बीफ निर्यात में विश्व में पहले स्थान पर भारत, सालाना कारोबार 27 हजार करोड़
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देश में बढ़ रही भीड़ हिंसा की घटनाओं से सरकार और सुप्रीम कोर्ट दोनों ही चिंतित हैं। एक सर्वे के अनुसार भारत में करीब 71 प्रतिशत आबादी ऐसे लोगों की है जो खाने में मांस का उपयोग करते हैं। और मुस्लिम आबादी लगभग 18% प्रतिशत। अमेरिका के एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि मोदी सरकार बनने के बाद पिछले साल अक्टूबर में भारत से बीफ एक्सपोर्ट 5% बढ़कर 20 लाख टन हो गया था। हालांकि चीन जैसे देशों में बीफ की बढ़ती मांग इसकी वजह है। जिस देश में बीफ और गौ हत्या के मुद्दे पर भीड़ हिंसा की शर्मनाक घटना घट रही हैं उस देश का सबसे बड़ा और सबसे आश्चर्यजनक सच ये है कि वर्तमान सरकार में भारत बीफ निर्यात में विश्व में पहले स्थान पर पहुंच गया है। भारत में बीफ के सालाना कारोबार की रकम करीब 27 हजार करोड़ रुपये है।
सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों के कारण देशभर में उन्मादी भीड़ द्वारा लोगों को पीटने या हत्या करने की घटनाएं बढ़ रही हैं। मोहम्मद अखलाक, डीएसपी अयूब पंडित, रवींद्र कुमार, जफर खान और पहलू खान। ये वो नाम हैं, जिन्हें ऐसी ही भीड़ ने मार डाला। ये फेहरिस्त काफी लंबी है। हालात ये हैं कि बच्चा चोरी के सिर्फ शक में पिछले डेढ़ महीने में 7 राज्यों में 20 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी गई हैं। इनमें असम, आंध्र प्रदेश, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक शामिल हैं। इन घटनाओं की सबसे बड़ी वजह दरअसल सोशल मीडिया व ऐसी अन्य टेक्नोलॉजी है। सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज या छेड़छाड़ कर बनाए गए फेक वीडियो के जरिए अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। देखकर या सुनकर इन अफवाहों पर भरोसा बढ़ता जाता है। यही भीड़ के गुस्से को और भड़काने का काम करता है। ऐसे में भीड़ कानून अपने हाथ में ले लेती है। सामूहिक हिंसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से ही फैलती है।
ये डिजिटल हिंसा छोटे शहरों और दूर-दराज गांवों में ज्यादा भयावह तरीके से काम कर रही है। पिछले दिनों त्रिपुरा में बच्चे उठाने के शक में तीन लोगों को भीड़ ने मार दिया। अगरतला में भी दो लोगों को मार दिया गया। कर्नाटक में एक इंजीनियर की जान ले ली गई । एेसा ही कुछ 6 जुलाई को हुआ था, जब असम में भीड़ तीन साधुओं को पीटने लगी। हालांकि सेना के जवानों ने इन्हें बचा लिया। तमिलनाडु में एक मैसेज ने हिंदी बोलने वाले लोगों को संगठित कर दिया।
भीड़ हिंसा के लिए वॉट्सएप पर फेक न्यूज सबसे बड़ी वजह
देशभर के अलग-अलग हिस्सों से सामाने आ रहे भीड़ हिंसा के मामले बताते हैं कि वॉट्सएप इसकी सबसे बड़ी वजह रहा है। इसलिए कि इसमें ग्रुप में संदेश भेजने वाला बेहद आसान फीचर है। भारत में यह इसलिए और भी खतरनाक साबित हो रहा है कि वॉट्सएप का इस्तेमाल करने वाले सबसे ज्यादा लोग यहीं हैं। दुनिया में 1 अरब लोग इसे इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 25 करोड़ लोग इनमें भारत के हैं। इसमें से अधिकांश की सुबह ही वॉट्सएप के साथ होती है और दिन का अंत भी। हालांकि अब वॉट्सएप भारत में ग्रुप मैसेज पर नियंत्रण के लिए टेस्ट करने जा रहा है। इसके तहत लोग वॉट्सएप पर कोई एक संदेश 5 से ज्यादा बार फॉर्वर्ड नहीं कर सकेंगे। टेस्ट सफल रहा तो इसे नियम के तौर पर लागू कर दिया जाएगा।
