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Supreme Court : आज शपथ लेंगे जस्टिस ललित, सुप्रीम कोर्ट के नए सीजेआई का इन तीन बातों पर रहेगा फोकस
Sat, 27 Aug 2022 07:04 AM IST
Amit Mandal
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sat, 27 Aug 2022 07:04 AM IST
सार
इस मौके पर निवर्तमान सीजेआई एनवी रमण ने कहा कि आम धारणा यह थी कि न्यायपालिका आम जनता से काफी दूर है, अभी भी लाखों दबे हुए लोग हैं जिन्हें न्यायिक मदद की जरूरत है।
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Designated CJI UU Lalit
- फोटो : ANI
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विस्तार
देश के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस उदय उमेश ललित आज शपथ लेंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट के काम-काज में तीन मुख्य सुधार करने का एलान किया। उन्होंने कहा, मेरा प्रयास रहेगा मामलों को सूचीबद्ध करने में पारदर्शिता हो। ऐसी व्यवस्था बना सकूं, जिसमें जरूरी मामले संबंधित पीठों के सामने स्वतंत्रता पूर्वक उठाए जा सकें। जस्टिस ललित ने कहा, प्रयत्न किया जाएगा की कम से कम एक संविधान पीठ सालभर काम करती रहे।
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जस्टिस ललित शुक्रवार को निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण के कार्यकाल के आखिरी दिन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से आयोजित विदाई समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, हमें निश्चित रूप से मामलों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया को यथासंभव स्वच्छ और पारदर्शी बनाने का प्रयत्न करना है। साथ ही, लोग जल्द ही जरूरी मामलों की त्वरित सुनवाई के मामले में भी एक स्पष्ट व्यवस्था देखेंगे।
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जहां तक तीसरे विषय का प्रश्न है, मेरा हमेशा से मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को कानूनों को पूरी स्पष्टता के साथ सामने रखना चाहिए। ऐसा करने के लिए बड़ी पीठ की जरूरत है, ताकि मुद्दे तत्काल स्पष्ट हो सकें। इसलिए हम पूरा प्रयास करेंगे कि हमारे पास पूरे साल कम से कम एक संविधान पीठ उपलब्ध हो। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में तीन सदस्यीय पीठ सबसे बड़ी होती है और किसी मामले में सांविधानिक स्थिति का फैसला करने के लिए अलग से संविधान पीठ का गठन किया जाता है।
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आज शपथ लेंगे जस्टिस ललित
जस्टिस यूयू ललित शनिवार को देश के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। वह भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश होंगे और उनका कार्यकाल सिर्फ 74 दिन का होगा। वह 8 नवंबर, 2022 को अवकाश ग्रहण करेंगे।
मैं बहुत कुछ लेकर पद छोड़ रहा हूं : जस्टिस रमण
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण का कार्यकाल शुक्रवार को समाप्त हो गया। इस मौके पर निवर्तमान सीजेआई एनवी रमण ने कहा, मैं बहुत सारी चीजें लेकर पद छोड़ रहा हूं। लंबित मुद्दा हमारे सामने चुनौती है और मैं मानता हूं कि लिस्टिंग एक ऐसा क्षेत्र है जहां मैं ज्यादा ध्यान नहीं दे सका। अपने आखिरी दिन उन्होंने कहा, सिस्टम के कामकाज में सुधार करने का एकमात्र तरीका है कि आधुनिक तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्थापित किया जाए।
देशद्रोह कानून पर रोक से लेकर सुप्रीम कोर्ट में 11 जजों की नियुक्ति का कारण बने सीजेआई रमण
सीजेआई एनवी रमण देशद्रोह कानून पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग कानून के फैसले पर पुनर्विचार, पेगासस जासूसी की जांच और लखीमपुर खीरी जैसे प्रमुख आदेशों का हिस्सा रहे। यही नहीं सीजेआई एनवी रमण ने 16 महीने के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में रिकॉर्ड 11 जजों व हाईकोर्ट में 220 से अधिक जजों की नियुक्ति समेत कई बड़े न्यायिक व प्रशासनिक फैसले लिए।
सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट जज बने
जस्टिस ललित को 2014 में सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था। इससे पहले 1971 में जस्टिस एसएम सीकरी पहले ऐसे चीफ जस्टिस थे जो सीधे बार से आए थे। महाराष्ट्र से आने वाले जस्टिस ललित का जन्म 9 नवंबर 1957 को हुआ था। उन्होंने 1983 में बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत की शुरुआत की। सिर्फ तीन साल बाद 1986 में वह दिल्ली आ गए। 13 अगस्त 2014 को उन्हें बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्त किया गया था।
निवर्तमान सीजेआई एनवी रमण बोले, अभी भी लाखों लोगों को न्याय का इंतजार
इस मौके पर निवर्तमान सीजेआई एनवी रमण ने कहा कि आम धारणा यह थी कि न्यायपालिका आम जनता से काफी दूर है, अभी भी लाखों दबे हुए लोग हैं जिन्हें न्यायिक मदद की जरूरत है और जरूरत के समय इससे संपर्क करने के लिए आशंकित हैं। अपने संवैधानिक जनादेश को पूरा करने के बावजूद, न्यायपालिका को मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिलती है जिससे लोग संविधान के बारे में ज्ञान से वंचित हो जाते हैं। जस्टिस रमण ने कहा, इन धारणाओं को दूर करना और न्यायपालिका के आसपास जागरूकता पैदा करने और विश्वास पैदा करने के माध्यम से संविधान को लोगों के करीब लाना मेरा संवैधानिक कर्तव्य था।
रो पड़े बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दवे, कहा- आप जनता के न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने सीजेआई के विदाई के मौके पर रो पड़े। भावुक दवे ने एनवी रमण को नागरिकों का न्यायाधीश बताया। दवे ने सीजेआई से कहा, आप नागरिकों के अधिकारों और संविधान को बनाए रखने के लिए सदैव खड़े हुए। जब आपने पदभार संभाला था तो मुझे संदेह था, लेकिन आपने हमारी अपेक्षाओं को पार कर लिया।