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Karnataka: मांड्या में हुई झड़प पर मुख्यमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक सख्त, कहा- कल की घटना नहीं होनी चाहिए थी
Thu, 12 Sep 2024 02:31 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Thu, 12 Sep 2024 02:31 PM IST
सार
कर्नाटक के मांड्या में बुधवार को दो गुटों के बीच झड़प के बाद तनाव फैल गया है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि यह स्पष्ट है कि गणेश विसर्जन के समय मांड्या जिले के नागमंगला में जो पथराव हुआ है, वह उपद्रवियों का काम है। इससे समाज की शांति को खतरा है।
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Karnataka
- फोटो : PTI
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विस्तार
कर्नाटक के मांड्या जिले में गणेश विसर्जन दौरान जुलूस पर पथराव के बाद हालात बिगड़ गए। दो गुटों के बीच झगड़े के बाद वाहनों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटना हुई थी। अतिरिक्त पुलिस फोर्स को तैनात कर हालात पर काबू पाया गया। हालांकि इलाके में तनाव बरकरार है। अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह साफ है कि जो नागमंगला में हुआ है वो उपद्रवियों का काम है। सरकार ने इसे पूरी तरह गंभीरता से लिया है। अभी तक 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, गृह मंत्री जी परमेश्वर ने भी इस मुद्दे पर सख्त टिप्पणी की।
'पिछले डेढ़ साल से शांति के बगीचे की तरह था देश'
सीएम सिद्धारमैया ने कहा, 'यह स्पष्ट है कि गणेश विसर्जन के समय मांड्या जिले के नागमंगला में जो पथराव हुआ है, वह उपद्रवियों का काम है, जिससे समाज की शांति को खतरा है। सरकार ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। इस सिलसिले में 50 से अधिक लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और हमारी पहली प्राथमिकता समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखना है। पिछले डेढ़ साल में बिना किसी दंगे या हिंसा के देश सभी जातियों के लिए शांति के बगीचे की तरह था। उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा, जो जाति या धर्म की परवाह किए बिना धार्मिक आधार पर विभाजन की कोशिश कर रहे हैं। मैं जनता से अनुरोध करता हूं कि वे किसी के बहकावे में न आए। शांति और संयम बनाए रखते हुए हमारे साथ सहयोग करें।'
घटना पलभर में घटी
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि मांड्या जिले के नागमंगला शहर में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प को 'सांप्रदायिक हिंसा' नहीं कहा जा सकता। दरअसल, यह घटना पलभर में हुई थी।
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52 लोगों पर शिकंजा कसा
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के 52 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पथराव और वाहनों तथा संपत्तियों को जलाने जैसी घटनाओं में इनकी संलिप्तता है या नहीं यह सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पता चलेगा। उसके बाद इन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे।
'कल की घटना नहीं होनी चाहिए थी'
उन्होंने यह भी कहा, 'कल की घटना नहीं होनी चाहिए थी। एक छोटी सी घटना के रूप में शुरू हुई और झड़प में तब्दील हो गई। हालांकि, मामले में किसी को कोई बड़ी चोट नहीं आई है या लड़ाई नहीं हुई है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है। जब जुलूस निकल रहा था तब पथराव किया गया इसकी वजह से कुछ झड़पें हुईं। इसके बाद जब ऐसा लगा कि सब कुछ सुलझ गया है और लोग तितर-बितर हो रहे हैं तो कुछ उपद्रवियों ने बाइकों और दुकानों को आग लगा दी। बाद में पुलिस स्थिति को नियंत्रण में किया।'
सब कुछ नियंत्रण में: मंत्री
परमेश्वर ने कहा कि जानमाल के नुकसान या किसी बड़ी समस्या की कोई सूचना नहीं है। पुलिस अधीक्षक और महानिरीक्षक घटनास्थल पर हैं, जबकि कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस (केएसआरपी) की एक पलटन को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा, 'मैंने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), कानून और व्यवस्था को भेजा था। उन्होंने दौरा किया था और वह घटनास्थल पर डेरा डाले हुए हैं। सब कुछ नियंत्रण में है और आगे कोई घटना नहीं हुई है।'
क्या यह थी सांप्रदायिक हिंसा?
