फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CJI U U Lalit says COVID-19 pandemic taught us to adapt change and modernise ourselves

Paperless Court: CJI बोले- कोरोना ने हमें बनाया आधुनिक, जस्टिस चंद्रचूड़ ने अदालतों के डिजिटलीकरण पर दिया जोर

Sat, 17 Sep 2022 07:50 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 17 Sep 2022 07:50 PM IST
सार

सीजेआई यूयू ललित ने कहा कि कोरोना महामारी ने हमें खुद को परिस्थिति अनुकूल  बदलना और आधुनिक बनाना सिखाया है। प्रौद्योगिकी के लाभ न केवल देखने के लिए बल्कि अपनी जीवन शैली में आत्मसात करने के लिए भी हैं।

विज्ञापन
CJI U U Lalit says COVID-19 pandemic taught us to adapt change and modernise ourselves
सीजेआई यूयू ललित - फोटो : ANI

विस्तार

चीफ जस्टिस यू यू ललित ने शनिवार को ओडिशा के 30 जिलों में पेपरलेस अदालतों का उद्घाटन किया। इस मौके पर अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने हमें बहुत कुछ सिखाया है। महामारी ने हमें खुद को बदलना और आधुनिक बनाना सिखाया है। उन्होंने आगे कहा कि तकनीकी प्रगति के कई फायदे हैं। तकनीकी रुप से विकसित होने का परिणाम है कि अब देश के सबसे दूर के हिस्से में बैठे एक आम आदमी को भी न्याय मिल सकता है। इस मौके पर सीजेआई ललित के साथ न्यायमूर्ति एम आर शाह, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एस मुरलीधर भी मौजूद रहे। 

विज्ञापन


सीजेआई ललित ने तकनीक के प्रयोग पर दिया जोर
अपने संबोधन में सीजेआई यूयू ललित ने आगे कहा कि कोरोना महामारी ने हमें खुद को परिस्थिति अनुकूल  बदलना और आधुनिक बनाना सिखाया है। प्रौद्योगिकी के लाभ न केवल देखने के लिए बल्कि अपनी जीवन शैली में आत्मसात करने के लिए भी हैं। उन्होंने कहा कि 'मेरा पालन-पोषण ऐसे माहौल में हुआ है, जहां पुस्तकालय और पुस्तकों को भौतिक रूप में देखने की संस्कृति थी। मैं तकनीक के मामले में अभी भी खुद को नर्सरी स्कूल में मानता हूं।'
विज्ञापन


न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ बोले- पेपरलेस अदालतें पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहतर 
इस अवसर पर न्यायमूर्ति एम आर शाह के साथ मौजूद न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि प्रौद्योगिकी केवल बौद्धिक वर्ग के लिए नहीं है, यह उन सभी के लिए है जिनके लिए न्याय प्रदान करने का इरादा है। उन्होंने कहा कि पेपरलेस अदालतें वकीलों के लिए भी कीमती समय की बचत करेंगी। साथ ही ये अदालतें पर्यावरण की दृष्टि से भी बेहतर हैं, जैसा कि इनके नाम से ही पता चलता है  कि इनका उद्देश्य कागज की खपत को कम करना है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि एक अनुमान है कि भारतीय न्यायिक प्रणाली में हर साल अरबों पेपर शीट नहीं तो लाखों शीट्स का प्रयोग तो होता ही है। ओडिशा में पेपरलेस अदालतों का उद्घाटन निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करेगा कि यह संख्या कम हो। उन्होंने पेपरलेस अदालतों के नुक्साल की बात करते हुए कहा कि इसका एक मामूली सा नुकसान यह होगा कि अब नए वकीलों अपनी रोजाना होने वाली उस प्रैक्टिस से वंचित हो जाएंगे जो वे अदालती कार्यवाही के कागजी विवरण से करते थे। 

स्थापित किए जा रहे ई-सेवा केंद्र स्थापित 
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि डिजिटल विभाजन को पहचानना और इस अंतर को पाटने के लिए कदम उठाना अनिवार्य है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अदालती प्रक्रिया का डिजिटलीकरण किसी भी तरह से आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने बताया कि विभिन्न ई-योजनाओं के साथ वकीलों और वादियों की सहायता के लिए उच्च न्यायालयों और प्रत्येक राज्य में एक जिला न्यायालय में ई-सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। 

उन्होंने आगे कहा कि यह सच है कि हममें से कई लोग प्रौद्योगिकी के उपयोग से अपरिचित हो सकते हैं और इसलिए अदालती कार्यवाही में इसका उपयोग करने में असहज हो सकते हैं, लेकिन प्रौद्योगिकी को सीखना उतना मुश्किल नहीं है जितना कि यह शुरू में लग सकता है। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए सभी स्तरों पर अदालतों को डिजिटल क्षमताओं से लैस करने की जरूरत है। 
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने आगे कहा कि अदालतों का डिजिटलीकरण न केवल हमारी न्याय वितरण प्रणाली को संकट से बचाने में मदद करेगा बल्कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि न्याय प्रक्रिया पारदर्शी, सुलभ और कम लागत वाली हो। 


न्यायमूर्ति एम आर शाह ने की अदालतों में प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की अपील 
वहीं, इस मौके पर न्यायमूर्ति एम आर शाह ने कहा कि लागत के मामले में पेपरलेस कम्युनिकेशन बेजोड़ है। इससे खर्चों में कमी आती है। उन्होंने सभी हितधारकों से अदालतों में प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हमें बदलते समय के साथ खुद को ढालकर इस अवसर पर पहुंचना चाहिए। हर किसी को समय और तकनीक के साथ बदलना होगा। अदालतों में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पारदर्शिता आएगी और न्याय के त्वरित प्रशासन को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed