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कोलगेट: पूर्व CBI निदेशक रंजीत सिन्हा के खिलाफ SC ने दिया जांच का आदेश
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 23 Jan 2017 09:25 PM IST
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पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा की मुश्किलें आने वालों दिनों में बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पूर्व सीबीआई निदेशक पर कोयला घोटाले की जांच को प्रभावित करने के लगे आरोपों के आपराधिक पहलूओं की जांच करने का आदेश दिया है। मालूम हो कि नवंबर, 2014 में रंजीत सिन्हा सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्त होने से चंद दिनों पहले शीर्ष अदालत ने उन्हें टूजी मामले की जांच से अलग होने का निर्देश दिया था।
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न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया पूर्व सीबीआई निदेशक पर अथॉरिटी के दुरूपयोग का मामला नजर आता है। पीठ ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा पर कथित तौर पर लगे आरोपों की जांच के लिए करने का निर्देश दिया है।
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पीठ ने आलोक वर्मा को सीबीआई के दो अधिकारियों का चयन कर एसआईटी को नेतृत्व करने के लिए कहा है। यह पहला मौका है जब सीबीआई निदेशक अपनी ही एजेंसी के पूर्व प्रमुख पर लगे आरोपों की जांच करेंगे।
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सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को जांच के लिए एसआईटी गठन करने का निर्देश
एसआईटी इस बात का पता लगाएगी कि क्या पूर्व निदेशक और कोयला घोटाले के आरोपियों की मुलाकात के बाद जांच प्रभावित हुई या अभियोजन पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई थी। आलोक वर्मा जांच के काम में केंद्रीय सर्तकता आयुक्त से भी मदद लेंगे। पीठ ने यह भी कहा कि सीबीआई निदेशक कोयला घोटाला मामले के विशेष अभियोजन अधिकारी आरएस चीमा से भी मदद ले सकते हैं।
तीन सदस्यीय इस पीठ ने सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एमएल शर्मा की कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट पर गौर करते हुए यह निर्देश दिया है। मालूम हो कि एमएल शर्मा की कमेटी ने इशारा किया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी और अपने निवास पर इस मामले के आरोपियों से कई बार मुलाकात भी की थी।
कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन मुलाकातों से संभव है कि रंजीत सिन्हा ने जांच के काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो।
तीन सदस्यीय इस पीठ ने सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एमएल शर्मा की कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट पर गौर करते हुए यह निर्देश दिया है। मालूम हो कि एमएल शर्मा की कमेटी ने इशारा किया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी और अपने निवास पर इस मामले के आरोपियों से कई बार मुलाकात भी की थी।
कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन मुलाकातों से संभव है कि रंजीत सिन्हा ने जांच के काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो।