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भारत के लिए चिंता: एक डिग्री तापमान बढ़ा तो आसमान से लाखों बार गिरेगी बिजली

Sun, 28 Jun 2020 04:31 AM IST
योगेश साहू मनीष मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली।
मनीष मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 28 Jun 2020 04:31 AM IST
सार

  • तापमान बढ़ने पर बिजली गिरने की घटनाओं में होगा 12 फीसदी का इजाफा
  • देश में साल 2019 में 3.22 लाख बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की गई हैं

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Concern for India: If one degree of temperature increases, lightening will fall from the sky millions of times, lightening incident
बिजली गिरने से 50 की मौत - फोटो : Agency

विस्तार

बिहार और पूर्वी यूपी में बिजली गिरने से हुई 110 लोगों की मौत के साथ ही मानसून के दौरान होने वाली आपदाओं ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। अमेरिका की साइंस मैगजीन में छपी एक रिसर्च में कहा गया है कि वातावरण का तापमान बढ़ने के साथ ही भारत में आंधी-तूफान की घटनाएं बढ़ेंगी और बिजली गिरने की घटनाएं अधिक होंगी।

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रिपोर्ट के अनुसार अगर वातावरण का तापमान एक डिग्री तक बढ़ता है, तो बिजली गिरने की घटनाओं में 12 फीसदी की अधिकता आएगी। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 1951 से 2015 के बीच वार्षिक औसत अधिकतम तापमान में 0.15 डिग्री जबकि न्यूनतम तापमान में 0.13 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी देखी गई है। 
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मतलब वातावरण में तापमान बढ़ने के साथ ही आंधी-तूफान की अधिकता और आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में सीधा संबंध है। भारत के कई राज्यों में बिजली की घटनाओं को दर्ज करने के साथ ही पूर्वानुमान जारी करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसी अर्थ नेटवर्क के क्षेत्रीय प्रबंधक कुमार मार्गश्याम कहते हैं, भारत में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। 
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ब्रिटेन की एक स्टडी है कि ग्रीन हाउस इफेक्ट बढ़ने से तापमान में बढ़ोतरी से बिजली की घटनाएं बढ़ रही हैं। तापमान में तीव्र बदलाव से आंधी-तूफान की घटनाएं ज्यादा होती हैं। ये आंधी-तूफान बहुत कम समय के लिए होते हैं, जो 30 मिनट से 45 मिनट तक होते हैं। 

कई देशों में बिजली गिरने की सूचनाएं एकत्र करने के साथ ही आंधी-तूफान की पूर्व सूचना देने वाली संस्था अंतराष्ट्रीय संस्था अर्थ नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 भारत में कुल 3,22,38,667 बार बिजली की घटनाएं हुईं।

हर साल करीब 2000 लोग गंवा देते हैं जान

भारत में दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों को दर्ज करने वाली संस्था ‘एनसीआरबी’ के आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल करीब 2000 लोगों की मौत बिजली गिरने से होती है, जो कि प्राकृतिक आपादाओं से होने वाली मौतों में सबसे अधिक है।

भारत में सबसे अधिक बिजली की घटनाएं इसलिए भी होती हैं क्योंकि भूमध्य रेखा और हिन्द महासागर के निकट होने से गर्मी और आर्द्रता अधिक होती है, जो कि आंधी-तूफान के बनने में सहायक होते हैं। इस बारे में कुमार मार्गश्याम कहते हैं, 'तापमान, आर्द्रता और अन्य स्थानीय मौसम में आए तीव्र बदलाव के कारण ही आंधी-तूफान अधिक आते हैं, जिस कारण बिजली गिरने की भी घटनाएं बढ़ती हैं।'

प्री मानसून में सबसे ज्यादा गिरती है बिजली

भारत में जून में सबसे अधिक बिजली गिरने की घटनाएं इसलिए भी होती हैं क्योंकि मानसून की दस्तक के साथ ही तापमान की अधिकता होने से आंधी-तूफान अधिक बनते हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग में प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केन्द्र के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. कुलदीप श्रीवास्तव कहते हैं कि पूर्वी यूपी और बिहार में प्री मानसून में सबसे अधिक थंडरस्टार्म और बिजली की घटनाएं होती हैं।

क्या होती है बिजली
आकाश में बादलों के बीच जब टक्कर होती है, यानि घर्षण होने से अचानक इलेक्ट्रोस्टैटिक चार्ज निकलती है, ये तेजी से आसमान से जमीन की तरफ आती है। इस दौरान हमें तेज कड़क आवाज सुनाई देती है और बिजली की स्पार्किंग की तरह प्रकाश दिखाई देता है।

दामिनी से मिलेगी जानकारी

सरकार ने आकाशीय बिजली की सूचना देने के लिए ‘दामिनी’ के नाम से एप भी जारी किया है, जिस पर आसपास घटित होने वाली ऐसी घटनाओं के संबंध में मौसम विभाग द्वारा अलर्ट जारी किया जाता है। लेकिन गांवों तक इसकी जानकारी पहुंचना बड़ी चुनौती है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • तुरंत पानी, बिजली के तारों, खंभों, हरे पेड़ों और मोबाइल टॉवर आदि से दूर हट जाएं।
  • घर से बाहर हैं तो हाथों को कानों पर रख, दोनों एड़ियों को जोड़कर जमीन पर बैठ जाएं।
  • अगर एक से ज्यादा लोग हैं तो एक दूसरे से दूरी बनाकर रखें।
  • छतरी या सरिया जैसी कोई चीज है तो उसे दूर रखें, ऐसी चीजों पर बिजली गिरने की आशंका सबसे ज्यादा रहती है।
  • पुआल वगैरह के ढेर से दूर रहें, उसमें आग लग सकती है।

2019 में इन राज्यों गिरी सबसे ज्यादा बिजली

राज्य कुल घटनाएं
ओडिशा 40,84,820
पश्चिम बंगाल 29,99,191
मध्यप्रदेश 27,08,483
झारखंड 24,29,412
कर्नाटक 21,31,887
(स्रोत- इंडिया लाइटनिंग रिपोर्ट, अर्थ नेटवर्क)
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