संयुक्त सैन्य कमांडर कांफ्रेंस: चीन से मुकाबला करना है तो सेनाओं को तकनीक आधारित मॉडर्न वॉरफेयर के लिए तैयार करना होगा
- संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस में निर्णय के आसार, प्रधानमंत्री के संदेश से साफ हो जाएगी तस्वीर
- चीन और पाकिस्तान की साझा चुनौती की तैयारी जरूरी
- चीन की नैनो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का ढूंढना है जवाब
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तीनों सेनाओं के शीर्ष कमांडर साल भर में एक बार मिलते हैं और भावी योजना, तैयारी, तालमेल, सैन्य क्षमता, रणनीतिक तैयारी पर चर्चा करते हैं। इस बार यह चार दिवसीय संयुक्त सैन्य कमांडर कांफ्रेंस गुजरात के केवड़िया में हो रही है। शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वहां थे और आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तीनों सेनाओं की संयुक्त कमांडर कांफ्रेस को संबोधित करेंगे।
पहली बार इस कमांडर कांफ्रेंस में एक सत्र में तीनों सेनाओं के जेसीओ स्तर के अधिकारी और जवान भी रहेंगे। शीर्षस्थ सूत्र बताते हैं कि इस संयुक्त कमांडर कांफ्रेंस में सैन्य बल लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बाद मिले अनुभवों के आधार पर भावी चुनौती से निपटने के लिए रणनीतिक तैयारी की तरफ बढ़ने जा रहे हैं।
सैन्य मामलों के जानकार मेजर जनरल (रिटा.) अशोक मेहता का कहना है कि अब नहीं तो आखिर कब चेतेंगे। इसलिए सामरिक रणनीति की दृष्टि से नए आयाम पर चर्चा होनी तय है। सैन्य बल अब परंपरागत युद्धक क्षमता के साथ मॉडर्न वॉरफेयर में पारंगत होने के लिए टेक्नोलॉजी ड्रिवेन सिस्टम पर जोर देंगे। इसमें सूक्ष्म तकनीकी, नैनो, आर्टिफिशियल इंटेलिजेस आधारित तकनीक पर जोर दिया जाएगा।
भारतीय सेना से रिटायर हुए एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चीन की सेना के पास निगरानी समेत तमाम क्षेत्र में काफी अत्याधुनिक तकनीक है। उसके ड्रोन सिस्टम काफी प्रभावी हैं। इसके अलावा आर्टिफिशियल इटेंलिजेंस के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा सैन्य बल कई नए आयामों पर काम कर रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हमारे सैन्य बलों के शीर्ष कमांडरों को रणनीति बनानी होगी। उन्हें थियेटर कमान, एरोस्पेस कमान, माइक्रोकॉप्टर तकनीक समेत तमाम क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
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सैन्य मामलों के जानकार मेजर जनरल (रिटा.) अशोक मेहता कहते हैं कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ ने हमें काफी कुछ सिखाया है। पहली बात तो यह साफ हो गई कि चीन आगे भी सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह की कार्रवाई कर सकता है। वह सात-आठ साल से ऐसा कर रहा है।
दूसरा, यह साफ हो गया है कि चीन मुकाबले में भारत को रखने की बजाय अमेरिका को मानकर चल रहा है, लेकिन हमारे लिए चुनौती चीन से आएगी। हमें चीन से मुकाबला करना है।
तीसरा और आखिरी सबसे महत्वपूर्ण है बजट। चीन का रक्षा बजट 200 अरब डॉलर का है। भारत का रक्षा बजट 50 अरब अमेरिकी डॉलर का है। वह तकनीक, सैन्य कैपिबिलिटी, मॉडर्न वॉरफेयर, फायर पावर में हमसे बहुत आगे है। मेजर जनरल का कहना है कि हम उनका मुकाबला नहीं कर सकते। उनसे डेपसांग, चुमार, पैंगोंग, गलवां घाटी में मिल रही चोट को इस तरह से रोक भी नहीं सकते।
इसलिए अपनी सामरिक रणनीति में एक बड़ा बदलाव करना होगा। मेजर जनरल का कहना है कि संयुक्त कमांडर कांफ्रेस में वरिष्ठ सैन्य कमांडर निश्चित रूप से इसके इर्द-गिर्द भावी रणनीति को सामरिक तैयार करेंगे। हमें सोचना होगा कि आने वाले समय में ऐसी स्थिति को कैसे रोका जा सकता है। इसके लिए सैन्य तैयारी बहुत जरूरी है। मेहता कहते हैं कि यह तैयारी बिना रक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश के संभव भी नहीं है।