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Politics: रिजिजू बोले- नेहरू तवांग को भारत का हिस्सा नहीं बनाना चाहते थे, कांग्रेस बोली- यह कोरा झूठ
Fri, 04 Nov 2022 10:16 PM IST
शक्तिराज सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Fri, 04 Nov 2022 10:16 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने दावा किया था कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि तवांग भारत का हिस्सा बने।
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किरेन रिजिजू
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस ने शुक्रवार को केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के दावे को कोरा झूठ करार दिया। दरअसल, केंद्रीय मंत्री ने दावा किया था कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि तवांग भारत का हिस्सा बने। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस कहती है कि तवांग भारत का हिस्सा है, लेकिन पहले कभी उसकी सरकार ने इसे नहीं माना था।
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उन्होंने दावा किया कि जब 1951 में भारतीय जवानों ने तवांग को भारत के साथ मिलाया, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने असम के तत्कालीन राज्यपाल जयराम दास दौलत राम को इसके लिए डांटा था। उनके दावे को लेकर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पलटवार किया।
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उन्होंने ट्वीट किया कि तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने वाले पीएम नरेंद्र मोदी के समूह में नया दाखिला किरेन रिजिजू का हुआ है। वह अब कह रहे हैं कि नेहरू नहीं चाहते थे कि तवांग भारत का हिस्सा बने। यह कोरा झूठ है। 2018 में जिन दो टेलीग्राम को सार्वजनिक किया गया था, उनसे यह झूठ बेनकाब हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि इस बात को खारिज नहीं किया जा सकता कि फरवरी 1951 में तवांग में तिरंगा फहराया जाना एक नीतिगत फैसला था, जो रणनीतिक विचार-विमर्श आधार पर किया गया था। इससे कुछ दिनों पहले रिजिजू ने कहा था कि अनुच्छेद 370 को लागू करना और पाकिस्तान के साथ विवाद को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की नेहरू की गलतियों ने बहुत नुकसान किया।
कॉलेजियम की पसंद नहीं, उपयुक्त व्यक्ति बनना चाहिए जज: रिजिजू
कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम प्रणाली पर चोट करते हुए कहा, जजों की नियुक्ति वाला मौजूदा कॉलेजियम सिस्टम पूरी तरह अस्पष्ट है। जज के तौर पर उसी व्यक्ति की नियुक्ति होनी चाहिए जो उस पद के लिए पूरी तरह उपयुक्त हो, न कि ऐसा कोई जिसे कॉलेजियम अच्छी तरह जानता हो। न्यायपालिका में सुधार पर आयोजित एक सम्मेलन में कानून मंत्री ने कहा, मैं न्यायपालिका या न्यायाधीशों की आलोचना नहीं कर रहा हूं।
मैं सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की वर्तमान प्रणाली से खुश नहीं हूं। कोई भी प्रणाली सही नहीं है। हमें हमेशा एक बेहतर प्रणाली की दिशा में प्रयास करना है। रिजिजू ने कहा, सिस्टम को जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए। अगर यह अस्पष्ट है, तो संबंधित मंत्री नहीं तो और कौन इसके खिलाफ बोलेगा। एजेंसी
न्यायपालिका में होती है खूब राजनीति
रिजिजू ने कहा, कॉलेजियम के कारण न्यायपालिका में भी राजनीति होती है। वे (जज) ऐसा जाहिर भले ही न करें लेकिन वहां भी बेहद राजनीति है। रिजिजू ने पूछा, क्या जजों को इस तरह के प्रशासनिक काम में फंसे रहना चाहिए या न्याय देने में अधिक वक्त बिताना चाहिए।
सरकार हमेशा चुप नहीं रहेगी
सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम को खारिज करने पर रिजिजू ने कहा, सरकार ने अभी तक इस पर कुछ नहीं कहा है। जब इसे खत्म किया गया तो सरकार कुछ कर सकती थी...लेकिन ऐसा नहीं हुआ क्योंकि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हमेशा चुप रहेंगे। नरेंद्र मोदी सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता में विश्वास करती है और इसलिए उसने इसे कमजोर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।