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नागांव उपचुनाव: प्रचार के दौरान कांग्रेस के काफिले पर हमला, पथराव पर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

Thu, 24 Sep 2026 11:45 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, गुवाहाटी
पीटीआई, गुवाहाटी Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 24 Sep 2026 11:45 PM IST
सार

असम के नागांव में कांग्रेस के काफिले पर हुए हमले को लेकर पार्टी के सांसद रकीबुल हुसैन ने बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने संसद में अपने कामकाज, असम की बाढ़-कटाव की समस्या और राहत पैकेज की मांग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर ‘मियां’ मुद्दे के जरिए सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।

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Congress convoy attacke during Nagaon by election campaigning Opposition launches offensive against government
रकीबुल हुसैन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

असम के नागांव लोकसभा उपचुनाव के प्रचार के बीच कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन ने पार्टी के काफिले पर हुए पथराव को पहले से सुनियोजित हमला बताया और पुलिस-प्रशासन पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह हमला अचानक नहीं हुआ, बल्कि पहले से इसकी पूरी तैयारी की गई थी। हुसैन ने दावा किया कि हमले की आशंका को लेकर उन्होंने पहले ही एसएसपी और जिला प्रशासन को जानकारी दे दी थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने इसे रोकने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए। उलटे, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोगों को संरक्षण दिया।
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सोमवार को चुनाव प्रचार के दौरान भिड़े थे कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ता
नागांव लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के प्रचार के दौरान सोमवार को समागुरी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई थी। कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई की अगुवाई में पार्टी का एक जुलूस लरिरमुख में होने वाली जनसभा की ओर जा रहा था। इसी दौरान दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। इस दौरान पथराव भी हुआ। कांग्रेस के दो वाहनों के शीशे टूट गए, जबकि कुछ पत्रकारों को भी मामूली चोटें आईं। इसी घटना को लेकर रकीबुल हुसैन ने अब इसे सुनियोजित हमला बताया है।
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संसद में अपनी भूमिका को लेकर भी रकीबुल हुसैन का पलटवार
हुसैन ने संसद में अपनी भूमिका को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 543 सांसदों में उन्होंने सबसे ज्यादा लिखित और मौखिक सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने संसद में लगातार असम से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने कहा कि सिवसागर, चराइदेव और जोरहाट में बाढ़ और कटाव से प्रभावित परिवारों के लिए उन्होंने प्रत्येक परिवार को 20 लाख रुपये का राहत पैकेज देने की मांग की थी। इसके अलावा उन्होंने माजुली में लगातार हो रहे कटाव का मुद्दा भी उठाया और असम की बाढ़ तथा कटाव की समस्या को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग दोहराई।
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‘भाजपा सांप्रदायिक मुद्दों का सहारा ले सकती है, जनता सब समझ रही है’
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के दौरान सांप्रदायिक मुद्दों का इस्तेमाल कर सकती है। उन्होंने कहा कि जनता भाजपा की कथित रणनीति को समझ चुकी है और नागांव लोकसभा उपचुनाव में इसका जवाब देगी। हुसैन ने कहा कि भाजपा लोगों के बीच सामुदायिक आधार पर खाई पैदा करने की कोशिश कर सकती है, लेकिन जनता ने उसके कथित इरादों को देख लिया है और उपचुनाव में इसका जवाब देगी।

6 अक्टूबर को वोटिंग, 9 अक्टूबर को आएगा नतीजा
असम की नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होगा, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को की जाएगी। नागांव सीट पर उपचुनाव की जरूरत तब पड़ी, जब कांग्रेस के पूर्व नेता प्रद्युत बोरदोलोई ने असम विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद उन्होंने दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर विधायक बने।

हिमंत बिस्वा सरमा पर ‘मियां’ राजनीति करने का आरोप
रकीबुल हुसैन ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सरकार की नाकामियों और ऊपरी असम में बाढ़ को लेकर लोगों में बढ़ रहे गुस्से से ध्यान भटकाने के लिए ‘मियां’ राजनीति को हवा दे रहे हैं। हुसैन ने दावा किया कि मुख्यमंत्री कभी कहते हैं कि अल्पसंख्यक कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जा रहे हैं, कभी अल्पसंख्यकों को भाजपा के पक्ष में वोट न देने की चेतावनी देते हैं और फिर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के जरिए उनके वोट मांगने की कोशिश करते हैं। उन्होंने इसे ‘ड्रामा’ करार दिया।

बाढ़ और कटाव से तबाही का दावा, सरकार पर लापरवाही का आरोप
कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जिलों में कृत्रिम बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं ने लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित की है। उनका दावा है कि ऊपरी असम में भाजपा सरकार के खिलाफ लोगों में काफी नाराजगी है और प्रशासन पर बाढ़ से निपटने में नाकाम रहने के आरोप लग रहे हैं।हुसैन ने आरोप लगाया कि इसी समय मुख्यमंत्री ने जानबूझकर ‘मियां’ का मुद्दा उठाया, ताकि ऊपरी असम में सरकार के खिलाफ बढ़ रहे गुस्से से लोगों का ध्यान हटाया जा सके और समाज में विभाजन पैदा किया जा सके।


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‘मियां’ शब्द को लेकर भी है लंबा विवाद
‘मियां’ शब्द मूल रूप से असम में बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला अपमानजनक शब्द रहा है। गैर-बंगाली भाषी लोगों के बीच ऐसे लोगों को आम तौर पर बांग्लादेश से आए प्रवासियों के तौर पर देखा जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में इस समुदाय से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने इसी शब्द को अपने पक्ष में अपनाना शुरू किया है और इसे विरोध तथा आत्मसम्मान के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया है। रकीबुल हुसैन ने रिक्शा चालकों और दिहाड़ी मजदूरों के कथित उत्पीड़न की भी निंदा की। उन्होंने पुलिस की ओर से मुठभेड़ के नाम पर की जाने वाली कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और ऐसी कार्रवाइयों को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की।
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