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सीजेपी प्रदर्शन: 'पुलिस से बचने के लिए बच्चों को बनाया गया ढाल'; एनएचआरसी ने किसे भेजा नोटिस? रिपोर्ट भी तलब

Sat, 03 Oct 2026 09:52 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sat, 03 Oct 2026 09:52 PM IST
सार

2 अक्तूबर के मुंबई प्रदर्शन में नाबालिगों को कथित तौर पर शामिल करने, उन्हें पुलिस कार्रवाई से बचाव के लिए इस्तेमाल करने और उनकी तस्वीरें-वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने की शिकायतों पर एनएचआरसी ने संज्ञान लिया है। आयोग ने मुंबई पुलिस, एमईआईटीवाई, एक्स और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस देकर एक सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।

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CJP Protest Children used as shields to evade police whom did NHRC send notice to Report also sought
प्रदर्शन करते सीजेपी कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

मुंबई में 2 अक्तूबर को हुए एक सार्वजनिक प्रदर्शन में नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर शामिल किए जाने और बाद में उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मुंबई पुलिस आयुक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई), महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग और एक्स (पहले ट्विटर) के भारत के शिकायत अधिकारी को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों से मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर मांगी गई है।

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बच्चे को भीड़ से ऊपर उठाने वाली तस्वीर का जिक्र
एनएचआरसी के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन में नाबालिगों को जुटाया और शामिल किया गया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो बाद में सोशल मीडिया मंचों पर प्रकाशित और प्रसारित किए गए। आयोग की कार्यवाही में सोशल मीडिया पर डाली गई कुछ पोस्ट का भी जिक्र है। इनमें कथित तौर पर एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाए हुए दिखाया गया है। बच्चे के हाथ में राष्ट्रीय ध्वज और एक तख्ती होने की बात कही गई है। इस दौरान नारे लगाए जा रहे थे और कई लोग अपने मोबाइल फोन से इसका वीडियो बना रहे थे।
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बच्चों को प्रदर्शन में लाने वालों की भूमिका की होगी जांच
शिकायतों में दावा किया गया है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी सीजेपी से कथित तौर पर जुड़े कुछ लोगों ने बच्चों को प्रदर्शन में शामिल किया। एनएचआरसी ने कहा कि ऐसे आरोपों की स्थिति में आयोजकों या समन्वयकों, बच्चों के साथ मौजूद वयस्कों और उन सभी लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है, जिन्होंने बच्चों को सभा में लाया, उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित किया, प्रोत्साहित किया या उनकी भागीदारी में किसी तरह मदद की। आयोग ने साफ किया कि मामला सिर्फ इतना नहीं है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में बच्चे मौजूद थे। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सवाल भी उठता है कि क्या बच्चों की कम उम्र और उनकी संवेदनशील स्थिति को जानते हुए उन्हें प्रदर्शन में योजनाबद्ध तरीके से शामिल किया गया।
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चैट और समूह में पहले से चर्चा का भी आरोप
शिकायतों में कथित समूह और चैट चर्चाओं का भी हवाला दिया गया है। दावा है कि इन बातचीत में प्रदर्शन की योजना और उसे लेकर समन्वय पर चर्चा हुई थी और नाबालिगों की भागीदारी का मुद्दा पहले से उठाया गया था। इन शिकायतों में खास तौर पर आरोप लगाया गया है कि बच्चों को इस सोच के साथ शामिल करने की चर्चा हुई कि पुलिस शायद नाबालिगों को हिरासत में नहीं लेगी। एनएचआरसी ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है, तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या बच्चों की नाबालिग स्थिति का जानबूझकर इस तरह इस्तेमाल करने की कोशिश की गई, जिससे पुलिस की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके या उसे सीमित किया जा सके।

एनएचआरसी ने माना, मामला सिर्फ प्रदर्शन तक सीमित नहीं
एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिकायत का संज्ञान लिया है। आयोग को इस मामले में सेवा न्याय उत्थान फाउंडेशन और एक अन्य संगठन की ओर से भी शिकायतें मिली हैं। आयोग ने कहा कि मामला केवल किसी सार्वजनिक सभा में बच्चों की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह बच्चों को उनकी उम्र और संवेदनशीलता की जानकारी होने के बावजूद योजनाबद्ध तरीके से जुटाने या उनका इस्तेमाल करने से जुड़ी गंभीर चिंता पैदा करता है। एनएचआरसी ने यह भी कहा कि बच्चों का इस्तेमाल कथित तौर पर पुलिस की वैध कार्रवाई से बचाव के लिए ढाल के तौर पर किया गया हो सकता है। इसके अलावा, प्रदर्शन के बाद उनकी तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाए जाने से उनकी निजता और गरिमा पर भी सवाल उठता है।

