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भगवान की भक्ति और प्रचार का सहारा, वाम मोर्चे का बदलता चेहरा

Thu, 26 May 2016 04:34 PM IST
Updated Thu, 26 May 2016 04:34 PM IST
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Communist parties are changing their policies
- फोटो : indian express

कम्यूनिस्ट राजनीति को आमतौर पर पूंजीवाद विरोधी और प्रचार प्रसार से दूर रहने वाली माना जाता है, यही कारण है कि चुनावों के दौरान जहां अन्य पार्टियां प्रचार प्रसार पर जमकर पैसा खर्च करती हैं वहीं वामदल इससे दूर ही रहना पसंद करते हैं। 

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कम्यूनिस्टों के बारे में माना जाता है कि भगवान को लेकर भी उनकी खास आस्‍था नहीं रहती लेकिन केरल की नई पी विजयन सरकार इन तमाम स्‍थापित मतों को तोड़ती नजर आ रही है। बुधवार को जिस समय पोलित ब्यूरो के सदस्य पिनारयी विजयन मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे उस समय उनके बड़े-बड़े विज्ञापन से देश के बड़े अंग्रेजी अखबारों के पहले पन्ने सने हुए थे। 
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वाम राजनीति के इस बदलते रंग रूप पर हर कोई हैरान था उसके समर्थक भी और कर्ताधर्ता भी। कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी तक के पास भी इस सवाल का कोई जवाब नहीं ‌था कि प्रचार-प्रसार से दूर रहने की वामदलों की सदियों पुरानी परंपरा केरल में कैसे एक झटके में ही टूट गई। 
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सवाल सिर्फ अखबारों में विज्ञापन भर का ही नहीं ‌था उस मजमून का भी था जो विज्ञापन में छपा था। खुद को नास्तिक कहने वाले और भगवान की मान्यताओं से दूरी रखने वाले कम्यूनिस्टों की केरल सरकार ने जो विज्ञापन दिया उसमें केरल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री पी विजयन की ओर से टैगलाइन दी गई है, ‘केरल को भगवान का खुद का देश बनाने के प्रति वचनबद्ध’। 

चाल चरित्र और चेहरा बदल रही वाम राजनीति

Communist parties are changing their policies

भगवान के प्रति कम्यूनिस्ट सरकारों की ऐसी आस्‍था शायद ही पहले कभी देखने को मिली हो। राजनीतिक पंडित मान रहे हैं कि सूचना तंत्र के इस दौर में अन्य पार्टियों के मुकाबले में टिके रहने के लिए वामदल भी चाल-चरित्र और चेहरा बदलने की तैयारी कर चुके हैं। हालांकि केरल सरकार के इस विज्ञापन पर बहस और चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है, सोशल मीडिया में इसको लेकर जमकर बहस चल रही है।

कम्यूनिस्ट पार्टियों के सबसे बड़े दल सीपीआई की कमान इस समय सीताराम येचुरी के हाथों में है। उन्हें उदारवादी राजनीति का समर्थक और प्रगतिशील चेहरा माना जाता है। माना जा रहा है कम्यूनिस्ट पार्टी में हो रहे इस बदलाव को उनका भी मौन समर्थन हासिल है। 

बुधवार को केरल सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में वे भी शामिल थे। इस संबंध में पत्रकारों ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने यह कहकर खुद को अलग करने का प्रयास किया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है वो कोलकाता में थे और वहीं से सीधे केरल पहुंचे हैं। 

हालांकि इस मामले पर वह केरल सरकार का बचाव करते भी दिखे, कहा बुधवार को सरकार को शपथ लेनी है, उससे पहले सरकार को इसके लिए (विज्ञापन) जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। हम देखें यह क्या हुआ और कैसे हुआ। हालांकि सीपीआई के एक अन्य वरिष्ठ नेता एस सुधाकर रेड्डी इससे जरूर नाराज दिखे। कहा इस तरह की गतिविधियां लेफ्ट और कम्यूनिस्ट पार्टियों में नहीं होती, इन कामों पर पैसा खर्च नहीं किया जाना चाहिए।

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