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Commanders Conference: पश्चिम एशिया संकट के बीच भविष्य का रोडमैप बनाएगी भारतीय नौसेना; कमांडर सम्मेलन में मंथन
Wed, 15 Apr 2026 06:14 AM IST
Nirmal Kant
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Wed, 15 Apr 2026 06:14 AM IST
सार
Commanders Conference: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच नौसेना के शीर्ष कमांडरों के सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा रणनीति और भविष्य की तैनाती पर मंथन किया जा रहा है, जिसमें ऊर्जा और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। नौसेना एआई आधारित प्रणालियों, ड्रोन और स्वदेशी तकनीकों के उपयोग को बढ़ाकर आधुनिक युद्ध क्षमता मजबूत करने और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दे रही है। पढ़िए रिपोर्ट-
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एडमिरल डीके त्रिपाठी, जनरल उपेंद्र द्विवेदी
- फोटो : एक्स/एडीजी पीआई-इंडियन आर्मी
विस्तार
नौसेना के शीर्ष कमांडर पश्चिम एशिया संकट के बीच देश की समुद्री सुरक्षा रणनीति की समीक्षा कर भविष्य का रोडमैप बनाने पर चर्चा कर रहे हैं। मंगलवार को सम्मेलन में नौसेना के कमांडर ईरान-अमेरिका संघर्ष और हिंद महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय नौसेनाओं की मौजूदगी के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नौसेना की तैनाती और ऑपरेशनल स्थिति पर मंथन किया गया।
सम्मेलन में ऑपरेशन सिंदूर के बाद और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में सेना के अन्य अंगों से बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है। नौसेना अपनी युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता आधारित प्रणालियों, मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) और डाटा-आधारित प्रणालियों को शामिल करने पर खास जोर दे रही है। हाल ही में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा था कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध की हर गतिविधि पर नौसेना बाज जैसी पैनी नजर बनाए हुए है। नौसेना यह देख रही है कि इस युद्ध में कौन सी रणनीतियां काम कर रही हैं और कौन नाकाम हो रही हैं। युद्ध के मैदान से मिल रहे संकेत देखने जरूरी हैं ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि नौसेना को क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
एआई और स्वदेशीकरण पर जोर
भविष्य के युद्धों में बढ़त के लिए नौसेना अपने एआई रोडमैप की प्रगति पर विचार करेगी। चर्चा में बगैर चालक वाले जहाजों और उपकरणों के प्रभावी इस्तेमाल और आधुनिक तकनीकों का समावेश पर खास ध्यान दिया जाएगा। सम्मेलन का एक लक्ष्य हिंद महासागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के तौर पर स्थापित करना और स्वदेशीकरण भी है।
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समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा अत्यंत जरूरी : त्रिपाठी
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा, समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध ऊर्जा व व्यापार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसमें नौसेना की सक्रिय भूमिका जरूरी है। उन्होंने आधुनिक युद्ध में उभरती तकनीकों के बढ़ते उपयोग से पैदा हो रहे नए खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया और इनसे निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
ये भी पढ़ें: उत्तर भारत में गर्मी ने दिखाए तेवर; पश्चिमी, पूर्वी और मध्य भारत के अधिकतर हिस्सों में लू का अलर्ट
अग्रिम मोर्चों पर ड्रोन की तैनाती
सेना के चार दिवसीय कमांडर सम्मेलन में मल्टी डोमेन ऑपरेशंस के माहौल में मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) के व्यापक उपयोग पर चर्चा की जा रही है। ड्रोन वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका देखते हुए सेना अपने अग्रिम मोर्चों को इन प्रणालियों से पूरी तरह लैस करने की तैयारी में है। हाल के संघर्षों ने यह स्पष्ट किया कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी युद्ध की दिशा बदल सकते हैं। ऐसे में सेना अग्रिम मोर्चों पर हमलावर ड्रोन की तैनाती की रणनीति बना रही है। साल 2026 को इयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी घोषित करने के बाद यह सेना का पहला बड़ा सम्मेलन है।
स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना जरूरी