यह पूछे जाने पर कि क्या यह सांप्रदायिक हिंसा थी, मंत्री ने कहा कि जब जुलूस वहां जा रहा था तो दुर्घटनावश किसी ने पथराव किया, जिसके जवाब में इन लोगों ने भी पत्थर फेंके और इससे झड़पें हुईं। इसे सांप्रदायिक हिंसा नहीं कहा जा सकता।
कथित तौर पर एक पेट्रोल बम फेंकने और घटना के पूर्व नियोजित बताने पर गृह मंत्री ने कहा, 'नहीं, नहीं, यह घटना तुरंत-तुरंत हो गई है। पुलिस ने इसे और बढ़ने नहीं दिया है और चीजों को नियंत्रण में किया है। मैं मीडिया से अपील करता हूं कि वह इसे और न फैलाएं।'
मैं यह नहीं कह रहा कि...
उन्होंने आगे कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं कि घटना नहीं हुई है। घटना हुई है, हमने स्थिति को नियंत्रण में लाया है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह आगे नहीं बढ़े, बल को मौके पर तैनात किया गया है, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी वहां हैं।'
पिछले साल भी इसी तरह की घटनाओं के बावजूद कथित तौर पर एहतियाती कदम नहीं उठाए जाने के कारण पुलिस की ओर से चूक के आरोपों पर परमेश्वर ने कहा कि घटनास्थल पर केएसआरपी की एक टुकड़ी तैनात की गई थी, जिससे स्थिति को नियंत्रण में लाने में मदद मिली। अगर ऐसा नहीं होता तो इससे भी बड़ी हिंसा हो सकती थी। एक सहायक उपनिरीक्षक घायल हुए हैं और उन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मामले दर्ज किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया इस घटना के पीछे कोई राजनीतिक उकसावा नहीं लगता है। देखते हैं कि जांच रिपोर्ट से क्या निकलता है।
यह है मामला
गौरतलब है, मंड्या में गणेश जुलूस के दौरान बुधवार रात को दो गुटों में झड़प हो गई। इस झड़प से पूरा इलाका तनावपूर्ण हो गया। दरअसल, यह झड़प गणेश विसर्जन के दौरान हुई थी। बदरीकोप्पलू से श्रद्धालु दो गणेश मूर्तियों को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। जैसे ही जुलूस एक धार्मिक स्थल पर पहुंचा, कुछ उपद्रवियों ने पथराव कर दिया, जिससे दोनों गुटों में कहासुनी हो गई। इस घटना के बाद, दोनों गुटों ने अपने-अपने धार्मिक नारे लगाने शुरू कर दिए। हालात इतने खराब हो गए कि उपद्रवियों ने पथराव के बाद कई दुकानों और कपड़ों के साथ-साथ बाइक के शोरूम को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं बेकाबू भीड़ ने सड़क पर खड़ी बाइकों को भी फूंक दिया था। हालात को संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।
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'पिछले डेढ़ साल से शांति के बगीचे की तरह था देश'
सीएम सिद्धारमैया ने कहा, 'यह स्पष्ट है कि गणेश विसर्जन के समय मांड्या जिले के नागमंगला में जो पथराव हुआ है, वह उपद्रवियों का काम है, जिससे समाज की शांति को खतरा है। सरकार ने इसे बहुत गंभीरता से लिया है। इस सिलसिले में 50 से अधिक लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और हमारी पहली प्राथमिकता समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखना है। पिछले डेढ़ साल में बिना किसी दंगे या हिंसा के देश सभी जातियों के लिए शांति के बगीचे की तरह था। उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा, जो जाति या धर्म की परवाह किए बिना धार्मिक आधार पर विभाजन की कोशिश कर रहे हैं। मैं जनता से अनुरोध करता हूं कि वे किसी के बहकावे में न आए। शांति और संयम बनाए रखते हुए हमारे साथ सहयोग करें।'
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घटना पलभर में घटी
गृह मंत्री जी परमेश्वर ने गुरुवार को कहा कि मांड्या जिले के नागमंगला शहर में गणेश प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प को 'सांप्रदायिक हिंसा' नहीं कहा जा सकता। दरअसल, यह घटना पलभर में हुई थी।
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52 लोगों पर शिकंजा कसा
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के 52 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पथराव और वाहनों तथा संपत्तियों को जलाने जैसी घटनाओं में इनकी संलिप्तता है या नहीं यह सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद पता चलेगा। उसके बाद इन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए जाएंगे।
'कल की घटना नहीं होनी चाहिए थी'
उन्होंने यह भी कहा, 'कल की घटना नहीं होनी चाहिए थी। एक छोटी सी घटना के रूप में शुरू हुई और झड़प में तब्दील हो गई। हालांकि, मामले में किसी को कोई बड़ी चोट नहीं आई है या लड़ाई नहीं हुई है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है। जब जुलूस निकल रहा था तब पथराव किया गया इसकी वजह से कुछ झड़पें हुईं। इसके बाद जब ऐसा लगा कि सब कुछ सुलझ गया है और लोग तितर-बितर हो रहे हैं तो कुछ उपद्रवियों ने बाइकों और दुकानों को आग लगा दी। बाद में पुलिस स्थिति को नियंत्रण में किया।'
सब कुछ नियंत्रण में: मंत्री
परमेश्वर ने कहा कि जानमाल के नुकसान या किसी बड़ी समस्या की कोई सूचना नहीं है। पुलिस अधीक्षक और महानिरीक्षक घटनास्थल पर हैं, जबकि कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस (केएसआरपी) की एक पलटन को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा, 'मैंने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी), कानून और व्यवस्था को भेजा था। उन्होंने दौरा किया था और वह घटनास्थल पर डेरा डाले हुए हैं। सब कुछ नियंत्रण में है और आगे कोई घटना नहीं हुई है।'
क्या यह थी सांप्रदायिक हिंसा?
यह पूछे जाने पर कि क्या यह सांप्रदायिक हिंसा थी, मंत्री ने कहा कि जब जुलूस वहां जा रहा था तो दुर्घटनावश किसी ने पथराव किया, जिसके जवाब में इन लोगों ने भी पत्थर फेंके और इससे झड़पें हुईं। इसे सांप्रदायिक हिंसा नहीं कहा जा सकता।
कथित तौर पर एक पेट्रोल बम फेंकने और घटना के पूर्व नियोजित बताने पर गृह मंत्री ने कहा, 'नहीं, नहीं, यह घटना तुरंत-तुरंत हो गई है। पुलिस ने इसे और बढ़ने नहीं दिया है और चीजों को नियंत्रण में किया है। मैं मीडिया से अपील करता हूं कि वह इसे और न फैलाएं।'
मैं यह नहीं कह रहा कि...
उन्होंने आगे कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं कि घटना नहीं हुई है। घटना हुई है, हमने स्थिति को नियंत्रण में लाया है, यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह आगे नहीं बढ़े, बल को मौके पर तैनात किया गया है, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी वहां हैं।'
पिछले साल भी इसी तरह की घटनाओं के बावजूद कथित तौर पर एहतियाती कदम नहीं उठाए जाने के कारण पुलिस की ओर से चूक के आरोपों पर परमेश्वर ने कहा कि घटनास्थल पर केएसआरपी की एक टुकड़ी तैनात की गई थी, जिससे स्थिति को नियंत्रण में लाने में मदद मिली। अगर ऐसा नहीं होता तो इससे भी बड़ी हिंसा हो सकती थी। एक सहायक उपनिरीक्षक घायल हुए हैं और उन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मामले दर्ज किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया इस घटना के पीछे कोई राजनीतिक उकसावा नहीं लगता है। देखते हैं कि जांच रिपोर्ट से क्या निकलता है।
यह है मामला
गौरतलब है, मंड्या में गणेश जुलूस के दौरान बुधवार रात को दो गुटों में झड़प हो गई। इस झड़प से पूरा इलाका तनावपूर्ण हो गया। दरअसल, यह झड़प गणेश विसर्जन के दौरान हुई थी। बदरीकोप्पलू से श्रद्धालु दो गणेश मूर्तियों को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। जैसे ही जुलूस एक धार्मिक स्थल पर पहुंचा, कुछ उपद्रवियों ने पथराव कर दिया, जिससे दोनों गुटों में कहासुनी हो गई। इस घटना के बाद, दोनों गुटों ने अपने-अपने धार्मिक नारे लगाने शुरू कर दिए। हालात इतने खराब हो गए कि उपद्रवियों ने पथराव के बाद कई दुकानों और कपड़ों के साथ-साथ बाइक के शोरूम को आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं बेकाबू भीड़ ने सड़क पर खड़ी बाइकों को भी फूंक दिया था। हालात को संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था।