किसी देश को किसी के आंतरिक मामले में दखल देने का हक नहीं, फिर भी बढ़ रही है विदेश मंत्रालय की बैचैनी
- अमेरिका को विदेश मंत्रालय ने जवाब से कराया चुप
- अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश भारत सरकार के कदम को मुस्लिम विरोधी बता रहे हैं
- जम्मू-कश्मीर में मानव अधिकार मामले को लेकर भी है मंत्रालय सतर्क
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केन्द्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जब से केन्द्र सरकार में संवैधानिक जिम्मेदारी संभाली है, पूरे फार्म में हैं। केन्द्रीय विदेश मंत्री बनने के बाद से एस जयशंकर भी पूरे फार्म में हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री जितनी रणनीतिक तैयारी के साथ संसद में एक के बाद एक संवेदनशील विधेयक को पारित करा रहे हैं, पूरा कैरियर कूटनीति में लगा देने वाले विदेश मंत्री, विदेश सचिव विजय गोखले और उनकी पूरी टीम उतनी ही सतर्कता से दुनिया में भारत का पक्ष रख रही है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के विदेश मंत्रालय को लोकसभा में पारित हुए नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर कूटनीतिक सीख दे दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की चिंता और उनके प्रयास में कोई कमी नहीं आई है।
अमेरिका के विदेश मंत्रालय को क्या कहा?
भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को टका सा जवाब दिया है। मंत्रालय के जवाब का लब्बोलुआब यह है कि किसी भी देश के आंतरिक मामले में किसी दूसरे देश को हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। भारत ने ठीक उसी तरह से अमेरिकी विदेश मंत्रालय को जवाब दिया है, जैसे कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य की वैधानिक स्थिति में बदलाव के बाद दिया था। अमेरिका के धार्मिक आयोग ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2019 पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसका कोई भी धार्मिक परीक्षण किसी भी राष्ट्र के लोकतांत्रिक मूल्यों के मूल सिद्धांत को कमजोर कर सकता है।
अमेरिकी धार्मिक आयोग के इस सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने उसी लहजे में जवाब दिया है। रवीश कुमार ने कहा है कि अमेरिकी धार्मिक आयोग का बयान न तो सही है और न ही इसकी कोई जरूरत थी। रवीश कुमार ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) किसी भी धर्म के नागरिक से उसकी नागरिकता को नहीं छीनता। इसके साथ-साथ रवीश कुमार ने याद दिलाया कि अमेरिका सहित दुनिया के तमाम देशों को अपने देश की नागरिकता को लेकर मानदंड करने का अधिकार है। रवीश कुमार ने कहा कि भारत ने यह फैसला मानव अधिकार को मजबूती देने के उद्देश्य से लिया है। यह फैसला भारत में आए उन अल्पसंख्यक नागरिकों के लिए है, जो पहले से भारत में आकर रह रहे हैं।
फिर भी क्या चिंता है भारत की?
अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश भारत सरकार के तमाम कदम को मुस्लिम विरोधी मान रहे हैं। उनका मानना है कि भारत में सांप्रदायिक आधार को ध्यान में रखकर सरकार निर्णय ले रही है। भारत में तीन तलाक कानून, जम्मू-कश्मीर राज्य के वैधानिक बदलाव, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, नागरिकता (संशोधन) विधेयक समेत तमाम कदम इसी उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इसके बाबत दुनिया के तमाम देशों को विश्वास में लेना पड़ रहा है। बताते हैं जम्मू-कश्मीर की वैधानिक स्थिति में बदलाव का विधेयक लाने के समय से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के देशों समेत तमाम दुनिया के देशों के सामने स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी। बताते हैं अभी विश्व स्तर पर सवालों की संख्या कम नहीं हुई है। अमेरिका से लेकर कई देशों की अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सवालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार पर दे रहे हैं जवाब
विदेश मंत्रालय के अधिकारी अभी भी जम्मू-कश्मीर में मानव अधिकार की स्थिति को लेकर लगातार जवाब दे रहे हैं। बताते हैं जम्मू-कश्मीर में सहूलियतों, इंटरनेट सेवाओं की बहाली समेत तमाम सवालों का जवाब देना पड़ रहा है। विदेशी मीडिया लगातार जम्मू-कश्मीर में मानव अधिकार के मुद्दे को लेकर सवाल उठा रही है। सूत्र बताते हैं नागरिकता (संशोधन)विधेयक ने भी थोड़ा काम बढ़ा दिया है। हालांकि मंत्रालय ने इसे देश में मानव अधिकार के मूल्यों को बढ़ावा देने से जोड़ा है। भारत दुनिया के देशों को बता रहा है कि उसके देश में पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए ऐसे तमाम हिन्दू, जैन, बौद्ध, ईसाई समेत अन्य लोग हैं, जो शरणार्थी हैं और किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। देश की सरकार इन सभी के जीवन मूल्यों के स्तर को अच्छा बनाने के लिए इस कानूनी बदलाव के जरिए उन्हें भारत की नागरिकता देना चाहती है।
कूटनीति के मास्टर हैं एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर कूटनीति के मास्टर हैं। विदेश सेवा के अधिकारी, पूर्व विदेश सचिव से विदेश मंत्री बने एस जयशंकर के बारे में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें कुछ भी ब्रीफ करने की आवश्यकता नहीं होती। उन्हें पहले से पता होता है कि किस स्थिति में किस तरह की लाइन लेनी है। कूटनीतिक रूप से क्या सही है और भारत का पक्ष क्या होना चाहिए। बताते हैं इसके विदेश मंत्री की सतर्कता और कूटनीतिक दक्षता के कारण भारत इस तरह के तमाम मामलों को आसानी से निबटाने में सफल है।