संसद हमले की 20वीं बरसी: आज परेशान क्यों हैं 'पैरामिलिट्री फोर्सेज' के शूरवीर, लेनी पड़ रही अदालतों की मदद
केंद्र सरकार ने सीएपीएफ के लिए जो आयुष्मान योजना शुरू की है, उसमें रिटायर्ड कर्मियों को भी शामिल किया जाए। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीएसएफ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि देश के सभी सीएपीएफ के जवानों और उनके परिवारों को एक कार्ड के माध्यम से पूर्ण स्वास्थ्य कवर दिया गया है। यह कार्ड स्वाइप करते ही बल कार्मिक 21 हजार से ज्यादा अस्पतालों में अपना और अपने परिजनों का बड़े से बड़ा इलाज बहुत अच्छे से करा सकते हैं...
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संसद भवन पर आतंकी हमले की सोमवार को 20वीं बरसी है। 13 दिसंबर 2001 को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर 'भारतीय संसद' पर आंतकियों ने हमला किया था। सीआरपीएफ सहित कई दूसरे बलों ने आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया। कई जवानों ने अपनी शहादत दी। प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कईं मंत्रियों एवं नेताओं ने शहीदों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के चीफ पैटर्न और सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एसएस संधू ने सवाल उठाया है कि आज दो दशक बाद भी 'पैरामिलिट्री फोर्सेज' के शूरवीर परेशान क्यों हैं। उन्हें अपने हितों के लिए अदालती लड़ाई लड़नी पड़ रही है। केंद्र सरकार में विभिन्न स्तरों पर ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। आतंक, नक्सल, चुनावी ड्यूटी, आपदा, वीआईपी सिक्योरिटी और अन्य मोर्चों पर इन बलों के जवान तैनात हैं, इसके बावजूद उन्हें सिविल फोर्स बता दिया जाता है। जवानों को पुरानी पेंशन से वंचित रखा जा रहा है। सिपाही से लेकर कैडर अफसरों तक की प्रमोशन में लंबा वक्त लग रहा है। नतीजा, बहुत से जवान और अधिकारी समय से पहले ही सेवा को अलविदा कह कर दूसरे क्षेत्रों में जॉब करने लगे हैं।
खुश नहीं हैं ग्राउंड कमांडर और कैडर अफसर
कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के चीफ पैटर्न और सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हुए पूर्व एडीजी/आईजी एसएस संधू कहते हैं, इन केंद्रीय बलों में जवानों की अनेक दिक्कतें हैं। ग्राउंड कमांडर एवं दूसरे कैडर अधिकारी भी खुश नहीं हैं। उन्हें अपने प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ रहा है। हाल ही में एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात कर उन्हें इन बलों की मांगों को पूरा करने के लिए एक ज्ञापन सौंपा था। एसोसिएशन की मुख्य मांगों में सेना की तर्ज पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों का वेलफेयर बोर्ड बनाने, कृत्रिम अंग लगवाने के लिए रेट रिवाइज करने, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की ड्यूटी बढ़ने, आदि की समीक्षा करने की मांग शामिल हैं। इसके अलावा, आतंक और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सीआरपीएफ तैनात है। इस बात को ध्यान में रखकर बल की समीक्षा हो। इसके अलावा दूसरे बलों में भी ऐसा ही किया जाए।
प्रमोशन नीति पर फिर से हो विचार
केंद्रीय सुरक्षा बलों में प्रमोशन नीति को लेकर दोबारा से विचार किया जाए। वीरता पदक का अलाउंस अलग से क्लेम करना पड़ता है। संधू का कहना है कि पीपीओ में ही मेडल अलाउंस जोड़ दिया जाए। इससे रिटायर्ड कर्मियों को परेशानी नहीं उठानी पड़ेगी। अब उन्हें कई तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। सीजीएचएस की सुविधा सुदूर इलाकों में नहीं है, इस बाबत केंद्र सरकार को कोई प्रभावी कदम उठाना चाहिए। इसके लिए यह सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकारों के अस्पतालों को रेफरल समझा जाए। रिटायर्ड कर्मी वहां पर अपना इलाज कर सकते हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भारतीय सेना के बराबर शहीद का दर्जा मिले। इन बलों के लिए पुनर्वास और पुनःस्थापन बोर्ड गठित किया जाए। वजह, रिटायरमेंट के बाद सीएपीएफ कर्मियों को कोई नहीं पूछता। केंद्रीय बलों की कैंटीन पर जीएसटी से छूट नहीं है। 2004 से इन बलों में पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म कर दी गई है, उसे दोबारा शुरू किया जाए। सीएपीएफ में अलग पेंशन रुल बनाए जाएं।
आयुष्मान योजना में शामिल हों रिटायर्ड कर्मी
केंद्र सरकार ने सीएपीएफ के लिए जो आयुष्मान योजना शुरू की है, उसमें रिटायर्ड कर्मियों को भी शामिल किया जाए। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीएसएफ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि देश के सभी सीएपीएफ के जवानों और उनके परिवारों को एक कार्ड के माध्यम से पूर्ण स्वास्थ्य कवर दिया गया है। यह कार्ड स्वाइप करते ही बल कार्मिक 21 हजार से ज्यादा अस्पतालों में अपना और अपने परिजनों का बड़े से बड़ा इलाज बहुत अच्छे से करा सकते हैं। केंद्रीय अनुग्रह राशि जो 35 लाख रुपये और 25 लाख रुपये की है, वह भी अब एक महीने में शहीद के परिवार तक पहुंचा दी जाती है। संधू का कहना था कि इस योजना के दायरे में न केवल रिटायर्ड कर्मी, बल्कि उनके परिजन भी शामिल हों। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इन बलों को सशस्त्र बल माना है। केंद्र सरकार को भी इन बलों के लिए उसी के मुताबिक सुविधाएं देनी चाहिए।
प्रमोशन नीति के खिलाफ गुस्सा
चीफ पैटर्न संधू, चेयरमैन वीके शर्मा और महासचिव देविंद्र बख्शी ने कहा, ओजीएएस, जिसका फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है और केंद्र सरकार ने उसे माना है, अब उन नियमों को जमीन पर लागू किया जाए। गृह मंत्रालय और बल मुख्यालय अभी ओजीएएस को लागू करने का मन नहीं बना पा रहे हैं। नतीजा, सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे अर्धसैनिक बलों में कैडर अधिकारियों को समय पर प्रमोशन नहीं मिल रहा है। जब 15 साल में पहला प्रमोशन नहीं मिलता तो ग्राउंड कमांडर जॉब छोड़ने की तैयारी करने लगता है। इस तरह से कैडर अधिकारी डीआईजी बनने से पहले ही रिटायर हो जाएंगे। बलों में सिपाही और हवलदार के स्तर पर भी प्रमोशन नीति ठीक नहीं है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है। अपनी मांगों को लेकर एसोसिएशन 14 दिसंबर को कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन करेगी। इसमें केंद्रीय सुरक्षा बलों के पूर्व अधिकारी एवं जवान भाग लेंगे।