फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   CJI Ranjan Gogoi got angry on working style of Supreme Court CJI, called it Basic mess

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की कार्यशैली पर सीजेआई ने जताई नाराजगी, कहा- बुनियादी गड़बड़ है

Thu, 25 Jul 2019 07:47 PM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Thu, 25 Jul 2019 07:47 PM IST
विज्ञापन
CJI Ranjan Gogoi got angry on working style of Supreme Court CJI, called it Basic mess
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (फाइल फोटो)

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अविलंब सुनवाई के मुकदमों के सूचीबद्ध नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट की कार्य की रजिस्ट्री की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। गुरुवार को उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में बुनियादी रूप से कुछ गड़बड़ी है। 

विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि रोजाना ऐसे वकीलों की लंबी कतार लगी होती है जो चाहते हैं कि उनका मामला सुनवाई के लिए शीघ्र सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि कोर्ट के आदेश के बावजूद उसे कार्यसूची से हटा दिया गया है।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति गोगोई तीन अक्तूबर 2018 को देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश का कार्यभार ग्रहण करने के दिन से ऐसी व्यवस्था करने का प्रयास कर रहे हैं जिससे वकीलों को शीघ्र सुनवाई के लिए अपने मामले का उल्लेख न करना पड़े और उनके मुकदमे एक निश्चित अवधि के भीतर खुद सूचीबद्ध हो जाएं।

विज्ञापन
विज्ञापन

'बहुत प्रयास करने के बावजूद दूर नहीं हो रही समस्या'

मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘मामले सूचीबद्ध कराने के लिए रोजाना वकीलों की लंबी कतार लगी रहती है। निश्चित ही इसमें (सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में) कुछ बुनियादी गड़बड़ी है। बहुत प्रयास करने के बावजूद मैं इससे निपटने में असमर्थ हूं।’ 


प्रधान न्यायाधीश ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब एक वकील ने अपने एक मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया और आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद इसे कार्यसूची से निकाल दिया गया है।

'हाईकोर्ट में 6000 मुकदमे दायर हो जाते हैं सुप्रीम कोर्ट में एक हजार भी नहीं'

पीठ ने इसके बाद इस तथ्य का उल्लेख किया कि उच्च न्यायालय में एक सप्ताह में करीब छह हजार नए मामले दायर होते हैं। उच्चतम न्यायालय में इस अवधि में करीब एक हजार मामले दायर होते हैं लेकिन इसके बाद भी शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री प्रभावी तरीके से इनका निपटारा करने में असमर्थ है।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालयों की तुलना में उच्चतम न्यायालय में मुकदमों के सूचीबद्ध होने में ज्यादा वक्त लगता है। पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की तुलना में कहीं अधिक मुकदमों पर विचार करना होगा।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘उच्च न्यायालय में हर सप्ताह छह हजार मुकदमे दायर होते हैं और अगले दिन ये सूचीबद्ध हो जाते हैं। शीर्ष अदालत में सिर्फ एक हजार मुकदमे दायर होते हैं, फिर भी सूचीबद्ध नहीं हो पाते। हम निर्देश देते हैं कि किसी भी मामले को सूची से हटाया न जाए लेकिन इसके बाद भी इन्हें हटा दिया जाता है।’ 

वकील ने मुवक्किल के स्वास्थ्य का दिया हवाला, सीजेआई ने पूछा- निरोग कौन?

वकीलों से खचाखच भरे न्यायालय कक्ष में उस समय लोगों की हंसी छूट गई जब एक अन्य वकील ने अपने मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया और कहा कि यह साल 2014 में दायर किया गया था। वकील का कहना था कि उसका मुवक्किल 72 साल का है जिसकी कभी भी मृत्यु हो सकती है।



प्रधान न्यायाधीश ने भी उसी शैली में कहा, ‘आपका अनुरोध स्पष्ट वजहों से अस्वीकार किया जाता है। उनकी दीर्घायु हो यह हमारी कामना है।’ इस पर वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल कई बीामारियों से ग्रस्त है तो मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया, ‘मुझे बताएं, कौन निरोग है?’ 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed