फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Commission to High court, There is exceptional backwardness in Maratha community, its members deserve quota

Maharashtra: 'मराठा समुदाय को अलग निगाहों से देखा जाता है, वे आरक्षण के हकदार', HC में पिछड़ा वर्ग आयोग

Thu, 01 Aug 2024 01:45 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: काव्या मिश्रा Updated Thu, 01 Aug 2024 01:45 PM IST
सार

महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने मराठा समुदाय के लोगों को दिए गए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 26 जुलाई को एक हलफनामा दायर किया।

विज्ञापन
Commission to High court, There is exceptional backwardness in Maratha community, its members deserve quota
Bombay High court - फोटो : ANI

विस्तार

मराठा आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में सियासी पारा चरम पर बना हुआ है। इस बीच, पिछड़ा वर्ग आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि मराठा समुदाय के लोगों में असाधारण पिछड़ापन है और पूरे समूह को एक अलग नजर से देखा जाता है, इसलिए वे शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण के हकदार हैं।

विज्ञापन


आत्महत्या करने वाले सबसे अधिक मराठा समुदाय के लोग
महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (एमएससीबीसी) ने मराठा समुदाय के लोगों को दिए गए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं के जवाब में हाईकोर्ट के निर्देशानुसार 26 जुलाई को एक हलफनामा दायर किया। इसमें कहा गया है कि अनारक्षित श्रेणी के व्यक्तियों द्वारा आत्महत्या के 10 साल के आंकड़ों से संबंधित आंकड़ों के अनुसार 94 प्रतिशत से अधिक मराठा समुदाय के थे।
विज्ञापन


फरवरी में दिया था 10 फीसदी का आरक्षण 
बता दें, महाराष्ट्र सरकार ने इस साल फरवरी में मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) श्रेणी के तहत 10 प्रतिशत आरक्षण दिया था। याचिकाओं में आयोग द्वारा प्रस्तुत सिफारिशों को भी चुनौती दी गई थी, जिसके आधार पर फैसला लिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


मराठा समुदाय के बीच एक खास पिछड़ापन
हलफनामे में आयोग ने कहा कि उसने इस मामले में अध्ययन किया। साथ ही पिछली समितियों द्वारा की गई रिपोर्टों और सिफारिशों का भी अध्ययन किया। अध्ययन से सामने आया कि मराठा समुदाय को राज्य में हेय दृष्टि यानी नीची निगाहों से देखा जा रहा है। साथ ही यह भी पाया गया कि मराठा समुदाय के बीच एक खास पिछड़ापन है। 

इसमें कहा गया है कि पिछड़ेपन को असाधारण और सामान्य से परे माना जाना चाहिए क्योंकि भारत जैसे उच्च आर्थिक विकास वाले समाज में सामान्य प्रवृत्ति सभी पहलुओं में प्रगतिशील होती है, लेकिन मराठा समुदाय के मामले में ऐसा नहीं है। आयोग ने आगे कहा कि मौजूदा समय की आर्थिक परिस्थितियों के मुकाबले, मराठों की दयनीय आर्थिक स्थिति उनके असाधारण आर्थिक पिछड़ेपन को दिखाती है।

हलफनामे में दावा किया गया है कि उसके आंकड़ों से पता चलता है कि मराठा समुदाय को समाज की मुख्यधारा से बाहर निकाल दिया गया है। इसे अब सच में किसी भी समाज की मुख्यधारा का हिस्सा नहीं माना जा सकता है। 


पांच को होगी सुनवाई
अब इस मामले में, प्रधान न्यायाधीश डीके उपाध्याय, न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति फिरदोष पूनीवाला की पूर्ण पीठ पांच अगस्त को याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed