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उपलब्धि: कंप्यूटर तकनीक से होगा हवा के जहरीले सूक्ष्म कणों पर वार, गंभीर बीमारियों से मिलेगी राहत

Sat, 07 Jun 2025 06:44 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 07 Jun 2025 06:44 AM IST
सार

वैज्ञानिकों ने हवा में मौजूद खतरनाक सूक्ष्म कणों की निगरानी के लिए नई कंप्यूटर तकनीक विकसित की है, जो इन कणों की गति और असर को तेजी से समझने में मदद करेगी। यह तकनीक हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है।

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Computer technology will attack poisonous air particles, will provide relief from serious diseases
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वैज्ञानिकों ने हवा में घुले खतरनाक सूक्ष्म कणों की निगरानी के लिए एक नई कंप्यूटर तकनीक विकसित की है, जो बेहद बारीकी से यह पता लगाएगी कि ये कण कैसे और किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। अब तक इन नन्हें कणों के व्यवहार को समझना मुश्किल था, क्योंकि ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि शरीर के अंदर तक पहुंच जाते हैं और हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
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नई तकनीक की मदद से अब वैज्ञानिक यह बहुत तेजी और सटीकता से जान पाएंगे कि ये कण हवा में कैसे तैरते हैं, किन रास्तों से शरीर तक पहुंचते हैं और वहां जाकर कैसे असर डालते हैं। जर्नल ऑफ कम्प्यूटेशनल फिजिक्स में प्रकाशित एक शोध अध्ययन में कहा गया है कि वर्तमान में जिन सिमुलेशन को चलाने में हफ्तों लग सकते हैं, उन्हें कुछ ही घंटों में पूरा किया जा सकता है। यह तकनीक कंप्यूटर के जरिए हवा में तैरते सूक्ष्म कणों और उनके चारों ओर की वायु की गतिविधि का नक्शा तैयार करती है।
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इसलिए यह तकनीक जरूरी...
शोधकर्ताओं का कहना है कि हवा में जो कण होते हैं वे इतने छोटे होते हैं कि हमारी नाक या शरीर की सामान्य सुरक्षा को पार करके सीधे फेफड़ों और खून में घुस सकते हैं। ऐसे कणों का असर धीरे-धीरे होता है लेकिन बहुत घातक होता है। इन्हें देखकर यह जान पाना कि वे कैसे फैलते हैं, अब तक आसान नहीं था। इस नई तकनीक से अब यह काम मुमकिन हो सकेगा।

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यहां होगी इस तकनीक की सबसे ज्यादा उपयोगिता...
यह तकनीक वायु प्रदूषण की सटीक निगरानी करेगी। यह हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने वाले उपकरणों को और अधिक सक्षम तथा कुशल बनाएगी। इसके अलावा स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहद उपयोगी होगी। यह दवा को शरीर के अंदर पहुंचाने के लिए बनाए जा रहे नैनो-कणों के डिजाइन को बेहतर करने में मदद करेगी। शहरी नियोजन के क्षेत्र में भी यह उल्लेखनीय योगदान दे सकती है। इसके जरिए यह बताया जा सकेगा कि किसी शहर में विषैले कण सबसे ज्यादा कहां जमा हो रहे हैं और किन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा है।
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