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CJI: बच्चों का यौन शोषण छिपी हुई समस्या, सीजेआई बोले- रिपोर्ट करने के लिए परिवारों को करना होगा प्रोत्साहित
Sat, 10 Dec 2022 04:38 PM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 10 Dec 2022 04:38 PM IST
सार
सीजेआई ने कहा, बाल यौन शोषण की रोकथाम और इसकी समय पर पहचान और इसके रोकथाम से जुड़े कानून बारे में जागरूकता पैदा करना अनिवार्य है। बच्चों को सुरक्षित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर सिखाया जाना चाहिए।
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न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़(फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
बच्चों के खिलाफ बढ़ रहे यौन अपराधों को लेकर एक बार फिर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने चिंता जताई हैं। उन्होंने शनिवार को एक कार्यक्रम में कहा कि बच्चों का यौन शोषण एक छिपी हुई समस्या है, पता चलने के बाद भी लोग इस पर चुप्पी साध लेते हैं। इसलिए अब राज्यों को आगे आना चाहिए और परिवारों को दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, भले ही अपराधी परिवार का सदस्य ही क्यों न हो।
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सीजेआई ने कहा, बाल यौन शोषण की रोकथाम और इसकी समय पर पहचान और इसके रोकथाम से जुड़े कानून बारे में जागरूकता पैदा करना अनिवार्य है। बच्चों को सुरक्षित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर सिखाया जाना चाहिए। वहीं बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने माता-पिता से सुरक्षित और असुरक्षित शब्द का उपयोग करने का आग्रह किया है क्योंकि अच्छे और बुरे शब्द का नैतिक प्रभाव होता है और वे दुर्व्यवहार की रिपोर्ट करने से रोक सकते हैं।
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आगे सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि कार्यपालिका को न्यायपालिका से हाथ मिलाना चाहिए ताकि यौन अपराधों को होने से रोका जा सके। लोगों को संबोधित करते हुए कहा विधायिका से पॉक्सो अधिनियम के तहत सहमति की उम्र के आसपास बढ़ती चिंता पर भी विचार करने का आग्रह किया।
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उन्होंने कहा कि आप जानते हैं कि पॉक्सो अधिनियम 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के बीच सभी यौन कृत्यों को आपराधिक बनाता है, भले ही सहमति नाबालिगों के बीच तथ्यात्मक रूप से मौजूद हो, क्योंकि कानून की धारणा यह है कि 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के बीच कोई सहमति नहीं है।