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पूर्व CJI मूल्यों से समझौते के खिलाफ: चिंता जताते हुए कहा- दुनिया में ईमानदारी-सिद्धांत छोड़ सौदेबाजी चिंताजनक

Sat, 25 Apr 2026 10:27 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 25 Apr 2026 10:27 PM IST
सार

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने वैश्विक कूटनीति में बढ़ते स्वार्थ पर चोट की है। आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ईमानदारी और न्याय अब सौदेबाजी का हिस्सा बन गए हैं, जो समाज के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने और भी कई बड़ी बातें कही हैं। 
 

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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI

विस्तार

पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने दुनिया की स्वार्थी नैतिकता पर तीखा हमला किया है। दिल्ली में लाल बहादुर शास्त्री स्मृति व्याख्यान के दौरान उन्होंने कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने बताया कि आज की दुनिया सिद्धांतों पर नहीं, बल्कि सौदेबाजी पर चल रही है।
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'टैरिफ नहीं, यह तो सौदा है'
देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आज देश एक-दूसरे से सौदेबाजी करते हैं। उनका सीधा इशारा अमेरिका और रूस के संदर्भ में था। उन्होंने कहा कि आज की भाषा यह है कि तुम रूसी तेल छोड़ो, हम टैरिफ कम कर देंगे या फिर हमारी बात नहीं मानी, तो 100% टैरिफ झेलने को तैयार रहो। उन्होंने इसे लेन-देन वाली नैतिकता का नाम दिया है।
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आपस में जुड़ी है दुनिया-चंद्रचूड़
चंद्रचूड़ ने खाड़ी देशों के तनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में कुछ भी हो, असर सब पर पड़ता है। इससे भारत के तेल बाजार पर प्रभाव पड़ता है। यहां तक कि अमेरिका के चुनाव भी इससे प्रभावित होते हैं। दुनिया अब बहुत अनिश्चित हो गई है। हर देश अब बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है।
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'ईमानदारी अब बिजनेस बन गई है'
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने समाज के गिरते स्तर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोग अब फायदे के लिए ईमानदार बनते हैं। अगर कोई देख रहा है, तभी कानून मानेंगे। अगर मेरा भला हो रहा है, तभी न्याय करेंगे। उन्होंने साफ कहा कि यह नैतिकता नहीं, बल्कि विशुद्ध व्यापार है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की सोच समाज में एक खतरनाक मिसाल कायम करती है, जहां सब कुछ मोलभाव और लाभ-हानि के तराजू पर तोला जाता है।


शास्त्री जी से सीखें निस्वार्थ भाव-चंद्रचूड़
अंत में उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री को याद किया। शास्त्री जी ने बिना मांगे इस्तीफा दे दिया था। उन्हें न पद का लालच था, न किसी इनाम की चाहत। चंद्रचूड़ ने कहा कि हमें हमेशा सही रास्ता चुनना चाहिए। भले ही सही रास्ते पर चलने में सब कुछ लुटाना पड़े।

इतना ही नहीं, पूर्व सीजेआई के रूप में चंद्रचूड़ ने न्यायपालिका की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का कर्तव्य है कि वह ऐसे सिद्धांतों को बनाए रखे जो समाज की नैतिक नींव को मजबूत करें। हालांकि, जब बाहरी दबाव या व्यावसायिक हित निर्णय लेने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करते हैं, तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर भी सवाल उठ सकते हैं।

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