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देश की अदालतों में 50 साल से अटके मामलों की संख्या 1000 से ज्यादा : सीजेआई गोगोई

Sun, 04 Aug 2019 09:11 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी Published by: Gaurav Pandey Updated Sun, 04 Aug 2019 09:11 PM IST
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CJI Ranjan Gogoi in Assam, more than a thousand cases are pending in Courts of India
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (फाइल फोटो)

गुवाहाटी उच्च न्यायालय के ऑडिटोरियम की यहां आधारशिला स्थापना कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कानून व्यवस्था समेत कई मामलों पर बात की। उन्होंने कहा कि देश की अदालतों में एक हजार से अधिक मामले 50 साल से लंबित हैं। इसके साथ ही दो लाख से अधिक ऐसे मामले हैं जो 25 साल से लंबित हैं। गोगोई ने यह भी कहा कि करीब 90 लाख लंबित दीवानी मामलों में से 20 लाख से अधिक ऐेसे मामले हैं जिनमें अभी तक सम्मन तक तामील नहीं हुआ है।

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गोगोई ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अरूप कुमार गोस्वामी को निर्देश दिया कि वह असम में लंबे समय से लंबित इस तरह के मामलों का जल्द निपटारा करें। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने 10 जुलाई को विभिन्न उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को संबोधित किया था और उनसे अन्य विषयों के साथ 50 साल तथा 25 साल पुराने मामलों को निपटाने का आग्रह किया था।

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'मौजूदा समय में दिख रहा कुछ लोगों का आक्रामक बर्ताव'

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मौजूदा वक्त में कुछ लोगों और समूहों का आक्रामक और लापरवाही भरा बर्ताव देखने को मिल रहा है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के घटनाक्रम महज अपवाद हैं और देश की विधिक संस्थाओं की मजबूत परंपराओं से परास्त होंगे।

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उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इस तरह की घटनाएं अपवाद होंगी और हमारी संस्था की मजबूत परंपराएं और लोकाचार इस तरह के हठी घटकों के आक्रामक बर्ताव से उबरने में हमारे हितधारकों की सदैव मदद करेंगे। सीजेआई ने कहा कि सरकारी कार्यालयों या प्रतिष्ठानों के विपरीत, अदालतें इसलिये अद्वितीय हैं क्योंकि न्याय के पहिये को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिदिन कई हितधारक जुटते हैं, भले ही वे एक भी आदेश से बाध्य नहीं हों।

'हमारे फैसलों के आधार पर है जनता का अदालत पर भरोसा'

उन्होंने कहा कि आज मैं यह कहने के लिए मजबूर हूं कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को इस बात को अवश्य याद रखना चाहिए कि जनता के जिस विश्वास और भरोसे पर हमारी संस्था का अस्तित्व है, वह हमारे आदेशों और फैसलों के आधार पर बना है। सीजेआई ने यह भी कहा कि न्यायिक पदाधिकारी के रूप में चयनित होना इस प्रतिष्ठित संस्था की सेवा करने का एक अवसर है, जिसका मूल्य हमेशा कल्पना से काफी अधिक है।

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