आखिर भड़की भीड़ पर कैसे लगे लगाम
पिछले डेढ़ महीने में देशभर के अलग-अलग हिस्सों से 20 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें भीड़ ने पीट-पीटकर किसी की हत्या कर दी है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित है। उसने सरकार को गाइडलाइन तैयार करने की हिदायत दी है। मगर सोशल मीडिया पर नियंत्रण के बिना इन्हें रोकना आसान नहीं है। वैसे तथ्य बताते हैं कि भीड़ के भड़कने की कई वजहें रही हैं। जब सोशल मीडिया नहीं था, लिंचिंग तो तब भी होती थी।
भीड़ के आक्रोशित होने के ऐसे बदलते दिखे ट्रेंड
इस साल फरवरी से लेकर 1 जुलाई तक देश के 17 राज्यों में 32 से ज्यादा लोगों को भीड़ ने बच्चा चोरी की आशंका में पीट-पीटकर मार डाला। सबसे ताजी घटना कर्नाटक के बीदर की है, यहां बच्चों को चॉकलेट बांट रहे एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की भीड़ ने हत्या कर दी।
कुछ दिन पहले राजस्थान के अलवर में भीड़ ने गो-तस्करी की आशंका में एक शख्स की हत्या कर दी। 28 सितंबर 2015 को उत्तरप्रदेश के दादरी में मोहम्मद अखलाक को भीड़ ने घर में बीफ रखने के शक में मार डाला। इसके बाद से जुलाई 2017 तक लगभग 20 माह में गो-तस्करी व बीफ रखने की शंका में अलग-अलग मामलों में 14 लोगों की जान भीड़ ने ले ली।
एक रिपोर्ट के अनुसार अगर सिर्फ असम का ही आंकड़ा देखें तो 2001-2017 के दौरान 114 महिलाओं और 79 पुरुषों को डायन / ओझा करार देकर उनकी हत्या कर दी गई। इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया के व्हाट्सएप जैसे सूचना माध्यमों के आने से पहले भी देश में भीड़ द्वारा हत्याएं होती रही हैं।
मॉब लिंचिंग पर कोई सम्मिलित आंकड़ा सरकार के पास नहीं
हाल ही में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने राज्यसभा में कहा कि भीड़ हिंसा पर कोई सम्मिलित आंकड़ा सरकार के पास नहीं है। ऐसा इसलिए कि 14 से ज्यादा राज्यों ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो से इस तरह की घटनाओं का डेटा शेयर नहीं किया है। 2014 से 2017 तक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो महज 9 राज्यों का आंकड़ा उपलब्ध है। इन आंकड़ों के अनुसार इस समयावधि में सबसे ज्यादा 15 मामले असम में सामने आए। इनमें 15 लोगों की जान गई। हालांकि पुलिस ने 100 लोगों को हिरासत में भी लिया। 8 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर झारखंड, वहीं तीसरे स्थान पर 6 मामलों वाला मेघालय रहा। झारखंड में 11 लोग मारे गए, 55 गिरफ्तारियां हुईं। मेघालय में 8 लोगों को भीड़ ने मार दिया मगर एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
भीड़ हिंसा : सबकुछ जो जानना जरूरी है
भीड़ पिटाई या फिर हत्या कर दे, तो इंडियन पीनल कोड(आईपीसी) की इन धाराओं में केस दर्ज हो सकता है। इनमें सबसे पहले सामान्य कानून है। इसमें हत्या (302), सदोष मानव वध (304), हत्या का प्रयास (307), चोट या गंभीर चोट पहुंचाना शामिल है। दूसरा भीड़ से जुड़े कानून, इनमें कॉमन इन्टेंशन (34), गैरकानूनी जमाव (141, 149), आपराधिक साजिश (120बी), दंगा (147, 148) शामिल हैं। भीड़ हिंसा के मामले में ये सभी कानून एक साथ लागू किए जा सकते हैं। इनमें दोषियों को उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा का प्रावधान है। मगर अब और भी कड़े कानून बनाने की मांग उठने लगी है।
भीड़ हिंसा को लेकर अब तक कहां क्या हुआ?