कमांडर सम्मेलन में कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने सैन्य उपयोग के लिए संप्रभु एआई मॉडल के विकास पर जोर दिया। सोमनाथन ने मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए शीर्ष कमांडरों के बीच तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की आवश्यकता बताई। सेना में संप्रभु एआई मॉडल होने से युद्ध कौशल और रणनीतिक फैसलों के लिए सेना किसी विदेशी सॉफ्टवेयर या क्लाउड सिस्टम पर निर्भर नहीं रहेगी। इससे संवेदनशील सैन्य डाटा देश की सीमाओं के भीतर ही प्रोसेस हो सकेगा। डाटा लीक होने की आशंका खत्म होगी। साथ ही संकट के समय विदेशी कंपनियों की ओर से सेवा बाधित किए जाने का जोखिम भी नहीं रहेगा। इससे भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्धों में सेना को एक स्वतंत्र डिजिटल कवच मिल पाएगा। सोमनाथन ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं, बल्कि मानसिकता होनी चाहिए, जिसमें हर नागरिक और संस्थान अपना योगदान दे। संघर्ष और शांति, दोनों स्थितियों में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण और सैन्य-नागरिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।
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सम्मेलन में ऑपरेशन सिंदूर के बाद और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में सेना के अन्य अंगों से बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया जा रहा है। नौसेना अपनी युद्धक क्षमता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमता आधारित प्रणालियों, मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) और डाटा-आधारित प्रणालियों को शामिल करने पर खास जोर दे रही है। हाल ही में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा था कि अमेरिका, इस्राइल और ईरान युद्ध की हर गतिविधि पर नौसेना बाज जैसी पैनी नजर बनाए हुए है। नौसेना यह देख रही है कि इस युद्ध में कौन सी रणनीतियां काम कर रही हैं और कौन नाकाम हो रही हैं। युद्ध के मैदान से मिल रहे संकेत देखने जरूरी हैं ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि नौसेना को क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
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एआई और स्वदेशीकरण पर जोर
भविष्य के युद्धों में बढ़त के लिए नौसेना अपने एआई रोडमैप की प्रगति पर विचार करेगी। चर्चा में बगैर चालक वाले जहाजों और उपकरणों के प्रभावी इस्तेमाल और आधुनिक तकनीकों का समावेश पर खास ध्यान दिया जाएगा। सम्मेलन का एक लक्ष्य हिंद महासागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक पसंदीदा सुरक्षा भागीदार के तौर पर स्थापित करना और स्वदेशीकरण भी है।
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समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा अत्यंत जरूरी : त्रिपाठी
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा, समुद्री संचार मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध ऊर्जा व व्यापार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसमें नौसेना की सक्रिय भूमिका जरूरी है। उन्होंने आधुनिक युद्ध में उभरती तकनीकों के बढ़ते उपयोग से पैदा हो रहे नए खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया और इनसे निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
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अग्रिम मोर्चों पर ड्रोन की तैनाती
सेना के चार दिवसीय कमांडर सम्मेलन में मल्टी डोमेन ऑपरेशंस के माहौल में मानव रहित हवाई प्रणालियों (यूएवी) के व्यापक उपयोग पर चर्चा की जा रही है। ड्रोन वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका देखते हुए सेना अपने अग्रिम मोर्चों को इन प्रणालियों से पूरी तरह लैस करने की तैयारी में है। हाल के संघर्षों ने यह स्पष्ट किया कि छोटे और सस्ते ड्रोन भी युद्ध की दिशा बदल सकते हैं। ऐसे में सेना अग्रिम मोर्चों पर हमलावर ड्रोन की तैनाती की रणनीति बना रही है। साल 2026 को इयर ऑफ नेटवर्किंग एंड डेटा सेंट्रिसिटी घोषित करने के बाद यह सेना का पहला बड़ा सम्मेलन है।
स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना जरूरी
कमांडर सम्मेलन में कैबिनेट सचिव डॉ. टीवी सोमनाथन ने सैन्य उपयोग के लिए संप्रभु एआई मॉडल के विकास पर जोर दिया। सोमनाथन ने मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए शीर्ष कमांडरों के बीच तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की आवश्यकता बताई। सेना में संप्रभु एआई मॉडल होने से युद्ध कौशल और रणनीतिक फैसलों के लिए सेना किसी विदेशी सॉफ्टवेयर या क्लाउड सिस्टम पर निर्भर नहीं रहेगी। इससे संवेदनशील सैन्य डाटा देश की सीमाओं के भीतर ही प्रोसेस हो सकेगा। डाटा लीक होने की आशंका खत्म होगी। साथ ही संकट के समय विदेशी कंपनियों की ओर से सेवा बाधित किए जाने का जोखिम भी नहीं रहेगा। इससे भविष्य के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्धों में सेना को एक स्वतंत्र डिजिटल कवच मिल पाएगा। सोमनाथन ने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं, बल्कि मानसिकता होनी चाहिए, जिसमें हर नागरिक और संस्थान अपना योगदान दे। संघर्ष और शांति, दोनों स्थितियों में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए संपूर्ण राष्ट्र दृष्टिकोण और सैन्य-नागरिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।
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