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महाभियोग प्रस्ताव: जस्टिस यादव और जस्टिस वर्मा के बीच तुलना उचित नहीं; विपक्ष की मुहिम पर फिर सकता है पानी

Thu, 12 Jun 2025 04:55 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Thu, 12 Jun 2025 04:55 AM IST
सार

जस्टिस यादव के खिलाफ राज्यसभा में विपक्ष के 55 सांसदों ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि जांच में इनमें से 8 सांसदों के हस्ताक्षर मैच नहीं हुए। इसके अलावा तीन अन्य सांसदों ने भी अपने हस्ताक्षर पर सभापति कार्यालय को कोई जवाब नहीं दिया है।

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Comparison between Justice Yadav and Justice Verma for impeachment motion is not appropriate
जस्टिस यशवंत वर्मा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद के मानसून सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा की तर्ज पर जस्टिस शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की विपक्ष की मुहिम पर पानी फिर सकता है। दरअसल, सरकार का कहना है कि दोनों मामलों की तुलना उचित नहीं है। ऐसा इसलिए कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच रिपोर्ट आने के बाद किया गया है, जिसमें उन पर लगे आरोपों की पुष्टि की गई है।

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सरकार के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि दोनों मामलों की तुलना नहीं की जा सकती। जस्टिस यादव के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था, हालांकि आंतरिक जांच नहीं हुई। इसके उलट जस्टिस वर्मा के मामले में उनके खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि हुई है। उन्होंने कहा कि इस सबसे इतर जस्टिस यादव के खिलाफ राज्यसभा में दिए गए महाभियोग प्रस्ताव में कई त्रुटियां हैं, हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सभापति जगदीप धनखड़ करेंगे।
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8 सांसदों के हस्ताक्षर मेल नहीं हुए
जस्टिस यादव के खिलाफ राज्यसभा में विपक्ष के 55 सांसदों ने महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि जांच में इनमें से 8 सांसदों के हस्ताक्षर मैच नहीं हुए। इसके अलावा तीन अन्य सांसदों ने भी अपने हस्ताक्षर पर सभापति कार्यालय को कोई जवाब नहीं दिया है। नियमानुसार महाभियोग के लिए राज्यसभा के 50 सांसदों के हस्ताक्षर चाहिए। ऐसे में अगर 8 सांसदों के हस्ताक्षर मैच नहीं हुए तो यह प्रस्ताव अस्वीकृत हो जाएगा।

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