फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   concern black carbon is a highly dangerous climate pollutant causing serious disruption in monsoon

चिंताजनक: बेहद खतरनाक जलवायु प्रदूषक है ब्लैक कार्बन, मानसून प्रणाली में उत्पन्न कर रहा है गंभीर बाधा

Tue, 01 Apr 2025 05:12 AM IST
निर्मल कांत अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 01 Apr 2025 05:12 AM IST
सार

ब्लैक कार्बन जलवायु परिवर्तन को तेज करने और मौसम की चरम घटनाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ग्लेशियरों के पिघलने और मानसून प्रणाली में गंभीर व्यवधान का कारण बन रहा है। यह विशेष रूप से दक्षिण एशिया और हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में प्रभाव डाल रहा है, जिससे बाढ़ और खाद्य सुरक्षा संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

विज्ञापन
concern black carbon is a highly dangerous climate pollutant causing serious disruption in monsoon
ब्लैक कार्बन - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

ब्लैक कार्बन एक अल्पकालिक लेकिन अत्यंत खतरनाक जलवायु प्रदूषक है, जिसे वैश्विक तापमान वृद्धि के लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार माना जाता है। यह केवल ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का कारण ही नहीं बन रहा बल्कि मानसूनी प्रणाली में भी गंभीर व्यवधान उत्पन्न कर रहा है।

विज्ञापन


इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमडी) और क्लीन एयर फंड के ताजा अध्ययन में पाया गया कि ब्लैक कार्बन जिसे आमतौर पर कालिख  के रूप में जाना जाता है, जलवायु परिवर्तन को तेज करने और मौसम की चरम परिस्थितियों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एटमॉस्फेरिक पॉल्यूशन रिसर्च पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में कहा गया है कि अगर ब्लैक कार्बन उत्सर्जन में कटौती की जाए तो जलवायु परिवर्तन की गति को धीमा किया जा सकता है। कालिख कार्बनिक (कार्बन युक्त) पदार्थों जैसे लकड़ी, ईंधन, तेल, प्लास्टिक और घरेलू कचरे के अधूरे जलने का उपोत्पाद है। कालिख बनाने वाले महीन काले या भूरे रंग के पाउडर में आर्सेनिक, कैडमियम और क्रोमियम सहित कई कार्सिनोजेन्स हो सकते हैं। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि ब्लैक कार्बन ग्लेशियरों, बर्फ की चादरों और समुद्री बर्फ के पिघलने की गति को तेज करता है, विशेष रूप से आर्कटिक और हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में। दक्षिण एशिया में इसका उत्सर्जन मानसून की बारिश के स्वरूप को गंभीर रूप से बाधित करता है, जिससे बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। इससे खाद्य सुरक्षा और लोगों की आजीविका पर भी खतरा मंडराने लगता है।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Heatwave: इस साल सहने होंगे लू के दोगुने थपेड़े,इन महीनों में सामान्य से अधिक गर्मी; आज से ही झेलनी होगी तपिश
विज्ञापन
विज्ञापन


स्रोत और आर्थिक प्रभाव
अध्ययन के अनुसार हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में मानवजनित ब्लैक कार्बन का जमाव 45 से 66 फीसदी तक है। यह आवासीय ठोस ईंधन जलाने और ईंट भट्टों से आता है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार और पाकिस्तान का योगदान भी है। इसके अलावा, चावल मिलें और चीनी उद्योग भी प्रमुख योगदानकर्ता हैं। ब्लैक कार्बन पीएम 2.5 के प्रमुख घटकों में से एक है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक है। रिपोर्ट के अनुसार 2021 में इससे जुड़े वायु प्रदूषण के कारण 80 लाख से अधिक मौतें समय से पहले  हुईं। साथ ही इस प्रदूषण के कारण वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जडीपी) का 6 फीसदी से अधिक खर्च हो रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और वंचित समुदायों पर पड़ता है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed