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Khabaron Ke Khiladi: बंगाल में बंपर मतदान, विश्लेषकों ने बताया ममता का दबदबा रहेगा बरकरार या बदल रही बयार
Sat, 25 Apr 2026 09:03 PM IST
Kirtivardhan Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kirtivardhan Mishra
Updated Sat, 25 Apr 2026 09:03 PM IST
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खबरों के खिलाड़ी में चर्चा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में बंपर वोटिंग हुई। मतदान प्रतिशत का आंकड़ा करीब 93 तक पहुंच गया। जो पिछले चुनाव के मुकाबले 10 फीसदी से भी ज्यादा है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी बंपर वोटिंग पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, हर्षवर्धन त्रिपाठी, राकेश शुक्ल, बिलाल सब्जवारी और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
अवधेश कुमार: भाजपा ने बिहार चुनाव से पहले ही बंगाल के सारे बूथों का आकलन कर लिया था। उस आकलन में मुद्दे भी उभर कर आए थे। उसी वक्त से भाजपा ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। प्रतीकों की बात करें तो राहुल गांधी ने सिर्फ तीन जगह रैलियां की। तीनों जगहें मुस्लिम बहुल इलाके की हैं। इस बार के चुनाव में पिछले साठ साल की सबसे कम हिंसा हुई है। ये नतीजों पर भी असर डालेगा। नरेंद्र मोदी इस बार पर्सनल अटैक नहीं कर रहे हैं। झालमुड़ी से हुगली नदी तक प्रधानमंत्री का जाना भी बड़ा असर डाल सकता है।
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अवधेश कुमार: भाजपा ने बिहार चुनाव से पहले ही बंगाल के सारे बूथों का आकलन कर लिया था। उस आकलन में मुद्दे भी उभर कर आए थे। उसी वक्त से भाजपा ने अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। प्रतीकों की बात करें तो राहुल गांधी ने सिर्फ तीन जगह रैलियां की। तीनों जगहें मुस्लिम बहुल इलाके की हैं। इस बार के चुनाव में पिछले साठ साल की सबसे कम हिंसा हुई है। ये नतीजों पर भी असर डालेगा। नरेंद्र मोदी इस बार पर्सनल अटैक नहीं कर रहे हैं। झालमुड़ी से हुगली नदी तक प्रधानमंत्री का जाना भी बड़ा असर डाल सकता है।
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हर्षवर्धन त्रिपाठी: पहला चरण 152 सीटों का था। दूसरा चरण 142 सीटों का है। इन सीटों में से 2021 में भाजपा 16-17 सीट ही जीती थी। ऐसे में इस चरण में भाजपा के लिए संभावनाएं बहुत ज्यादा है। अगर दूसरे चरण में उसका प्रदर्शन 50 फीसदी के आसपास भी रहा नतीजे बदल सकते हैं। भाजपा इस चरण में 58 सीटों पर टारगेटिंग कर रही है। भाजपा पहले चरण का मोमेंटम गेन का लाभ दूसरे चरण में लेना चाहेगी। हालांकि, ममता बनर्जी का जो कद उससे हर कोई मानता है कि जब तक वो हार नहीं जाएं तब तक उन्हें हारा हुआ नहीं माना जा सकता है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: ममता बनर्जी ने शुरू से यह रणनीति अपनाई कि बंगाली अस्मिता बचाना है तो भाजपा को नहीं आने देना। उसी पर वो कायम रहीं। भाजपा की कमजोरी यह थी कि उनके पास ममता के मुकाबले कोई जमीन से जुड़ा बंगाली चेहरा नहीं था। मुझे लगता है कि एसआईआर के मुद्दे पर वोट हुआ है। बंपर वोटिंग का कारण यह भी रहा है। कुल वोटर टर्नआउट की बात है तो कुल वोटर का आकंड़ा थोड़ा बढ़ा है वो बहुत ज्यादा नहीं है।
पूर्णिमा त्रिपाठी: ममता बनर्जी ने शुरू से यह रणनीति अपनाई कि बंगाली अस्मिता बचाना है तो भाजपा को नहीं आने देना। उसी पर वो कायम रहीं। भाजपा की कमजोरी यह थी कि उनके पास ममता के मुकाबले कोई जमीन से जुड़ा बंगाली चेहरा नहीं था। मुझे लगता है कि एसआईआर के मुद्दे पर वोट हुआ है। बंपर वोटिंग का कारण यह भी रहा है। कुल वोटर टर्नआउट की बात है तो कुल वोटर का आकंड़ा थोड़ा बढ़ा है वो बहुत ज्यादा नहीं है।
राकेश शुक्ल: बंगाल का चुनाव विश्वास और डर के बीच हो रहा है। ये मैंने पहले भी बोला था। पहली बार ऐसा हुआ है कि जब ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी की तरफ से केंद्रीय गृह मंत्री को भी चुनौती दी गई। ये सभी संकेत और वोट प्रतिशत बढ़ना, वोट प्रतिशत का बढ़ने के दोनों परिणाम हो सकते हैं लाभकारी भी और हानिकारक भी। बाहर बैठा मतदाता भी पहली बार इतनी बड़ी संख्या में वहां वोट डालने पहुंचा है।
बिलाल सब्जवारी: बंगाल के चुनाव में एसआईआर जहां ममता के पक्ष में पोलराइज करता है तो ध्रुवीकरण का मुद्दा भाजपा के पक्ष में वोटर को पोलराइज करता है। यही वजह है जो वोट प्रतिशत इतना ज्यादा बढ़ा है। बंगाल के सीमावर्ती जिलों में पोलराइजेशन और बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर वोट पड़े हैं। ये टर्नआउट किस पैटर्न पर हुआ है उससे तय होगा की नतीजा कैसा रहेगा। मैं इसे किसी के पक्ष में नहीं देखता हूं बल्कि इसे एक क्लोज टाई के रूप में देखता हूं। नतीजे कुछ भी हो सकते हैं।
बिलाल सब्जवारी: बंगाल के चुनाव में एसआईआर जहां ममता के पक्ष में पोलराइज करता है तो ध्रुवीकरण का मुद्दा भाजपा के पक्ष में वोटर को पोलराइज करता है। यही वजह है जो वोट प्रतिशत इतना ज्यादा बढ़ा है। बंगाल के सीमावर्ती जिलों में पोलराइजेशन और बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर वोट पड़े हैं। ये टर्नआउट किस पैटर्न पर हुआ है उससे तय होगा की नतीजा कैसा रहेगा। मैं इसे किसी के पक्ष में नहीं देखता हूं बल्कि इसे एक क्लोज टाई के रूप में देखता हूं। नतीजे कुछ भी हो सकते हैं।
अनुराग वर्मा: वोटिंग प्रतिशत बढ़ना या घटने का अब सरकार बदलने या कायम रहने का कोई सीधा संबंध नहीं रहा है। ये पिछले चुनावों में हम देख चुके हैं। इस चुनाव से पहले भाजपा के लिए आरएसएस ने बहुत काम किया। भाजपा पूरे अंकगणित के साथ चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, ममता अपनी फेस वैल्यू पर चुनाव लड़ रही हैं।