17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने गोहत्या व गोमांस की तस्करी की शंका में भीड़ द्वारा लोगों को मार देने के खिलाफ आयी अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र व राज्यों को गाइड लाइन जारी की और सख्त कानून बनाने के लिए कहा। टिप्पणी की कि भीड़तंत्र को देश का कानून रौंदने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
18 जुलाई को मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने सरकार पर भीड़ हिंसा को लेकर कुछ न कर पाने का आरोप लगाया। यह भी कहा कि इस पर अलग से कानून बनाया जाए। मगर सरकार ने खारिज कर दिया। भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि ऐसी घटनाएं बढ़ने की वजह आर्थिक असमानता है।
19 जुलाई को सरकार ने व्हाट्सएप को एक और नोटिस भेज भड़काने वाले और फेक संदेशों को रोकने के लिए कदम उठानेे को कहा।
20 जुलाई को संसद में गृहमंत्री राजनाथ सिंह बोले कि सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग 1984 (सिख दंगों) में हुई थी।
कहां, कब और क्यों उग्र हुई भीड़
भीड़ हिंसा की बड़ी घटना सबसे पहले महाराष्ट्र में सामने आई थी। जानिए कब कहां भीड़ तंत्र हिंसक हुआ।
21 फरवरी 2016 को महाराष्ट्र के लातूर में एक विशेष वर्ग के पुलिसकर्मी को भीड़ ने सिर्फ इसलिए मार डाला, क्योंकि उसने 'जय भवानी' का नारा लगाने से इनकार कर दिया था।
1 अप्रैल 2017: राजस्थान के अलवर में पहलू खान नाम के 55 वर्षीय पशु व्यापारी की कथित गोरक्षकों की भीड़ ने गो-तस्करी के शक में पिटाई कर दी थी। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। 2017 में ही हरियाणा के बल्लभगढ़ में 16 साल के जुनैद की हत्या ट्रेन में सीट को लेकर हुई एक मामूली विवाद में कर दी गई।
30 अप्रैल 2017: असम के नगांव में गाय चुराने के शक में भीड़ ने 2 लोगों की हत्या कर दी।
3 मई 2017: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में अंतरजातीय विवाह करने वाले युगल की मदद करने पर भीड़ ने गुलाम मोहम्मद नाम के व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
23 मई 2017: झारखंड में मुन्ना अंसारी नामक शख्स अपने रिश्तेदार के घर आया था। भीड़ ने उसे चोर समझकर मार डाला।
7 जून 2017: झारखंड के धनबाद में इफ्तार पार्टी के लिए बीफ ले जाने के आरोप में एक व्यक्ति की हत्या।
16 जून 2017 को राजस्थान के प्रतापगढ़ में सरकारी म्युनिसिपल काउंसिल कर्मियों ने एक मुसलमान कार्यकर्ता जफर हुसैन की लात-घूंसों से मारकर हत्या कर दी। जफर ने अधिकारियों को खुले में शौच कर रही महिलाओं की तस्वीर खींचने से रोका था।
22 जून 2017 को कश्मीर में सुरक्षा अधिकारी मोहम्मद अयूब पंडित को स्थानीय लोगों ने निर्वस्त्र कर पीट-पीट कर इसलिए मार डाला क्योंकि वो मस्जिद के बाहर लोगों की तस्वीर खींच रहे थे।
24 जून 2017 को हरियाणा के बल्लभगढ़ में ट्रेन में सीट को लेकर हुए विवाद में भीड़ ने जुनैद खान नामक युवक को मार डाला।
1 जुलाई 2018 को धुले के रैनपाड़ा गांव में भीड़ ने पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इन लोगों पर बच्चा चोर होने का आरोप लगाया गया था।
21 जुलाई 2018 को पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के बाड़मेर जिले में खेताराम भील की एक मुस्लिम महिला से अवैध संबंधों के आरोप में कथित रूप से 12 लोगों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी।
24 जुलाई 2018 को प. बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में भीड़ ने बच्चा चोर होने के संदेह में चार महिलाओं से कथित तौर पर मारपीट की और उनमें से दो को निर्वस्त्र कर दिया। एक ही महीने में ऐसी 2 घटनाएं हुईं।
9 जून 2018 को असम के कार्बी आंगलॉन्ग जिले के एक दूरवर्ती इलाके में सोशल मीडिया पर फैलाई गई बच्चा चोर गैंग की अफवाह के बाद भीड़ द्वारा दो युवकों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई।
15 जून 2018 को कर्नाटक के बीदर जिले के मुरकी में व्हाट्सएप पर बच्चा चोरी की अफवाह के चलते भीड़ ने कथित तौर पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पीट-पीट कर हत्या कर दी और 3 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
वेल्लोर जिले में 28 अप्रैल 2018 को एक हिन्दीभाषी मजदूर को बच्चा चोर होने के शक में पीट-पीट कर मार डाला तो चेन्नई के तेनमपेट इलाके में जून 2018 में स्थानीय लोगों ने दो प्रवासी मजदूरों को बच्चा चोर होने के संदेह में बुरी तरह से पीटा।