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खबरों के खिलाड़ी: एसआईआर, ईसी की कार्यशैली पर बवाल; विशेषज्ञों ने बताया- क्यों उठ रहे विपक्षी एकजुटता पर सवाल
Sat, 03 Oct 2026 09:03 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 03 Oct 2026 09:03 PM IST
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खबरों के खिलाड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
देशभर में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर विवाद और दो चुनाव आयुक्तों की तरफ से चुनाव आयोग की कार्यशैली पर आपत्ति जताए जाने की रिपोर्ट्स के बाद देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दलों से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी जैसे संगठनों ने सीईसी के खिलाफ मोर्चा छेड़ दिया है और विरोध तेज करने के संकेत दिए हैं। इस बार खबरों के खिलाड़ी में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, संस्थागत जवाबदेही, वोटर लिस्ट से नाम कटने और विपक्षी गठबंधन की रणनीतिक चुनौतियों पर चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर और पूर्णिमा त्रिपाठी ने अपना विश्लेषण सामने रखा।
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पूर्णिमा त्रिपाठी: जब विपक्ष ने विरोध प्रदर्शन शुरू किए और जनता सड़कों पर उतरी, तब जाकर चुनाव आयोग ने प्रक्रियात्मक गलतियों को सुधारना शुरू किया। 20 राज्यों में छूटे हुए योग्य मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान (स्पेशल ड्राइव) चलाना और फॉर्म 6 के फॉर्मेट में किए गए बदलावों को वापस लेना इस बात का प्रमाण है कि वैध मतदाताओं के नाम काटे गए थे।
वोटर लिस्ट से नाम कटने का असर आम नागरिकों के डोमिसाइल और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ रहा है, जिससे यह मुद्दा केवल राजनीतिक न रहकर जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। वहीं, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे की बैठकों में अनुपस्थिति गठबंधन की आंतरिक दरारों और क्षेत्रीय मजबूरियों को उजागर करती है।
वोटर लिस्ट से नाम कटने का असर आम नागरिकों के डोमिसाइल और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ रहा है, जिससे यह मुद्दा केवल राजनीतिक न रहकर जन-आंदोलन का रूप ले रहा है। वहीं, अखिलेश यादव और उद्धव ठाकरे की बैठकों में अनुपस्थिति गठबंधन की आंतरिक दरारों और क्षेत्रीय मजबूरियों को उजागर करती है।
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समीर चौगांवकर: हालिया रिपोर्ट्स में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों (संधू व जोशी) के बीच मतभेदों की खबर आने के बाद भी चुनाव आयोग की चुप्पी ने सार्वजनिक संशय को गहरा किया है। आयोग देश की जनता के प्रति जवाबदेह है, इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को एक साथ आकर साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए थी और सर्वदलीय बैठक बुलाकर विपक्ष के सवालों का पारदर्शी जवाब देना चाहिए था। भाजपा का अपना पक्ष रखना स्वाभाविक है, क्योंकि वे दतिया, तेलंगाना, हिमाचल और केरल जैसे चुनाव हारे भी हैं।
इस मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता पर यही कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कोई साझा ढांचा या संयोजक तय न होना विपक्षी गठबंधन की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनी हुई है।
इस मुद्दे पर विपक्ष की एकजुटता पर यही कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कोई साझा ढांचा या संयोजक तय न होना विपक्षी गठबंधन की सबसे बड़ी रणनीतिक कमजोरी बनी हुई है।
विनोद अग्निहोत्री: एसआईआर, फॉर्म 6 में बदलाव और चुनाव आयुक्तों के मतभेद आपस में जुड़े मुद्दे हैं, जिनकी सीधी जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बनती है। बिहार में चुनाव से ठीक पहले एसआईआर लागू करने और तार्किक विसंगतियों के चलते 27 लाख लोगों के नाम कटना एक गंभीर प्रक्रियागत उल्लंघन है। फॉर्म 6 में अतिरिक्त जानकारी या एनेक्स्चर जोड़ने का अधिकार संसद का है, जिसे चुनाव आयोग खुद से नहीं बदल सकता।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित एडीआर रिपोर्ट को देखा जाए तो सामने आता है कि 300 से अधिक सीटों पर पड़े वोट और गिने गए वोटों में विसंगति दर्ज की गई थी। सरकार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर नफा-नुकसान का मूल्यांकन कर रही है; यदि यह विरोध प्रदर्शन नीट आंदोलन की तरह व्यापक जन-आंदोलन बनता है, तो सरकार कदम उठाने पर मजबूर हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित एडीआर रिपोर्ट को देखा जाए तो सामने आता है कि 300 से अधिक सीटों पर पड़े वोट और गिने गए वोटों में विसंगति दर्ज की गई थी। सरकार ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर नफा-नुकसान का मूल्यांकन कर रही है; यदि यह विरोध प्रदर्शन नीट आंदोलन की तरह व्यापक जन-आंदोलन बनता है, तो सरकार कदम उठाने पर मजबूर हो सकती है।