बंगाल: देवचा कोयला खनन परियोजना में जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं करेंगे, सीएम ममता का एलान
सीएम ममता ने कहा, प्रस्ताव के बावजूद अगर कोई जमीन नहीं देना चाहता है तो हम उस हिस्से को छोड़कर परियोजना को विकसित नहीं करेंगे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि सरकार ने देवचा पचामी कोयला खनन परियोजना में जमीन गंवाने वालों के मुआवजे में बदलाव किया है और इसके लिए जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। बीरभूम जिले में 35,000 करोड़ रुपये की कोयला परियोजना देश की सबसे बड़ी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है। बनर्जी ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि राज्य सरकार खनन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण करना चाहती है, जिससे एक लाख रोजगार पैदा होंगे। सरकार इस परियोजना को विकसित करेगी और निजी क्षेत्र को कोई जमीन नहीं दी जाएगी। हमने कैबिनेट बैठक में मुआवजे को संशोधित किया है ताकि लोगों को लाभ हो।
ममता ने किया था सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण का विरोध
ममता ने कहा, इसके बावजूद अगर कोई जमीन नहीं देना चाहता है तो हम उस हिस्से को छोड़कर परियोजना को विकसित नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन लोगों को भी मुआवजा और समर्थन की पेशकश की जा रही है जो इसके लिए चिन्हित क्षेत्र में रहते हैं। कोयला ब्लॉक और किसी भी जमीन या इमारत पर उनका कोई कानूनी अधिकार नहीं है। क्षेत्र के कुछ अवैध खदान मालिक स्थानीय लोगों को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन प्रस्ताव बढ़िया है और मुझे नहीं लगता कि कोई भी इसे अस्वीकार करेगा। सिंगूर और नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों का समर्थन करने वाली ममता बनर्जी ने कहा कि यह परियोजना अगले 100 वर्षों के लिए कम लागत वाली बिजली की पेशकश करके राज्य को अत्यधिक आर्थिक मदद देगी।
मुख्य सचिव एचके द्विवेदी ने कहा कि सरकार 10,000 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज की पेशकश कर रही है और मकान निर्माण के लिए दिए जाने वाले मुआवजे को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दिया है। उन्हें दिए जाने वाले घरों का आकार संशोधित कर 600 वर्ग फुट से 700 वर्ग फुट कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने मुआवजे के एक अन्य हिस्से को भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दिया है। द्विवेदी ने कहा कि वह जमीन गंवाने वालों को दो फीसदी मुआवजा, सौ फीसदी राहत के रूप में एक लाख रुपये ट्रांसफर लागत के रूप में दे रही है। द्विवेदी ने कहा कि भूमि खोने वाले परिवारों के योग्य सदस्यों को कांस्टेबल या ग्रुप सी कर्मचारियों की तरह बेहतर नौकरी दी जाएगी।
21,033 की आबादी वाले लगभग 4,314 घरों वाले इस क्षेत्र में 12 गांव हैं। उनमें से कुल 3,601 अनुसूचित जाति और अन्य 9,034 अनुसूचित जनजाति के हैं। बीरभूम जिले के मुहम्मद बाजार में स्थित देवचा पचमी 12.31 वर्ग किमी में फैला है, जो लगभग 3400 एकड़ है।