फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Confederation will protest on August 20 for the formation of 8th Pay Commission and the interests of pensioner

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग का गठन करने और पेंशनरों के हितों पर 20 अगस्त को प्रदर्शन करेगा कॉन्फेडरेशन

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 13 Aug 2025 03:34 PM IST
विज्ञापन
Confederation will protest on August 20 for the formation of 8th Pay Commission and the interests of pensioner
8th pay Commission - फोटो : Amar Ujala

कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने 12 अगस्त को कैबिनेट सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि 20 अगस्त को कॉन्फेडरेशन से जुड़े सभी संगठनों के कर्मचारी लंच के समय प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन दो मांगों के लिए रहेगा। पहली, आठवें वेतन आयोग का गठन अविलंब किया जाए और आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के लिए जो 'टर्म ऑफ रेफरेंस' (टीओआर) तैयार किया गया है, उसमें कर्मचारियों की राष्ट्रीय परिषद 'जेसीएम' की तरफ से सुझावों को शामिल करते हुए उसे फाइनल टच दिया जाए। दूसरा, वित्त विधेयक को लेकर 'पेंशनरों' के मन में अनिश्चितता है, सरकार को उसे दूर करना चाहिए। जैसे 'डेट ऑफ रिटायरमेंट' या वेतन आयोग की सिफारिशें स्वीकार करने के दौरान उक्त बातों को लेकर कोई भेदभाव न हो।  

विज्ञापन


अभी तक 'टर्म ऑफ रेफरेंस' सार्वजनिक नहीं...  
कॉन्फेडरेशन के महासचिव एसबी यादव का कहना है कि 11 अगस्त की शाम को कॉन्फेडरेशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों की वीसी के जरिए एक बैठक की गई थी। उसमें सर्वसम्मति से उक्त निर्णय लिए गए हैं। इससे पहले भी सरकार को चेताया गया है कि वह कर्मचारियों के हितों को लेकर सकारात्मक निर्णय ले। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें पहली जनवरी 2026 से लागू होनी हैं, लेकिन अभी तक आयोग के अध्यक्ष व सदस्य भी नियुक्त नहीं हुए हैं। आयोग के गठन में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है। सरकार ने अभी तक 'टर्म ऑफ रेफरेंस' भी सार्वजनिक नहीं किए हैं। कर्मचारी संगठनों को यह तक नहीं मालूम कि उनके द्वारा दिए गए कौन कौन से सुझावों को टीओआर में शामिल किया गया है। इन्हीं मांगों के लिए 20 अगस्त को प्रदर्शन किया जाएगा। कॉन्फेडरेशन से जुड़े सभी कर्मचारी दोपहर के समय अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे। 
विज्ञापन


'जेसीएम' के साथ कोई बातचीत नहीं...  
बता दें कि नेशनल काउंसिल (स्टाफ साइड) की ज्वाइंट कन्सलटेटिव मशीनरी फॉर सेंटर गवर्नमेंट एम्पलाइज 'जेसीएम' ने 18 जून को कैबिनेट सचिव को एक पत्र भेजा था। इसमें जेसीएम की तरफ से यह मांग की गई थी कि आठवें वेतन आयोग के लिए जो 'टर्म ऑफ रेफरेंस' (टीओआर) तैयार किए गए हैं, उन्हें सर्कुलेट यानी प्रसारित किया जाए। डीओपीटी ने जेसीएम को सूचित किया था कि सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 'टर्म ऑफ रेफरेंस' को फाइनल रूप दिया जा रहा है। डीओपीटी ने टीओआर के लिए जेसीएम से सुझाव मांगे थे। जेसीएम ने बहुत पहले ही वे सभी सुझाव, डीओपीटी को सौंप दिए थे। टीओआर के लिए सुझाव सौंपे जाने के बावजूद अभी तक सरकार की तरफ से इस मामले में केंद्रीय कर्मचारियों की सर्वोच्च इकाई 'जेसीएम' के साथ कोई भी संचार नहीं हुआ है। इससे कर्मचारियों और पेंशनरों को संशय हो रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


सत्यापन नियमों से मौजूदा पेंशन में बदलाव नहीं... 
इस वर्ष संसद में जब 'वित्त' विधेयक पेश किया गया तो एकाएक केंद्रीय कर्मचारी संगठन/पेंशनर 'टेंशन' में आ गए। धीरे-धीरे इस विधेयक को लेकर विभिन्न राज्यों के सरकारी कर्मचारी और पेंशनर भी परेशान हो उठे। राष्ट्रीय परिषद 'जेसीएम' की बैठक बुलानी पड़ी। 29 मार्च को सचिव (पेंशन) को जेसीएम के सदस्यों के सामने अपना पक्ष रखना पड़ा। साथ ही उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि इस बाबत जल्द ही स्पष्टीकरण जारी होगा। इससे पहले संसद में जब वित्त विधेयक को मंजूरी दी गई, तब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि सत्यापन नियमों से मौजूदा पेंशन में कोई बदलाव नहीं होगा। दूसरी तरफ कर्मचारी नेताओं को अब भी यह यकीन नहीं हो पा रहा है कि इस सरकार उक्त वित्त विधेयक के जरिए खुद को ऐसी शक्ति से लैस कर लेगी, जिसके माध्यम से पेंशनरों के बीच में 'भेद' किया जा सकता है। 

