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ऊपर जा चुके 'जॉर्ज ऑरवेल' कांग्रेस-भाजपा को कैसे याद आ गए...
Thu, 27 Dec 2018 06:09 PM IST
अमित मंडल
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Thu, 27 Dec 2018 06:09 PM IST
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नरेंद्र मोदी व राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
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'जॉर्ज ऑरवेल' तो अंग्रेजी के उपन्यासकार हैं जो 21 जनवरी 1950 को दुनिया से अलविदा हो गए थे। आजकल कोई साहित्यिक सम्मेलन भी नहीं हो रहा है तो फिर एकाएक जॉर्ज ऑरवेल देश के दो बड़े राजनीतिक दलों को याद आ रहे हैं। ऐसा क्या हो गया है। आपको बताते हैं कि वह क्या चीज है, जिसने इस अंग्रेजी लेखक का नाम 2018 में देश के दो बड़े राजनीतिक दलों की जुबान पर ला दिया।
पिछले सप्ताह गृह मंत्रालय द्वारा सभी कंप्यूटरों के डेटा की जांच के लिए 10 केंद्रीय जांच एजेंसियों को अधिकार दिए जाने का मामला तूल पकड़ गया था। कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बताया था। विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए जॉर्ज ऑरवेल का जिक्र कर दिया। ऑरवेल की किताब, जिसका शीर्षक '1984' है, वह 1948 में लिखी गई थी। इसमें ऑरवेल अपने समय से आगे जाकर एक ऐसे वक्त की कल्पना करते हैं जिसमें राज सत्ता अपने नागरिकों पर नजर रखती है।
वह राजा या सरकार अपने लोगों को बुनियादी आजादी देने के पक्ष में भी नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने इसी का हवाला देते हुए मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया। बाकायदा कांग्रेस पार्टी की प्रेस रिलीज में भी जॉर्ज ऑरवेल की उक्त पंक्तियों का जिक्र किया गया था। कांग्रेस पार्टी के नेता एवं राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी लेखक का जिक्र करते हुए कहा, चौंकीदार अब जासूस भी हो गया है। कांग्रेस पार्टी के दूसरे नेता, जयवीर शेरगिल ने कहा, मोदी सरकार का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 547 पन्ने वाले 'निजता के अधिकार' के फैसले की धज्जियां उड़ा रहा है।
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नौ जजों की बैंच ने निजता के अधिकार पर फैसला देते वक्त कहा था कि हम सरकार और जनता के बीच एक संवैधानिक दीवार खड़ी कर रहे हैं।यह इसलिए कर रहे हैं ताकि सरकार, जनता के निजी मामलों में ताक-झांक न कर सके। अब मोदी ने वह दीवार गिरा दी है। सरकार के इस आदेश की वजह से हिन्दुस्तान अब एक पुलिस और सर्विलांस स्टेट बन गया है। यानी जॉर्ज ऑरवेल की कही गई बात अब सही साबित हो रही है।
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पिछले सप्ताह गृह मंत्रालय द्वारा सभी कंप्यूटरों के डेटा की जांच के लिए 10 केंद्रीय जांच एजेंसियों को अधिकार दिए जाने का मामला तूल पकड़ गया था। कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने इस फैसले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बताया था। विपक्षी नेताओं ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए जॉर्ज ऑरवेल का जिक्र कर दिया। ऑरवेल की किताब, जिसका शीर्षक '1984' है, वह 1948 में लिखी गई थी। इसमें ऑरवेल अपने समय से आगे जाकर एक ऐसे वक्त की कल्पना करते हैं जिसमें राज सत्ता अपने नागरिकों पर नजर रखती है।
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वह राजा या सरकार अपने लोगों को बुनियादी आजादी देने के पक्ष में भी नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने इसी का हवाला देते हुए मोदी सरकार को घेरने का प्रयास किया। बाकायदा कांग्रेस पार्टी की प्रेस रिलीज में भी जॉर्ज ऑरवेल की उक्त पंक्तियों का जिक्र किया गया था। कांग्रेस पार्टी के नेता एवं राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी लेखक का जिक्र करते हुए कहा, चौंकीदार अब जासूस भी हो गया है। कांग्रेस पार्टी के दूसरे नेता, जयवीर शेरगिल ने कहा, मोदी सरकार का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के 547 पन्ने वाले 'निजता के अधिकार' के फैसले की धज्जियां उड़ा रहा है।
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नौ जजों की बैंच ने निजता के अधिकार पर फैसला देते वक्त कहा था कि हम सरकार और जनता के बीच एक संवैधानिक दीवार खड़ी कर रहे हैं।यह इसलिए कर रहे हैं ताकि सरकार, जनता के निजी मामलों में ताक-झांक न कर सके। अब मोदी ने वह दीवार गिरा दी है। सरकार के इस आदेश की वजह से हिन्दुस्तान अब एक पुलिस और सर्विलांस स्टेट बन गया है। यानी जॉर्ज ऑरवेल की कही गई बात अब सही साबित हो रही है।
अरुण जेटली को भी याद आ गए जॉर्ज ऑरवेल...
