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Clean Ganga: गंगा की सफाई को लेकर एनजीटी सख्त, कहा- नाकामी के जिम्मेदार लोगों की हो पहचान

Mon, 29 Nov 2021 10:01 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Mon, 29 Nov 2021 10:01 PM IST
सार

एनजीटी ने कहा कि विफलता के कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

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Clean Ganga: NGT strictly said that  the people responsible for the failure should be identified
गंगा नदी प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंगा नदी की सफाई को लेकर सख्ती बरतने की बात कही है। एनजीटी ने कहा है कि पिछले 36 वर्षों से निगरानी के बावजूद गंगा की सफाई चुनौती बनी हुई है। अब समय आ गया है जब नदी की सफाई के लिए आवंटित फंड के सही समयबद्ध उपयोग की जवाबदेही तय करने करने की जरूरत है। साथ ही प्रदूषण कम करने का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवंटित फंड और इसके उपयोग के संबंध में उचित जांच की जानी चाहिए।  

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एनएमसीजी की स्थापना के बावजूद गंगा प्रदूषित
एनजीटी चेयरमैन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हालांकि गंगा एक्शन प्लान एक और दो के जरिए केंद्र सरकार के स्तर पर पहल की गई हैं और उसके बाद नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की स्थापना हुई, लेकिन गंगा में प्रदूषण बरकरार है। एनजीटी ने कहा कि जवाबदेही और प्रतिकूल परिणामों नहीं होने से समय सीमा का उल्लंघन किया जाता है।
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पीठ ने कहा कि निगरानी और जवाबदेही तय करने में विफलता से केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी, निरंतर प्रदूषण और नतीजतन मौतें और बीमारियां होती हैं। एनजीटी ने कहा कि प्रदर्शन मापदंडों और समयसीमा स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और कार्य संपादन के ऑडिट की आवश्यकता है। विफलता के कारणों और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। नाकामी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए एक तंत्र को लगातार संचालित करने की आवश्यकता है। अनुशासनात्मक और गुणवत्ता नियंत्रण के बिना मिशन की सफलता की संभावना बहुत कम है। 
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एजेंसियों को बदलना होगा
ट्रिब्यूनल ने कहा कि आंतरिक समीक्षा तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता है लेकिन मौजूदा समय में ऐसा नहीं लगता। यदि लगता है कि एनएमसीजी द्वारा नियोजित एजेंसियां ठीक तरह से प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं तो एक उपयुक्त एजेंसी सरकारी, निजी या हाइब्रिड को काम सौंपकर संरचनात्मक बदलावों पर विचार करना होगा। इन्हें शर्तों के मुताबिक प्रदर्शन और लक्ष्यों को प्राप्त करने के संबंध में जवाबदेह ठहराया जाए। 

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