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किसी सिस्टम को नष्ट करना बहुत आसान, उसे बनाना मुश्किल: सीजेआई दीपक मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 16 Aug 2018 10:46 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा ने बुधवार को कहा कि किसी भी सिस्टम की आलोचना करना, उस पर हमला करना और उसे नष्ट करना बहुत आसान है, लेकिन किसी संस्थान को आगे ले जाना और अपनी निजी आकांक्षाओं को दूर रखकर उसे आगे बढ़ाना बहुत ही मुश्किल और चुनौतीपूर्ण कार्य है।
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72वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित एक समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि अगर किसी संस्थान को आगे बढ़ाना है तो हमें अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं और शिकायतों को दूर रखना होगा और उसमें सुधार के लिए तर्कसंगतता, परिपक्वता, जिम्मेदारी और सकारात्मक मानसिकता के साथ रचनात्मक कदम उठाने होंगे।
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उन्होंने कहा कि कुछ तत्व ऐसे भी होते हैं जो संस्थान को कमजोर करने का प्रयास करते हैं। लेकिन हमें कमजोर नहीं होना बल्कि एक साथ मिलकर इनके आगे झुकने से इनकार करना होगा।
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बता दें कि सीजेआई दीपक मिश्रा की इन टिप्पणियों को सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा किए गए विद्रोह के बाद उनकी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। इसी साल 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने सीजेआई दीपक मिश्रा पर महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़े केस की सुनवाई नियम और कानूनों को ताक पर रखकर किसी 'खास' को देने का आरोप लगाया था।
वहीं, इस कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पीआईएल को लेकर सुप्रीम कोर्ट को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि हम पीआईएल का सम्मान करते हैं, लेकिन कोर्ट को शासन का काम उन लोगों पर छोड़ देना चाहिए, जिन्हें जनता ने चुनकर भेजा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोर्ट को तब दखल देना चाहिए जब सरकार कुछ गलत कर रही हो।
उन्होंने कहा कि आज वक्त बदल चुका है। आम नागरिकों को पता है कि वो जब चाहें तब किसी भी राजनीतिक पार्टी को सत्ता से बेदखल कर सकते हैं। यह भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है। आज हर व्यक्ति अपने अधिकारों को जानता है, गरिमापूर्ण जीवन को समझता है। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा अधिकारों की रक्षा की है और ये पूरे देश के लिए गर्व की बात है।