फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Congress anti incumbency wave in Karnataka, BJP hopes for miracle in South

Karnataka Elections: कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर, भाजपा को दक्षिण में चमत्कार की उम्मीद

Fri, 12 May 2023 05:59 AM IST
Jeet Kumar हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 12 May 2023 05:59 AM IST
सार

राज्य में हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने चुनावी तस्वीर को उलझा दिया है। कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर तो भाजपा को दक्षिण कर्नाटक में चमत्कार पर भरोसा है। मतदान से जुड़े तीन अहम तथ्य हैं, जिनकी व्याख्या कांग्रेस, भाजपा और जदएस अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं।

विज्ञापन
Congress anti incumbency wave in Karnataka, BJP hopes for miracle in South
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद आए ज्यादातर एग्जिट पोल में कांग्रेस को भाजपा पर बढ़त और त्रिशंकु जनादेश की भविष्यवाणी की गई है। हालांकि, राज्य की तीनों मुख्य सियासी ताकतें भाजपा, कांग्रेस और जदएस एग्जिट पोल के अनुमान के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद पाले हुए हैं।

विज्ञापन


राज्य में हुए रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने चुनावी तस्वीर को उलझा दिया है। कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर तो भाजपा को दक्षिण कर्नाटक में चमत्कार पर भरोसा है। मतदान से जुड़े तीन अहम तथ्य हैं, जिनकी व्याख्या कांग्रेस, भाजपा और जदएस अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं। पहला, इस बार बीते सभी चुनावों के मुकाबले अधिक मतदान हुआ है। दूसरा, शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण और कम आय वाले क्षेत्रों में अधिक लोग मतदान केंद्रों पर पहुंचे। तीसरा, राज्य के मुसलिम बाहुल्य इलाकों में दूसरे इलाकों की तुलना में अधिक वोट पड़े हैं।
विज्ञापन


मतदान प्रतिशत बढ़ने के मायने
कर्नाटक में मतदान प्रतिशत का बढ़ना हमेशा सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा करता रहा है। राज्य में अब तक 14 चुनाव हुए हैं। इनमें आठ बार बीते चुनाव के मुकाबले ज्यादा मत पड़े। मत प्रतिशत बढ़ने पर आठ में से सात बार सत्ता परिवर्तन हुआ। इस बार के चुनाव में सबसे अधिक मतदान हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


चुनाव बाद सर्वेक्षणों में जातीय समीकरण
सभी चैनलों के चुनाव बाद सर्वेक्षणों (एग्जिट पोल) के औसत विश्लेषण से साबित होता है कि भाजपा लिंगायत में तो कांग्रेस कुरबा और मुसलमानों में, जबकि जदएस वोक्कालिगा में पुरानी पैठ कायम रखने में कामयाब रही है। विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा को लिंगायत, वोक्कालिगा, एससी, एसटी, ओबीसी के क्रमश: 76, 18, 40, 32, 52 फीसदी कांग्रेस को मुसलमानों, कुरबा, वोक्कालिगा, एससी, ओबीसी और एसटी के क्रमश: 78, 76, 17, 41, 36, और 43 फीसदी वोट मिले हैं।

कांग्रेस की उम्मीद
कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि इस बार पार्टी को सत्ता विरोधी लहर, जदएस के कमजोर प्रदर्शन, मुसलमानों के मिले एकमुश्त वोट के साथ कुरबा जाति, एससी-एसटी, ओबीसी में अपनी पुरानी पैठ बनाए रखने का लाभ मिलने वाला है। रणनीतिकारों का यह भी मानना है कि शहरी के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मतदान ने भी उनकी जीत की संभावनाओं को मजबूती दी है।

भाजपा का दावा
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि कर्नाटक के शहरी क्षेत्र में कम मतदान प्रतिशत नई बात नहीं है। एग्जिट पोल में भी ग्रेटर बंगलूरू, सेंट्रल बंगलूरू, तटीय कर्नाटक और बॉम्बे कर्नाटक में भाजपा की मजबूत पकड़ की बात स्वीकार की गई है। पार्टी को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र और पुराना मैसूर (दक्षिण कर्नाटक) में जदएस-कांग्रेस के मुकाबले न्यूनतम सीटें (करीब सौ में महज 13 सीटें) दी गई हैं। यहीं तस्वीर बदलेगी।


चूंकि पार्टी की लिंगायत पर पुरानी पकड़ बरकरार है, पार्टी ने एससी-एसटी-ओबीसी में आधार बढ़ाया है,जबकि कम आय वाले क्षेत्र में अधिक मतदान हुआ है। ऐसे में इस बार बीते 38 साल से हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन की परंपरा टूटेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed