कांग्रेस में अंतर्कलह: अनिल शास्त्री की सोनिया-राहुल को सलाह, सिब्बल ने कहा- मेरे लिए पद नहीं, देश अहम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कांग्रेस में जारी अंतर्कलह अभी खत्म नहीं हुई है। कांग्रेस कार्यसमिति की सोमवार को हुई बैठक में पार्टी के 23 नेताओं द्वारा नेतृत्व में बदलाव की मांग को लेकर लिखा गया पत्र छाया रहा। सोनिया गांधी को फिर से पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के बाद चिट्ठी लिखने वाले नेताओं ने आगे की रणनीति को लेकर बैठक की थी। मंगलवार को सिब्बल ने ऐसा ट्वीट किया है जिससे कि अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं। वहीं पार्टी से निलंबित नेता संजय झा ने इसे अंत की शुरुआत बताया है।
कपिल सिब्बल ने कहा, ‘यह एक पद के बारे में नहीं है। यह मेरे देश के बारे में हैं जो सबसे ज्यादा मायने रखता है।’ दूसरी तरफ, पार्टी से निलंबित नेता संजय झा ने ट्वीट कर लिखा, ‘यह तो अंत की शुरुआत है।’ इससे पहले राहुल गांधी की भाजपा के साथ मिलीभगत वाली कथित टिप्पणी को लेकर सिब्बल ने विरोध जताते हुए ट्वीट किया था। हालांकि राहुल से बात होने पर उन्होंने उस ट्वीट को वापस ले लिया था।
It’s not about a post
— Kapil Sibal (@KapilSibal) August 25, 2020
It’s about my country which matters most
राहुल ने लगाया था भाजपा संग मिलीभगत का आरोप
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गांधी ने पत्र लिखने वाले नेताओं पर भाजपा संग मिलीभगत का आरोप लगाया था। जिसपर कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आजाद ने पलटवार किया था। सिब्बल ने कहा था कि मैंने पिछले 30 सालों में कभी भी किसी मुद्दे पर भाजपा के पक्ष में बयान नहीं दिया। फिर भी हम भाजपा से मिले हो सकते हैं। वरिष्ठ नेता के ट्वीट के बाद राहुल ने उनसे बात की जिसके बाद उन्होंने ट्वीट को हटा लिया। वहीं गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि यदि राहुल गांधी का भाजपा के साथ मिलीभगत वाला बयान साबित हो जाता है तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
यह भी पढ़ें- पांच महीने पहले शशि थरूर के डिनर में पड़ी थी कांग्रेस नेतृत्व को लिखे पत्र की नींव
पार्टी के नेतृत्व में है कुछ चीजों की कमी : अनिल शास्त्री
वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने कहा, 'कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में कुछ चीजों की कमी है और सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पार्टी नेताओं के बीच बैठकें नहीं होती हैं। अगर एक अलग राज्य का कोई पार्टी नेता दिल्ली आता है, तो उसके लिए यहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलना आसान नहीं होता है। यदि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता, जैसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी पार्टी नेताओं से मिलना शुरू करते हैं, तो मुझे लगता है कि 50 प्रतिशत समस्याओं का हल हो जाएगा।'
चाको बोले- नेतृत्व में कुछ चीजें होनी चाहिए दुरुस्त
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीसी चाको ने कहा, 'मुझे लगता है कि नेतृत्व में कुछ चीजें दुरुस्त होनी चाहिए। लेकिन यह एक पत्र के रूप में नहीं होना चाहिए था। जिन लोगों ने इसे लिखा है, मैं उनके विचार साझा करता हूं, लेकिन सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले पत्र जारी करके उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया, उसने विवाद पैदा कर दिया।'
विरोधियों को किनारे नहीं कर पाए राहुल
बैठक की शुरुआत में योजना राहुल गांधी के विरोधी नेताओं को किनारे करने की थी। इसी रणनीति के तहत सोनिया ने अंतरिम अध्यक्ष पद छोड़ने की पेशकश की। इसके बाद राहुल ने पत्र लिखने वाले नेताओं पर निशाना साधा। भले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह, एके एंटनी जैसे नेताओं ने सोनिया के समर्थन में कसीदे पढ़े, मगर अंत में सोनिया को कहना पड़ा कि उनके मन में पत्र लिखने वालों के प्रति दुर्भावना नहीं है।
बड़ा सवाल-कौन संभालेगा पार्टी की कमान
विवाद टालने के लिए कमेटी बनाने की घोषणा हुई है। यह संगठन के कामकाज पर उठाए गए सवालों की पड़ताल करेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि कमेटी में किस गुट के नेता का पलड़ा भारी रहता है। हालांकि राहुल विरोधी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि कमेटी समाधान नहीं है। सवाल यह है कि पार्टी की कमान कौन संभालेगा और पार्टी भविष्य में किस तरह की कार्यशैली अपनाएगी।
प्रियंका के लिए तैयार हो सकती है जमीन
राहुल विरोधी धड़ा मानता है कि इस समय गांधी परिवार के इतर कोई पार्टी नहीं संभाल सकता। राहुल की पंसद वेणुगोपाल या किसी अन्य नेता के हाथ में कमान जाने से स्थिति और बिगड़ेगी। ऐसे में छह महीने में प्रियंका गांधी को संगठन की कमान देने की पटकथा तैयार की जा सकती है। शुरुआती दौर में नए अध्यक्ष की मदद के लिए दो वरिष्ठ नेताओं को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जा सकती है।