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EVM-VVPAT: आम चुनाव से पहले कांग्रेस को सताने लगा वीवीपैट का 'जिन्न', निर्वाचन आयोग से पूछे आठ सवाल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 21 Apr 2023 06:10 PM IST
सार

EVM-VVPAT: पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में बताया, मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि चुनाव आयोग ने 6.5 लाख वीवीपैट मशीनों को खराब पाया है। इन मशीनों को मरम्मत के लिए निर्माताओं के पास भेजा गया है। ये वीवीपैट मशीनें नवीनतम 'एम3' प्रकार की हैं, जिन्हें पहली बार 2018 में चुनाव आयोग द्वारा लाया गया था...

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Congress asked Election Commission of India to answer 8 questions on malfunctioning of 6.5 lakh VVPAT machines
Election Commission of India - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

लोकसभा चुनाव 2024 व उससे पहले कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर, ईवीएम और वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट) का जिन्न, कांग्रेस पार्टी को सताने लगा है। पार्टी नेता पवन खेड़ा के मुताबिक, चुनाव आयोग ने 6.5 लाख VVPAT मशीनों को खराब पाया था। क्या जानबूझकर हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसी खराबी उत्पन्न की गई है। इस बाबत खेड़ा ने भारतीय निर्वाचन आयोग से आठ सवालों का जवाब मांगा है। साथ ही यह भी कह दिया है कि चुनाव की निष्पक्षता में जनता के विश्वास और भरोसे को बहाल करने के लिए निर्वाचन आयोग को वीवीपैट को लेकर उठे गंभीर सवालों के जवाब पूरी पारदर्शिता के साथ देने चाहिए।

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चुनाव आयोग ने 6.5 लाख वीवीपैट मशीनों को खराब पाया

पवन खेड़ा ने शुक्रवार को कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में बताया, मीडिया रिपोर्ट्स से पता चला है कि चुनाव आयोग ने 6.5 लाख वीवीपैट मशीनों को खराब पाया है। इन मशीनों को मरम्मत के लिए निर्माताओं के पास भेजा गया है। ये वीवीपैट मशीनें नवीनतम 'एम3' प्रकार की हैं, जिन्हें पहली बार 2018 में चुनाव आयोग द्वारा लाया गया था। उसके बाद हुए चुनावों में इन्हीं मशीनों का उपयोग किया जाता रहा है। विशेष रूप से 17 लाख 40 हजार वीवीपैट मशीनों को 2019 के लोकसभा चुनाव में उपयोग के लिए अधिसूचित किया गया था। बतौर पवन खेड़ा, मीडिया रिपोर्ट्स से चार ऐसे कारण उभरते हैं, जिनकी वजह से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और देश की जनता इसे हमारी चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को प्रभावित करने वाला सबसे गंभीर मुद्दा मान रही है।

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यह भी पढ़ें: Defective VVPAT: चुनाव आयोग ने जारी की खराब वीवीपैट मशीनों की पहचान वाली रिपोर्ट, कांग्रेस ने उठाए सवाल

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वोट प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं

कांग्रेस पार्टी के नेता ने कहा, जिन मशीनों में खराबी पाई गई है, उनकी संख्या 2019 के लोकसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई मशीनों का एक तिहाई (37 फीसदी) से अधिक है। इससे 2019 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों में मतदाताओं के वोट प्रभावित होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है। ईवीएम के प्रति जनता के विश्वास को बढ़ाने के उपाय के रूप में वीवीपैट की शुरुआत की गई थी। ईवीएम को लेकर उठते सवालों के बीच इतने बड़े पैमाने पर वीवीपैट मशीनों में खराबी के मामले सामने आने से चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास और भरोसे को बहाल करने के लिए पूरी पारदर्शिता की आवश्यकता है। इसे अलग-अलग घटनाओं के रूप में नहीं देखा जा सकता है, क्योंकि विभिन्न निर्माताओं के पूरे खेप में लगातार सीरियल नंबर वाले हजारों वीवीपैट खराब पाए गए हैं। ये खामियां इतनी गंभीर हैं कि वीवीपैट मशीनें, निर्माताओं को वापस कर दी गई हैं।

चुनाव आयोग ने खुद 2021 में किया था यह फैसला

पवन खेड़ा ने बताया, जिस तरह से इन मशीनों में खराबी पाई गई, वह चुनाव आयोग के अपने मानक संचालन प्रक्रिया का उल्लंघन प्रतीत होता है। आम तौर पर, क्षेत्र अधिकारी खराबी की पहचान करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। उदाहरण के लिए, जब एक नया वीवीपैट प्राप्त होता है, तो जिला निर्वाचन अधिकारी 'प्रथम स्तर की जांच' करता है। यदि उसमें कोई खराबी पाई जाती है, तो उसे सात दिनों के भीतर, संबंधित मुख्य चुनाव अधिकारी के समन्वय से मशीन निर्माता को मरम्मत के लिए वापस कर दी जाती है। इस मामले में चुनाव आयोग ने खुद 2021 में फैसला किया था कि इन मशीनों की मरम्मत की जानी चाहिए। इस संबंध में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप तथा दमन और दीव को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश भेजे गए। इन मशीनों को वापस मंगाए जाने के क्या कारण रहे, इस बाबत राजनीतिक दलों को विस्तार से जानकारी नहीं दी गई। पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता बताते हैं कि उन्हें सूचित किया गया था कि ऐसी गतिविधि चुनाव अधिकारियों द्वारा सामान्य प्रक्रिया के रूप में की जा रही है।

यह भी पढ़ें: Election Commission: गुजरात-हिमाचल चुनावों में VVPAT-EVM की गिनती सटीक, चुनाव आयोग ने दी अहम जानकारी

आयोग से पूछे हैं ये आठ सवाल

कांग्रेस पार्टी ने जनहित में चुनाव आयोग से आठ महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे हैं। क्या चुनाव आयोग, वीवीपैट मशीनों में आ रही खराबियों की पहचान करने में सक्षम रहा है? अगर हां, तो क्या चुनाव आयोग ने उन सभी खराबियों को ठीक कर दिया है। जब मशीनों के संग्रह का आदेश 2021 में जारी हो चुका था, तो वीवीपैट मशीनों की खराबी में सुधार करने और उसकी पहचान करने में देरी क्यों हुई? क्या चुनाव आयोग, उन सभी मशीनों की पहचान करने में सक्षम रहा है, जिनमें खराबी की सूचना दी गई है। वीवीपैट मशीनों के लिए होने वाली प्रथम स्तर की जांच में खराबी का पता क्यों नहीं चल पाया? क्या आयोग ने डीईओ और सीईओ से कोई रिपोर्ट मांगी है, जो इन विशेष मशीनों के प्रभारी थे, जिन्हें खराब घोषित किया गया है। चुनाव आयोग भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन से अतिरिक्त सुरक्षा उपायों को लागू करने की योजना बना रहा है, जिनके चुनाव पर दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे। वीवीपैट मशीनों की कार्यप्रणाली के संबंध में उठाए गए मौजूदा मुद्दों को देखते हुए, क्या चुनाव आयोग आगामी चुनावों में इन मशीनों का उपयोग करना जारी रखेगा।

ईवीएम और वीवीपैट पर विश्वास में कमी

पवन खेड़ा ने कहा, ईवीएम और वीवीपैट पर जनता का विश्वास धीरे-धीरे कम होने वाली घटनाओं की श्रृंखला में यह सबसे नया मामला है। हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव आयोग हमारे सवालों का समग्रता से और तेजी से जवाब देगा। साथ ही वीवीपैट को लेकर उठे सवालों से जनता के मन में जो संदेह उत्पन्न हुए हैं, उन्हें दूर करने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठाएगा। साल 2017 में आप विधायक सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली विधानसभा में डेमो देकर बताया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ 90 सेकेंड में छेड़छाड़ हो सकती है। उन्होंने निर्वाचन आयोग को चुनौती दी थी कि इस दावे को साबित करने के लिए उन्हें ईवीएम उपलब्ध कराई जाए। ग्रेटर कैलाश से आप के विधायक सौरभ भारद्वाज ने दावा किया था कि ईवीएम से छेड़छाड़ करने में सक्षम होने के लिए आपको केवल एक सीक्रेट कोड जानने की आवश्यकता होती है। ईवीएम के मदरबोर्ड को 90 सेकंड में बदलकर सभी वोट किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष में डाले जा सकते हैं।

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