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वीरवार को 'आईएसआईएस मॉड्यूल' को लेकर कांग्रेस पार्टी पर अपनी भड़ास निकाली है।एनआईए द्वारा 'हरकत उल हर्ब ए इस्लाम' का भंडाफोड़ करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार करने के बाद वीरवार को जेटली ने ट्विटर पर लिखा, 'राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि है।
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र में बची रहेगी-एक आतंकवादी प्रभुत्व वाले राज्य में नहीं।एनआईए द्वारा आतंकवादी मॉड्यूल को तोड़ पाना, क्या यह इलेक्ट्रॉनिक संचार के अवरोधन के बिना संभव हुआ है। जेटली ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा है कि क्या यूपीए सरकार के दौरान किए गए अधिकतम इंटरसेप्ट थे, निश्चित रूप से 'जॉर्ज ऑरवेल' का जन्म मई, 2014 में नहीं हुआ था।
उन्होंने अपनी किताब में कई दशक आगे के वक्त की कल्पना की है। ऑरवेल ने लिखा, आगे जो वक्त आएगा, वह तकनीक से भरा होगा। उस वक्त आम आदमी की निजता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने यह किताब अपनी मृत्यु से तीन साल पहले लिखी थी। ऑरवेल का जन्म भारत में 25 जून 1903 में बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी शहर में हुआ था। वे करीब एक साल के थे, जब उनकी मां उन्हें ब्रिटेन ले गई।
जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता केवल एक मजबूत लोकतांत्रिक राष्ट्र में बची रहेगी-एक आतंकवादी प्रभुत्व वाले राज्य में नहीं।एनआईए द्वारा आतंकवादी मॉड्यूल को तोड़ पाना, क्या यह इलेक्ट्रॉनिक संचार के अवरोधन के बिना संभव हुआ है। जेटली ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए लिखा है कि क्या यूपीए सरकार के दौरान किए गए अधिकतम इंटरसेप्ट थे, निश्चित रूप से 'जॉर्ज ऑरवेल' का जन्म मई, 2014 में नहीं हुआ था।
कौन थे जॉर्ज ऑरवेल...
जॉर्ज ऑरवेल नाजीवाद, फासीवाद और स्टालिनवाद को एक जैसा बताकर उसकी आलोचना करते थे। उनकी नजर में ये सभी विचारधाराएं मानवता के लिए संकट हैं। वे हर उस राजा और सरकार के विरोध में थे, जो उनके खिलाफ उठने वाली आवाज को सदैव के लिए खामोश कर देना चाहता था।उन्होंने अपनी किताब में कई दशक आगे के वक्त की कल्पना की है। ऑरवेल ने लिखा, आगे जो वक्त आएगा, वह तकनीक से भरा होगा। उस वक्त आम आदमी की निजता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। उन्होंने यह किताब अपनी मृत्यु से तीन साल पहले लिखी थी। ऑरवेल का जन्म भारत में 25 जून 1903 में बिहार के पूर्वी चंपारण के मोतिहारी शहर में हुआ था। वे करीब एक साल के थे, जब उनकी मां उन्हें ब्रिटेन ले गई।