानिध्य में इन सबके अलावा भी कांग्रेस के कई और महापुरुष हुए हैं। पहले जनसंघ, उसके बाद जनता पार्टी और अब भाजपा के रूप में इनकी इतनी दुर्गति हुई है कि अब वे कांग्रेस के महापुरुषों के नाम पर अपनी राजनीति कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी अपने सभी महापुरुषों का बराबर सम्मान करती है। 
 

राहुल कर रहे हैं ऐतिहासिक रैलियां

Congress Gujarat in charge Ashok Gehlot says people's trust in PM Modi is dead
राहुल गांधी - फोटो : File Photo

सवाल:- राहुल के मंदिर जाने को सियासी करार देते हुए भाजपा यह आरोप लगा रही है कि कांग्रेस को अचानक से मंदिर की याद आई है। ऐसा तो नहीं कि आप भाजपा के मुद्दों को हथियाने की सोच रहे हैं?
 
उत्तर:- इन्होंने (भाजपा ने) धर्म की राजनीति की है। मेरा मानना है कि हर किसी का अपना धर्म है, अपना अपना विश्वास होता है। इन्होंने 40 साल पहले भी गाय के नाम पर राजनीतिक आंदोलन चलाया था। तब देश में इनका घेराव हो गया था। तब गाय को छोड़ इन्होंने राम मंदिर पकड़ लिया। अब सत्ता आने के बाद फिर से गाय की राजनीति कर रहे हैं।

रही बात कांग्रेस नेताओं के मंदिर जाने की तो यह बात नई नहीं है।  2007 के विधानसभा चुनाव का प्रचार सोनिया जी ने अंबाजी मंदिर से शुरू किया था। तब मैं भी उनके साथ था। उसके बाद चुनाव प्रचार में हेलीकाप्टर का चलन बढ़ गया। अब मंदिर तो हवा में आते नहीं, क्योंकि अधिकांश प्रचार हेलीकाप्टर से होता था। अब हम लोग सड़क मार्ग के जरिये प्रचार कर रहे हैं । रास्ते में जहां मंदिर आ जाता है, वहां चले जाते हैं। 
 
सवाल:-  चुनाव में राहुल के धर्म पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, जवाब में राहुल ने भी अपने आप को शिवभक्त बताया है। इससे आपकी पार्टी के चुनावी संभावनाओं पर विपरीत असर तो नहीं पड़ेगा? 
 
जवाब:- देखिए, ये बातें उठाना चुनाव के लिए इनका षडयंत्र है, लेकिन इनकी हार निश्चित है। जनता इनके फर्जीवाड़े को पहचान चुकी है। ये सब बौखला कर बोल रहे हैं, कौन परवाह करे इनकी। ये कितने भी षडयंत्र कर लें हम परवाह नहीं करते। हार उनको सामने दिख रही है, जनता इनका साथ नहीं दे रही है। जबकि राहुल जी ऐतिहासिक रैलियां कर रहे हैं। उन्हें जनता का स्नेह, प्रेम और भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। 

सवाल:- आखिर वजह क्या है कि आप गुजरात में कांग्रेस की जीत को लेकर इतने आश्वस्त नजर आ रहे हैं। पहले की तरह अति उत्साह तो नहीं? 
 
जवाब:- मैंने पूरे गुजरात के कई दौरे किये हैं। लोगों के हावभाव से स्पष्ट है कि कांग्रेस के पक्ष में अंडर करंट है। दरअसल मोदी जी ने जनता को धोखा दिया है। वाइब्रेंट गुजरात के नाम पर जनता को बेवकूफ बनाया है, जो कि एक्सपोज़ हो गया है। वाइब्रेंट गुजरात के जरिये 7.5 लाख करोड़ के निवेश के दावे किए गए थे 10 प्रतिशत निवेश भी नहीं हो सका है।

