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Hindi News ›   India News ›   CM Manik Sarkar talking about BJP and Tripura Assembly Election 2018

त्रिपुरा चुनाव से पहले बोले माणिक, BJP-RSS के एक्टिव होने से हमें मिली है 'नई ऊर्जा'

Mon, 05 Feb 2018 12:32 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला Updated Mon, 05 Feb 2018 12:32 PM IST
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CM Manik Sarkar talking about BJP and Tripura Assembly Election 2018
माणिक सरकार

चुनावी दहलीज पर खड़े त्रिपुरा में हर सियासी दल अपनी आखिरी रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए जमीन पर उतर चुका है। देश के चुनिंदा वाम सियासी गढ़ों में से एक 'त्रिपुरा' में भी बीजेपी ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। यहां केसरिया पताका का मुकाबला चार बार के सीएम माणिक सरकार से होगा। 18 फरवरी को त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव से पहले माणिक को 43  जनसभाओं में हिस्सा लेना है। जबरदस्त चुनावी व्यस्तता के बावजूद 69 साल के माणिक पार्टी के कार्यालय जाना कभी नहीं भूलते। हर शाम वह अगरतला के पार्टी दफ्तर में मौजूद होते हैं और जमीनी मुद्दों और सियासी समीकरणों पर चर्चा करते हैं। 

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पिछले कुछ हफ्तों में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक की आर्थिक स्थिति के बारे में काफी कुछ लिखा और पढ़ा जा चुका है। लेकिन जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने
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साफ-साफ कह दिया कि मेरी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल न पूछें। एक अंग्रेजी अखबार के साथ चुनावी चर्चा के दौरान माणिक सरकार ने स्वीकार किया कि त्रिपुरा में उनका कड़ा
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मुकाबला बीजेपी के साथ है। इस बारे में वह कहते हैं, केंद्र की बीजेपी सरकार की चाहत है कि देश से कम्युनिस्ट पार्टी को खत्म कर दिया जाए। उनका सीधा हमला त्रिपुरा और केरला पर ही होता है। 

सरकार कहते हैं, बीजेपी ने ऐसा कई पार्टियों के साथ किया है।  कांग्रेस के अलावा कई छोटे दल हैं जिनकी राजनीति को जमीन से हिलाने की कोशिश भी की है। लेकिन बीजेपी की यह कोशिश त्रिपुरा में कामयाब नहीं हो पाएगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी, आरएसएस, वीएचपी, बजरंग दल के साथ मिलकर लड़ने से वाम दलों में भी नई ऊर्जा का संचार हुआ है। हमें गर्व है कि वह हमें अपना दुश्मन समझते हैं और डराने की कोशिश में लगे हैं। हम उनसे वैचारिक, सैद्धांति और राजनीतिक तौर पर अलग पार्टी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब हम आरएसएस से दो-दो हाथ कर रहे हैं। त्रिपुरा में बीजेपी और उनके सहयोगी दशकों से हमें राज्य से हटाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन कभी कामयाब नहीं हो पाए। 

सरकार का मानना है कि इस बार भी बीजेपी की कोशिश नाकाम होने वाली है। उन्होंने कहा कि जो वह कर रहे हैं उसे हमें मदद मिल रही है। हम लोगों के सामने आरएसएस और बीजेपी से अलग एक विचारधारा का विकल्प दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा जो लोग सोचते हैं कि वाम दल खात्मे की ओर है, उन्हें देखना चाहिए जेएनयू और डीयू में क्या हो रहा है। इलाहाबाद और हैदराबाद के विश्वविद्यालयों में क्या हो रहा है। इन जगहों के नतीजे इस बात के सबूत हैं कि हम पहले से ज्यादा मजबूत हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ दलितों और गरीबों के चिंतक नहीं हैं बल्कि क्रीमीलेयर में जीवन बिताने वाले भी हमें अपना हितैषी मानते हैं। माणिक सरकार ने कहा कि अगर हमारा अस्तित्व खत्म हो रहा है तो त्रिपुरा में बीजेपी के माथे पर चिंता की लकीरें क्यों हैं? 

सियासी समीकरणों पर चर्चा करते हुए त्रिपुरा के मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सच है कि त्रिपुरा के ट्राइबल इलाकों पर वाम दल की जबरदस्त पकड़ है। और यह भी सच है कि समस्त आदिवासी इलाकों पर सिर्फ हमारा ही दबदबा नहीं है। 1970 में कांग्रेस ने आदिवासी बाहुल्य इलाकों में सेंध लगाने की कोशिश की थी और त्रिपुरा उपजाति जुबा समिति का निर्माण किया था, जिसके सहयोग से 1988 में सरकार भी बनी थी। वह इलाका CPI (M) से अभी भी दूर है। उन्होंने कहा कि आज बीजेपी मुद्दों की राजनीति नहीं कर रही है। न तो उनके पास भ्रष्टाचार के मुद्दे हैं और न ही पॉलिसी के। लिहाजा वह धुव्रीकरण की राजनीति कर रही है। सरकार ने कहा कि हमने भी मन बना लिया है कि किसी भी हाल में त्रिपुरा को बंटने नहीं देंगे। 


शिक्षा पर बात करते हुए चार बार से सीएम ने कहा कि जब हम सत्ता में आए तो राज्य में शिक्षा दर बहुत कम थी। हमने आदिवासी बाहुल्य इलाकों में लोगों तक शिक्षा पहुंचाई है जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। रोजगार के बारे में भी सरकार ने कहा कि त्रिपुरा में केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली नौकरियां नहीं है लेकिन हमने राज्य में हर साल 5 से 7000 नौकरियां दी हैं।  

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