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सरदार पटेल मिलेंगे तो पीएम मोदी से बहुत नाराज होंगे, राज्यसभा में बोले आनंद शर्मा

Wed, 11 Dec 2019 01:35 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Wed, 11 Dec 2019 01:35 PM IST
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Citizenship Amendment Bill Anand Sharma Says Sardar Patel will be very angry with PM Modi
राज्यसभा में बोलते आनंद शर्मा - फोटो : ANI

नागरिकता संशोधन विधेयक का कांग्रेस ने राज्यसभा में भी जमकर विरोध किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि अगर सरदार पटेल कभी पीएम मोदी से मिलेंगे तो बहुत नाराज होंगे, महात्मा गांधी भी जरूर दुखी होंगे।

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उन्होंने कहा कि केवल महात्मा गांधी, सरदार पटेल का नाम लेना संभव नहीं है। मुझे नहीं पता जीवन में क्या होता है। सुना है हमारे धर्म में पुनर्जन्म को मानते हैं। तो बुजुर्ग कभी मिलते हैं... अगर सरदार पटेल कभी आपके प्रधानमंत्री जी को मिल लिए तो बहुत नाराज होंगे। यह मैं कह सकता हूं। 
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गांधी जी तो दुख होंगे ही कि मेरे 150 साल मना रहे हो और ऐसा करते हो। गांधी जी का चश्मा और उनका नाम विज्ञापन के लिए नहीं है। मेरा आग्रह है उनके चश्मे से हिंदुस्तान को देखो, समाज को और दुनिया को देखो। आपका नागरिकता बिल उससे टकराता है।

टू नेशन थ्योरी (द्विराष्ट्र सिद्धांत) कांग्रेस की नहीं, सावरकर ने दी थी
उन्होंने कहा कि आपने (अमित शाह) इतिहास लिखने का किसी को प्रॉजेक्ट दिया है तो कृपा कर ऐसा न करें। औपचारिक रूस से सावरकर ने घोषणा की थी कि जिन्ना के टू नेशन थ्योरी (द्विराष्ट्र सिद्धांत) से मुझे कोई आपत्ति नहीं है। यह कांग्रेस ने नहीं दी थी।

हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने बंटवारे का समर्थन किया
आपने बंटवारे का दोष कांग्रेस के उन नेताओं पर लगाया जिन्होंने सालों जेल में बिताए। हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग ने बंटवारे का समर्थन किया, कांग्रेस तो हमेशा उसके विरोध में थी। आप कहते हैं राजनीति नहीं होनी चाहिए तो यह राजनीति भी नहीं होनी चाहिए। 

महात्मा गांधी के नेतृत्व में वह लड़ाई लड़ी गई उसमें पटेल, सुभाष चंद्र बोस तक शामिल हैं। उनके योगदान को नकारना इतिहास को नकारना है। आपको उनके विचारों से जो भी परहेज हो, लेकिन उनके योगदान को न नकारें।


बंटवारे की पीड़ा पूरे देश को
बंटवारे की पीड़ा पूरे देश को थी। क्या आज हम यह कथन कहना चाहते हैं कि संविधान निर्माताओं को नागरिकता को लेकर कोई समझ नहीं थी। बंटवारे की पीड़ा से जो लाखों लोग भारत आए क्या उन्हें सम्मान नहीं मिला? भारत में दो-दो प्रधानमंत्री भी हुए डॉक्टर मनमोहन सिंह और आई के गुजराल।

इतिहास इसे किस दृष्टि से देखेगा, यह वक्त बताएगा
सरकार का कथन है कि सबसे बातचीत हो चुकी है मैं इससे सहमत नहीं हूं। आपने कहा कि यह ऐतिहासिक बिल है तो इतिहास इसे किस दृष्टि से देखेगा, यह वक्त बताएगा। हम इसका विरोध करते हैं। विरोध का कारण राजनैतिक नहीं संवैधानिक है, नैतिक है। यह बिल संविधान की मूल आत्मा पर आघात है। यह हमारे गणराज्य के पवित्र संविधान की प्रस्तावना के विरुद्ध है।

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