यह पेंशनभोगियों के अधिकारों पर हमला है... 
एआईडीईएफ के महासचिव और जेसीएम के सदस्य सी. श्रीकुमार के मुताबिक, वित्त विधेयक को लेकर 'पेंशनरों' के मन में भय है। सरकार को उसे दूर करना चाहिए। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया जाए। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की घोषणा के बाद, सरकार को सीसीएस पेंशन नियमों में इन संशोधनों के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहिए था। वजह, सरकार को कार्यान्वयन की तिथि के बाद भूतपूर्व/मौजूदा पेंशनभोगियों और भावी पेंशनभोगियों के बीच समानता या असमानता तय करने और भूतपूर्व/मौजूदा पेंशनभोगियों के लिए भावी वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन की तिथि के बारे में निर्णय लेने का अधिकार मिल जाता है। सरकार के पास यह अधिकार नहीं होना चाहिए। बतौर श्रीकुमार, यह पेंशनभोगियों के अधिकारों पर हमला है। वित्त विधेयक ने सरकार को सीसीएस पेंशन नियमों में हस्तक्षेप करने का अनियंत्रित अधिकार दिया है। यह कदम अन्यायपूर्ण, अनुचित और पूरी तरह से अमानवीय है। सरकार को अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर खड़े पेंशनभोगियों को परेशान करने के बजाय सीसीएस पेंशन नियमों में संशोधन करने का निर्णय वापस लेना चाहिए। वरिष्ठ नागरिकों को शांतिपूर्ण और तनाव मुक्त सेवानिवृत्त जीवन जीने की अनुमति देनी चाहिए। आठवें वेतन आयोग के बाद सेवानिवृत्त और वेतन आयोग से पहले सेवानिवृत्त लोगों के बीच पेंशन में समानता रहे।

पेंशनभोगियों के बीच अंतर करने का अधिकार... 
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वित्तीय विधेयक में सेक्शन 149 को डाला गया था। इसके जरिए पेंशन नियमों के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, केन्द्र सरकार को सामान्य सिद्धांत के रूप में पेंशनभोगियों के बीच अंतर स्थापित करने का अधिकार मिल जाएगा। केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए, तथा केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित ऐसे मानदंडों, सिद्धांतों और पद्धति के अधीन रहते हुए, पेंशनभोगियों के बीच अंतर किया जा सकता है या बनाए रखा जा सकता है, जो केन्द्रीय वेतन आयोगों की स्वीकृत सिफारिशों से उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से पेंशनभोगी की सेवानिवृत्ति की तारीख या केन्द्रीय वेतन आयोग की स्वीकृत सिफारिश के लागू होने की तारीख के आधार पर अंतर किया जा सकता है। 

पेंशनभोगियों को इसलिए हो रही टेंशन… 
केन्द्र सरकार समय-समय पर केन्द्रीय वेतन आयोगों की सिफारिशों को स्वीकार करने के संबंध में ऐसे मानदण्ड, सिद्धांत और पद्धति निर्धारित कर सकती है, जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ पेंशनभोगियों के बीच अंतर भी शामिल है, जो ऐसी सिफारिश को स्वीकार करने से उत्पन्न हो सकता है। विशेष रूप से पेंशन दावे और देयताएं, आदि के संबंध में। किसी विशेष केन्द्रीय वेतन आयोग की स्वीकृत सिफारिशों के अनुसार पेंशन संशोधन के मानदंड, सिद्धांत और पद्धति, केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित तारीख से प्रभावी होंगे और ऐसी स्वीकृत सिफारिश का लाभ पहले की तारीख से प्रभावी नहीं होगा।

