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SC: OROP- स्वीकार नहीं की जाएंगी पेंशन वृद्धि सिफारिशें- केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

Thu, 05 Dec 2024 10:59 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 05 Dec 2024 10:59 AM IST
सार

जस्टिस मनमोहन के शपथ ग्रहण के साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जिसमें प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 है।

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CJI Sanjiv Khanna administers oath of office to Delhi HC Chief Justice Manmohan as Supreme Court judge.
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने बताया कि उसने वन रैंक वन पेंशन योजना (ओआरओपी) के अनुसार सेना के सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों की पेंशन में 10 फीसदी की वृद्धि करने की सिफारिशों को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। शीर्ष अदालत कोच्चि स्थित सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के सात दिसंबर, 2021 के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र की अपील पर सुनवाई कर रही थी। एएफटी के आदेशानुसार, केंद्र सरकार को सेवानिवृत्त नियमित कैप्टनों को देय पेंशन पर निर्णय लेना था।

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सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस मनमोहन की पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि हम सिफारिशों को स्वीकार नहीं करेंगे। इसके बाद पीठ ने एम गोपालन नायर समेत सेवानिवृत्त सेना कैप्टनों के वकील से कहा कि वे सिफारिशों को स्वीकार न किए जाने को चुनौती दें, क्योंकि ऐसे मामलों में समय की बहुत अहमियत होती है। ये कैप्टन बढ़ी हुई पेंशन के लिए लड़ रहे हैं। पूर्व सैन्य अधिकारियों के वकील ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा। पीठ ने समय देते हुए अगली सुनवाई 12 दिसंबर तय कर दी।

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'अनावश्यक': सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाईकोर्ट के आदेश को किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मणिपुर हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें सीबीआई को फरार बलात्कार के दोषी को खोजने और पेश करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एजेंसी को इस कार्य से मुक्त करते हुए कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश अनावश्यक था। "हमें लगता है कि सीबीआई द्वारा किया गया अनुरोध वास्तविक है, खासकर तब जब राज्य ने दोषी का पता लगाने के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है। इसलिए, हमें लगता है कि हाईकोर्ट द्वारा सीबीआई को दिए गए निर्देश अनावश्यक थे। इसलिए, निर्देश खारिज किए जाते हैं।

SCBA ने CJI से सुप्रीम कोर्ट के गलियारों से कांच के विभाजन हटाने का अनुरोध किया

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना से अनुरोध किया कि वे एयर कंडीशनिंग ग्लास विभाजन को हटा दें और सुप्रीम कोर्ट के गलियारों के ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने के लिए मूल लेआउट को बहाल करें। सीजेआई को लिखे पत्र में, एससीबीए ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पुराने न्यायाधीशों की लाइब्रेरी, जिसे अब संग्रहालय में बदल दिया गया है, को बार निकाय को अपने सदस्यों की सुविधा के लिए एक ई-लाइब्रेरी, पारंपरिक पुस्तकालय, लाउंज, परामर्श कक्ष और कैफेटेरिया स्थापित करने के लिए आवंटित किया जाएगा।

पत्र में कहा गया है, "हम आपसे सम्मानपूर्वक अनुरोध करते हैं कि संग्रहालय को उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र से कम सुरक्षा वाले क्षेत्र में स्थानांतरित करने और एससीबीए को प्रस्तावित ई-लाइब्रेरी, पारंपरिक पुस्तकालय, लाउंज, परामर्श कक्ष और कैफेटेरिया की स्थापना के लिए खाली स्थान आवंटित करने पर विचार करें, ताकि एससीबीए सदस्यों की तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा सके।" इसमें कहा गया है कि एयर कंडीशनिंग ग्लास पैनल के कारण गलियारों में जगह काफी कम हो गई है, जिससे बार के सदस्यों, पंजीकृत क्लर्कों, प्रशिक्षुओं और वादियों के लिए घूमना मुश्किल हो गया है, खासकर व्यस्त समय के दौरान। एससीबीए ने कहा कि हाल ही में ग्लास पैनल में दरारें आ गई हैं, जिससे कोई अप्रिय घटना या चोट लग सकती है और हाल ही में जोड़े गए ग्लास के कारण ताजी हवा और सूरज की रोशनी की उपलब्धता गंभीर रूप से सीमित हो गई है। पत्र में कहा गया है, इसके अतिरिक्त, हम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित करने के लिए ग्लास विभाजन को हटाने और गलियारों के मूल लेआउट को बहाल करने का अनुरोध करते हैं।
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SC-HC के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं- सरकार

केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने साथ ही यह भी रेखांकित किया कि न्यायाधीशों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद के कार्यों के लिए संविधान में किसी भी ‘कूलिंग ऑफ’ अवधि का कोई उल्लेख नहीं है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 साल की उम्र में जबकि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं। जिला न्यायाधीश 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।

विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकार ने उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के बराबर करने के लिए लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया था। लेकिन विधेयक को सदन में विचार के लिए नहीं लाए जाने के कारण यह निरस्त हो गया।

प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्न पूछते हुए आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों को कार्यकारी और राजनीतिक भूमिकाएं दी गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ सेवानिवृत्ति न्यायाधीश सदस्य के रूप में राज्यसभा में आते हैं तो कुछ सेवानिवृत्ति के बाद राज्यपाल बनते हैं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनमोहन को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई। सर्वोच्च अदालत में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह के दौरान न्यायमूर्ति मनमोहन को पद की शपथ दिलाई गई।

जस्टिस मनमोहन के शपथ ग्रहण के साथ ही शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है, जिसमें प्रधान न्यायाधीश भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 है। उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने 28 नवंबर को न्यायमूर्ति मनमोहन को शीर्ष न्यायालय में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।

आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, राष्ट्रपति दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन को भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करते हैं। उनके नाम की सिफारिश करते समय शीर्ष कोर्ट के कोलेजियम ने अपने बयान में कहा था कि सिफारिश के वक्त इस तथ्य को ध्यान में रखा है कि वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय की पीठ में दिल्ली उच्च न्यायालय के केवल एक न्यायाधीश का प्रतिनिधित्व है।

जस्टिस मनमोहन के बारे में जानिए
जस्टिस मनमोहन हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की संयुक्त अखिल भारतीय वरिष्ठता में दूसरे क्रम पर थे। वे दिल्ली उच्च न्यायालय में सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश थे। उन्हें 13 मार्च 2008 को दिल्ली उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वे 29 सितंबर, 2024 से यहां मुख्य न्यायाधीश पद पर कार्यरत थे। उन्हें नौ नवंबर 2023 को दिल्ली उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। उन्होंने 1987 में कैम्पस लॉ सेंटर, दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद वकील के रूप में पंजीकरण कराया।

जानेमाने शख्स ने जस्टिस मनमोहन के पिता
जस्टिस मनमोहन दिवंगत जगमोहन के पुत्र हैं, जो एक नौकरशाह से राजनेता बने थे। जगमोहन ने तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य के राज्यपाल और दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में भी कार्य किया था। कोर्ट में न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है, जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।
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