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खतरे की घंटी: गर्म हो रहे महासागरों की वजह से और ज्यादा खतरनाक होते जा रहे तूफान; हेलेन-मिल्टन इसके उदाहरण
Mon, 02 Dec 2024 07:43 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Mon, 02 Dec 2024 07:43 AM IST
सार
अध्ययन किए गए 40 तूफानों में से अधिकांश को गर्म महासागरों ने अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान की, जिससे ये तूफान एक श्रेणी तक बढ़ गए। जैसे-जैसे उष्णकटिबंधीय महासागरों से पानी वाष्पित होता है यह ऊपर उठता है और संघनित होता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Instagram
विस्तार
पिछले छह वर्षों में 85 फीसदी तूफानों को जलवायु परिवर्तन ने और अधिक शक्तिशाली बना दिया है। तूफान हेलेन और मिल्टन इसके उदाहरण हैं। खास तौर पर मेक्सिको की खाड़ी के साथ अटलांटिक क्षेत्र ने तूफानों को कहीं अधिक शक्तिशाली बना दिया है और इस दाैरान हवाओं की रफ्तार औसतन 29 किलोमीटर प्रति घंटा बढ़ गई है। यह जानकारी जर्नल एनवायरनमेंटल रिसर्च क्लाइमेट में प्रकाशित एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आई है।
अध्यन में ये बातें आई सामने
अध्ययन किए गए 40 तूफानों में से अधिकांश को गर्म महासागरों ने अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान की, जिससे ये तूफान एक श्रेणी तक बढ़ गए। जैसे-जैसे उष्णकटिबंधीय महासागरों से पानी वाष्पित होता है यह ऊपर उठता है और संघनित होता है। जल वाष्प से तरल पानी में यह परिवर्तन ऊर्जा जारी करता है, जो तूफानों को शक्ति प्रदान करती है।
गर्म महासागरों से वाष्पित होने वाला अधिक जल वाष्प तूफानों को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के अनुसार 2024 में जलवायु परिवर्तन की वजह से श्रेणी पांच के ऐसे दो तूफान आए थे, जिनका जलवायु परिवर्तन के बिना इतना शक्तिशाली होना संभव नहीं था। यदि जलवायु परिवर्तन का हाथ नहीं होता तो 2024 में एक भी तूफान श्रेणी पांच का नहीं आता। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से अब तक आठ तूफान ऐसे आए हैं जिनकी रफ्तार में औसतन 40 किमी प्रति घंटा की वृद्धि हुई है।
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इनमें 2019 में आया हम्बर्टो, जीटा 2020, सैम और लैरी 2021, अर्ल 2022, फ्रैंकलिन 2023 और 2024 में आए इसाक और राफेल शामिल हैं। इनमें हम्बर्टो और जीटा ऐसे थे जिनके दौरान जलवायु परिवर्तन की वजह से हवा की रफ्तार 50 किमी प्रति घंटा तक बढ़ गई थी।
2024 में सभी तूफानों के दौरान अधिकतम हुई हवा की रफ्तार
जलवायु परिवर्तन ने 2024 के दौरान अटलांटिक में आए सभी 11 तूफानों की अधिकतम रफ्तार को 14 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ा दिया। हवा की रफ्तार में आई इस वृद्धि ने सात तूफानों को पैमाने पर उच्च श्रेणी में पहुंचा दिया और इसके साथ उष्णकटिबंधीय तूफान डेबी तथा ऑस्कर को भी हरिकेन में बदल दिया। प्रमुख शोधकर्ता डैनियल गिलफोर्ड का कहना है कि जहां तूफान आते हैं वहां पानी आमतौर पर करीब 1.1 से 1.6 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो चुका है। जबकि जलवायु परिवर्तन की वजह से इसमें 2.2 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
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अध्यन में ये बातें आई सामने
अध्ययन किए गए 40 तूफानों में से अधिकांश को गर्म महासागरों ने अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान की, जिससे ये तूफान एक श्रेणी तक बढ़ गए। जैसे-जैसे उष्णकटिबंधीय महासागरों से पानी वाष्पित होता है यह ऊपर उठता है और संघनित होता है। जल वाष्प से तरल पानी में यह परिवर्तन ऊर्जा जारी करता है, जो तूफानों को शक्ति प्रदान करती है।
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गर्म महासागरों से वाष्पित होने वाला अधिक जल वाष्प तूफानों को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए उतनी ही अधिक ऊर्जा प्रदान करता है। नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के अनुसार 2024 में जलवायु परिवर्तन की वजह से श्रेणी पांच के ऐसे दो तूफान आए थे, जिनका जलवायु परिवर्तन के बिना इतना शक्तिशाली होना संभव नहीं था। यदि जलवायु परिवर्तन का हाथ नहीं होता तो 2024 में एक भी तूफान श्रेणी पांच का नहीं आता। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से अब तक आठ तूफान ऐसे आए हैं जिनकी रफ्तार में औसतन 40 किमी प्रति घंटा की वृद्धि हुई है।
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इनमें 2019 में आया हम्बर्टो, जीटा 2020, सैम और लैरी 2021, अर्ल 2022, फ्रैंकलिन 2023 और 2024 में आए इसाक और राफेल शामिल हैं। इनमें हम्बर्टो और जीटा ऐसे थे जिनके दौरान जलवायु परिवर्तन की वजह से हवा की रफ्तार 50 किमी प्रति घंटा तक बढ़ गई थी।
2024 में सभी तूफानों के दौरान अधिकतम हुई हवा की रफ्तार
जलवायु परिवर्तन ने 2024 के दौरान अटलांटिक में आए सभी 11 तूफानों की अधिकतम रफ्तार को 14 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ा दिया। हवा की रफ्तार में आई इस वृद्धि ने सात तूफानों को पैमाने पर उच्च श्रेणी में पहुंचा दिया और इसके साथ उष्णकटिबंधीय तूफान डेबी तथा ऑस्कर को भी हरिकेन में बदल दिया। प्रमुख शोधकर्ता डैनियल गिलफोर्ड का कहना है कि जहां तूफान आते हैं वहां पानी आमतौर पर करीब 1.1 से 1.6 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो चुका है। जबकि जलवायु परिवर्तन की वजह से इसमें 2.2 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि दर्ज की गई है।