ऊपर से पहले नोटबंदी और उसके बाद जल्दबाजी में जीएसटी लागू कर दिया। इससे छोटे उद्यमी इतने परेशान हैं कि उनके दर्द को शब्दों में बयां भी नहीं किया जा सकता है। कइयों का कारोबार बंद हो गया है। यही वजह है कि अब लोगों को मोदी की बातों पर विश्वास नहीं रहा। इनकी रैलियों में पहले मोदी-मोदी के नारे लगते थे, अब कुर्सियां खाली रह रहीं हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि उन्होंने (मोदी) लोगों का दिल तोड़ दिया है। इसी वजह से जनता कांग्रेस का साथ दे रही है। 
 

ये गुजरात मॉडल नहीं, मोदी मॉडल था

Congress Gujarat in charge Ashok Gehlot says people's trust in PM Modi is dead
सवाल:- आखिर क्या वजह है कि भाजपा के जरिये गुजरातवासियों को नेहरू, इंदिरा और राजीव के शासन की याद ताजा कराई जा रही है। कहीं कांग्रेस के लिए ये कमजोर कड़ी तो नहीं? 
 

जवाब:- हम चाहते हैं वो हम पर सियासी अटैक करें। वो हम पर जितना सियासी हमला बोलेंगे, हमें फायदा है। इनका फरेब जनता समझ चुकी है। कार्यों के बदौलत हमारे महापुरुषों का सम्मान है। इंदिरा जी के नेतृत्व में, दुनिया के इतिहास की इतनी बड़ी घटना हुई जिसका वर्णन सब करते हैं।

पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए, बांग्लादेश बन गया। उनके ही कुशल नेतृत्व में दुश्मन देश की सेना के 80 से 90 हजार जनरल, कर्नल और जवानों ने सरेंडर किया। नई पीढ़ी को इन सब बातों की असलियत पता चलेगी, क्योंकि ये लोग गलत तथ्य देकर नई पीढ़ी को गुमराह कर रहे हैं। ये न सिर्फ असत्य बोलते हैं बल्कि झूठे वायदे भी करते हैं।

लोकसभा चुनाव से पहले कहा था, विदेश से काला धन लेकर आएंगे। लोगों को 15 लाख रुपए देंगे, हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार देने का भी वायदा था। मगर क्या हुआ सब जुमला ही साबित हुए। उल्टा अपनी बात को राहुल जी के मुंह में डालने में लगे हैं। 
 
सवाल:- गुजरात मॉडल को आगे कर भाजपा ने लोकसभा से लेकर कई राज्यों तक में जीत दर्ज की है। गुजरात के परिणाम का 2019 के लोकसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा?
 
जवाब:- मेरा मानना है कि ये गुजरात मॉडल कुछ नहीं, ये मोदी मॉडल था। वो एक्सपोज़ (बेनकाब) हो गया है। इनका ग्राफ नीचे जा रहा है। देश का कौन सा वर्ग इनकी तारीफ करता नजर आ रहा है। किसान, मजदूर, नौजवान, अनुसूचित जाति, जनजाति और व्यापारी इनमें कोई भी वर्ग इनसे खुश नहीं है। यही वजह है कि यहां कांग्रेस सरकार में आ रही है और 2019 में भी पार्टी की जीत होगी। 
 
सवाल:- गुजरात चुनाव के बीच राहुल गांधी की कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर ताजपोशी हो रही है। गुजरात के चुनाव और कांग्रेस की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा? 
 
जवाब:- मेरा मानना  है कि राहुल की ताजपोशी का बहुत असर पड़ेगा, युवा उनके नेतृत्व में आगे आएंगे। उस वक्त हम भी नौजवान थे जब 28-29 साल में ही एमपी बन गए थे। मुख्यमंत्री, केंद्र में मंत्री और पीसीसी अध्यक्ष से लेकर आज पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। आज पार्टी में जो 4  राष्ट्रीय महामंत्री हैं, वे सभी इंदिरा जी के समय नौजवान थे। राहुल जी भी वही काम करेंगे । अनुभवों का लाभ, युवाओं का साथ लेकर वे आगे बढ़ेंगे। ये कांग्रेस की खासियत है कि वह युवाओं को आगे लाती है।
 
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