तब रिटायर होने वालों के बीच भेदभाव था...  
कर्मचारी नेताओं के अनुसार, पांचवें व छठे वेतन आयोग में पहले रिटायर होने और उनके लागू होने के बाद में रिटायर होने वालों के बीच भेदभाव था। उस वक्त सरकार ने भी यह बात स्वीकार की थी। तब कुछ नहीं किया गया। अब सरकार उसे वेलिडेट करने की बात कह रही है। कर्मचारी कहते हैं, अब वह मामला खत्म हो गया। सातवें वेतन आयोग ने पेंशनरों में कोई भेद नहीं किया। अब एकाएक, वेलिडेट करने की क्या जरुरत आ गई। इस विधेयक के जरिए सरकार के पास ऐसी शक्ति होगी कि वह पेंशनरों के बीच में अंतर कर सकती है। अंतर करने का आधार डेट ऑफ रिटायरमेंट हो सकता है। यानी सरकार यह तय कर सकती है कि वेतन आयोग का लाभ किस प्रकार के पेंशनरों को दिया जाए (जैसे केवल एक निश्चित तिथि के बाद रिटायर होने वाले लोगों के लिए)। सरकार, भावी वेतन आयोग की सिफारिश स्वीकार करने के दौरान उक्त आधार का इस्तेमाल कर सकती है। जेसीएम के सदस्यों का कहना है कि अगर सरकार का मन साफ है तो पेंशन 'सचिव' ने जो बोला है, उसे नोटिफिकेशन के जरिए बताए। दो पेंशनरों के बीच अंतर नहीं हो सकता, क्योंकि यह अनुच्छेद 14 में 'समानता के अधिकार' के तहत प्रतिबंधित है।

क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 14? 
अनुच्छेद 14, जो कि एक मूल अधिकार है, कहता है कि कोई भी समान रूप से स्थित व्यक्तियों के समूह में भेदभाव नहीं कर सकता। सभी पेंशनर एक ही श्रेणी में आते हैं, और वह है 'पेंशनर'। उनमें किसी को ज्यादा वरियता या कम वरियता देना, भेदभाव की श्रेणी में आता है। यह अनुच्छेद 14 के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। एआईडीईएफ के महासचिव और जेसीएम के सदस्य सी. श्रीकुमार के मुताबिक, वेतन आयोग की कार्यान्वयन तिथि से पहले सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनभोगियों और वेतन आयोग की कार्यान्वयन तिथि के बाद सेवानिवृत्त होने वाले पेंशनभोगियों के बीच, समानता केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों की एक लंबित मांग है। एक कर्मचारी या अधिकारी, जिसने किसी विशेष पद पर 8 साल तक सेवा की और वह वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन की तिथि से पहले सेवानिवृत्त हो गया और उसी पद पर 8 साल सेवा करने वाले किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी के बीच पेंशन में कोई असमानता नहीं होनी चाहिए। अन्यथा वरिष्ठ व्यक्ति को उसी पद के कनिष्ठ व्यक्ति से कम पेंशन मिलेगी। इस तरह की असमानता को सर्वोच्च न्यायालय ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि ऐसी असमानता संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का स्पष्ट उल्लंघन होगी। इस पृष्ठभूमि में सरकार ने वित्त विधेयक के माध्यम से जो किया है, वह अवांछित और अनुचित था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था...  
संसद ने जब वित्त विधेयक को मंजूरी दी, तब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, सत्यापन नियमों से मौजूदा पेंशन में कोई बदलाव नहीं होगा। एक जनवरी 2016 से पहले और बाद में रिटायर हुए सभी सरकारी पेंशनर्स को समान पेंशन मिल रही है। नए नियमों के तहत किसी भी पेंशनर की मौजूदा पेंशन राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रक्षा पेंशनर्स पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए अलग नियम लागू होते हैं। वित्त मंत्री ने बताया कि 6वें वेतन आयोग ने 1 जनवरी 2006 से पहले और बाद में रिटायर हुए कर्मचारियों के पेंशन में फर्क रखा था। तब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी।


कांग्रेस ने बताया था 'छिपा हुआ एजेंडा' 
दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने उस वक्त दावा किया था कि वित्त विधेयक, 2025 में संशोधन के माध्यम से पेंशनभोगियों के बीच अंतर करने के सरकार के प्रयास के पीछे एक 'छिपा हुआ एजेंडा' है। वेणुगोपाल ने कहा था कि वे इन 'छिपे हुए एजेंडों' को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के ध्यान में लाना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से वित्त विधेयक में प्रस्तावित संशोधन के पीछे अंतर्निहित उद्देश्य को स्पष्ट करने के लिए कहा, जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार के पास सामान्य सिद्धांत के रूप में पेंशनभोगियों के बीच अंतर स्थापित करने का अधिकार होगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के दूरगामी निहितार्थ स्पष्ट स्पष्टीकरण की मांग करते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इसे वित्त विधेयक में शामिल करने के बजाय एक अलग संशोधन के रूप में पेश किया गया है। यह गोल-मोल दृष्टिकोण क्यों है। सरकार को विस्तृत स्पष्टीकरण देना पड़ेगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed