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CJI: 'जांच एजेंसियों को शक्तियों और निजी अधिकारों के बीच बनाना होगा संतुलन', सीजेआई चंद्रचूड़ की अहम टिप्पणी
Mon, 01 Apr 2024 09:17 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 01 Apr 2024 09:17 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों के पास मौजूद तलाशी और जब्ती की शक्तियों और किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि जैसे-जैसे हमारी दुनिया डिजिटल तकनीक के विस्तार के जरिए तेजी से आपस में जुड़ती जा रही है, उतना ही सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों को नई और जटिल चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी जांच एजेंसियों के पास मौजूद तलाशी और जब्ती की शक्तियों और किसी व्यक्ति की निजता के अधिकार के बीच एक नाजुक संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। संघीय जांच एजेंसी के पहले निदेशक की स्मृति में 20वें डीपी कोहली स्मारक व्याख्यान में न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने यह बात कही है।
न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कार्यक्रम में कही यह बात
अपने संबोधन के दौरान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि खोज, जब्ती शक्तियों और व्यक्तिगत गोपनीयता अधिकारों के बीच नाजुक संतुलन कायम है। यह एक निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। उन्होंने संबोधन में इस संतुलन के मूल में उचित प्रक्रिया को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने निजी उपकरणों की अनुचित जब्ती पर कहा
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने अपने संबोधन में निजी उपकरणों की अनुचित जब्ती का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि जांच संबंधी जरूरतों और निजी गोपनीयता अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने जांच एजेंसियों से अपनी लड़ाई लड़ने के लिए भी कहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों को बहुत अधिक विस्तार से फैलाने के बजाए उन्हें उन अपराधों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो देश की सुरक्षा, आर्थिक और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।
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जांच एजेंसियों के सामने तकनीक से जुड़ी कई जटिल चुनौतियां- चंद्रचूड़
अपराध के परिदृश्य पर बोलते हुए न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी जांच एजेंसियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का इस्तेमाल करने के अलावा उनसे निपटने के लिए अपनी क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए। अपने संबोधन में न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि जैसे-जैसे हमारी दुनिया डिजिटल तकनीक के विस्तार के जरिए तेजी से आपस में जुड़ती जा रही है, उतना ही सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों को नई और कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
नए आपराधिक कानूनों की सीजेआई चंद्रचूड़ ने की तारीफ
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने ब्रिटिश काल के कानूनों को बदलने के लिए सरकार द्वारा पारित नए आपराधिक कानूनों की सोमवार को सराहना की और इसे न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम' बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। उनका उद्देश्य जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में शामिल हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की सुविधा प्रदान करना है।
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न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कार्यक्रम में कही यह बात
अपने संबोधन के दौरान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि खोज, जब्ती शक्तियों और व्यक्तिगत गोपनीयता अधिकारों के बीच नाजुक संतुलन कायम है। यह एक निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाज की आधारशिला है। उन्होंने संबोधन में इस संतुलन के मूल में उचित प्रक्रिया को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
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न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने निजी उपकरणों की अनुचित जब्ती पर कहा
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने अपने संबोधन में निजी उपकरणों की अनुचित जब्ती का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि जांच संबंधी जरूरतों और निजी गोपनीयता अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने जांच एजेंसियों से अपनी लड़ाई लड़ने के लिए भी कहा है। उन्होंने कहा कि कई मामलों को बहुत अधिक विस्तार से फैलाने के बजाए उन्हें उन अपराधों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो देश की सुरक्षा, आर्थिक और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं।
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जांच एजेंसियों के सामने तकनीक से जुड़ी कई जटिल चुनौतियां- चंद्रचूड़
अपराध के परिदृश्य पर बोलते हुए न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी जांच एजेंसियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरणों का इस्तेमाल करने के अलावा उनसे निपटने के लिए अपनी क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए। अपने संबोधन में न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि जैसे-जैसे हमारी दुनिया डिजिटल तकनीक के विस्तार के जरिए तेजी से आपस में जुड़ती जा रही है, उतना ही सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों को नई और कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
नए आपराधिक कानूनों की सीजेआई चंद्रचूड़ ने की तारीफ
भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने ब्रिटिश काल के कानूनों को बदलने के लिए सरकार द्वारा पारित नए आपराधिक कानूनों की सोमवार को सराहना की और इसे न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम' बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) निर्बाध प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। उनका उद्देश्य जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में शामिल हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की सुविधा प्रदान करना है।