बच्चों की सुरक्षा और निजता को लेकर चिंता
आयोग के मुताबिक, इन आरोपों में बच्चों की गरिमा, सुरक्षा, निजता, संरक्षण और संभावित शोषण को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आती हैं। इसलिए मामले की तत्काल जांच जरूरी है। एनएचआरसी ने कहा कि पूरे मामले को बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों के तहत देखा जाना चाहिए। इसमें किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के प्रावधान भी शामिल हैं। आयोग ने विशेष रूप से इस कानून की धारा 75 और 83(2) का उल्लेख किया है।

आयोजकों और साथ मौजूद वयस्कों की भूमिका पर भी नजर
एनएचआरसी ने कहा कि उन लोगों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए जिनके पास बच्चों की वास्तविक देखरेख या नियंत्रण था। इसके अलावा आयोजकों, बच्चों के साथ मौजूद वयस्कों और ऐसे किसी भी वयस्क समूह की भूमिका भी जांच के दायरे में होनी चाहिए, जिस पर बच्चों को प्रदर्शन में लाने, प्रेरित करने, मदद करने या उनका इस्तेमाल करने की योजना बनाने का आरोप है। आयोग ने कहा कि उसके सामने रखे गए आरोप पहली नजर में गंभीर बाल अधिकार और मानवाधिकार चिंता को दर्शाते हैं। इसी आधार पर उसने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत तत्काल हस्तक्षेप जरूरी माना है।

मुंबई पुलिस, एमईआईटीवाई और एक्स को नोटिस
इसके बाद एनएचआरसी की रजिस्ट्री को मुंबई के पुलिस आयुक्त, एमईआईटीवाई के सचिव, भारत के लिए एक्स कॉर्प के शिकायत अधिकारी और महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। सभी संबंधित अधिकारियों से नोटिस मिलने की तारीख से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेज आयोग के सामने पेश करने को कहा गया है।

बच्चे की पहचान सामने न आए, इसका रखना होगा ध्यान
एनएचआरसी ने मुंबई पुलिस आयुक्त, एमईआईटीवाई सचिव और एक्स कॉर्प को निर्देश दिया है कि पूरी कार्रवाई के दौरान बच्चे या बच्चों की पहचान, निजता, गरिमा और उनके सर्वोत्तम हितों की रक्षा की जाए। आयोग ने यह भी कहा है कि नोटिस के बाद होने वाली किसी भी कार्रवाई के कारण बच्चों की पहचान अनावश्यक रूप से दोबारा सामने नहीं आनी चाहिए और उनकी तस्वीरों या अन्य पहचान संबंधी सामग्री का और प्रसार नहीं होना चाहिए।

महाराष्ट्र सरकार को बच्चों की देखभाल सुनिश्चित करने का निर्देश
महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया गया है कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों के बचाव, देखभाल और संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यानी अगर मामले की जांच में किसी बच्चे को संरक्षण या सहायता की जरूरत सामने आती है, तो उसके लिए कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाने होंगे।

संज्ञेय अपराध मिला तो तुरंत एफआईआर
मुंबई पुलिस आयुक्त को मामले की जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। एनएचआरसी ने कहा है कि अगर जांच के दौरान किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने की जानकारी सामने आती है, तो जहां जरूरी हो वहां तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। पुलिस को कथित समूह या चैट में हुई बातचीत और प्रदर्शन की योजना व समन्वय से संबंधित सभी सामग्री को हासिल करने, सुरक्षित रखने और फोरेंसिक जांच कराने के लिए भी कहा गया है।

डिजिटल सबूत तुरंत सुरक्षित करने का निर्देश
एनएचआरसी ने मुंबई पुलिस को मामले से जुड़े डिजिटल सबूत तत्काल सुरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एक्स और दूसरे संबंधित सोशल मीडिया मंचों से भी जरूरी जानकारी मांगी जाएगी आयोग ने कहा है कि डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखना जरूरी है, ताकि बाद में यह पता लगाया जा सके कि कथित पोस्ट किस खाते से किए गए, कब किए गए और उनसे संबंधित अन्य तकनीकी जानकारी क्या है।


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एक्स से खाते और तकनीकी जानकारी सुरक्षित रखने को कहा
एक्स को कथित आपत्तिजनक सामग्री और उससे जुड़े खातों का पूरा डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। इसमें खाते से जुड़ी जानकारी, पोस्ट के यूआरएल और पोस्ट आईडी, समय की जानकारी, पंजीकरण और लॉग-इन से जुड़ी आईपी जानकारी तथा अन्य प्रासंगिक मेटाडेटा शामिल हैं। एनएचआरसी ने कहा है कि इस डिजिटल साक्ष्य को तुरंत संरक्षित किया जाए, ताकि जांच के दौरान संबंधित सामग्री और उसके स्रोत की पड़ताल की जा सके। इस मामले पर सीजेपी की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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