नागरिकता कानून पर अमित शाह बोले-जितना भी विरोध कर लो, नहीं झुकेगी सरकार
नागरिकता संशोधन कानून पर मचे बवाल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने भी केंद्र का रुख स्पष्ट किया है। जामिया के बाद सीलमपुर में शुरू हुई हिंसा के बीच अमित शाह ने कहा कि पूरा विपक्ष देश की जनता को गुमराह कर रहा है।
दिल्ली में एक कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि जिसे भी राजनीतिक विरोध करना है वो करो, लेकिन मोदी सरकार विरोध से नहीं झुकेगी वह नागरिकता कानून पर अडिग है। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी। शरणार्थी भारत के नागरिक बनेंगे और सम्मान के साथ दुनिया में रहेंगे।
गृह मंत्री ने कहा, 'मैं फिर से कहना चाहता हूं कि किसी भी अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति की नागरिकता नहीं छिनने वाली है। विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।' अमित शाह ने आगे कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी से कहना चाहता हूं कि यह नेहरू-लियाकत समझौते का हिस्सा है। लेकिन 70 साल से इसे लागू नहीं किया गया क्योंकि आप अपना वोट बैंक तैयार करना चाहते थे। हमारी सरकार ने इस समझौते को लागू किया है और लाखों, करोड़ों लोगों को नागरिकता दी है।'
Union Home Minister Amit Shah: I want to say to Congress party that this was part of Nehru-Liaquat pact but was not implemented for 70 years because you wanted to make vote bank. Our government has implemented the pact and given citizenship to lakhs and crores of people. https://t.co/Fkax9foxDh
— ANI (@ANI) December 17, 2019
इससे पहले गृह मंत्रालय के सूत्रों ने भी कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का किसी विदेशी को बाहर भेजे जाने से कोई नाता नहीं है। किसी भी विदेशी को वापस भेजने के लिए पहले से तय प्रक्रिया को ही लागू किया जाएगा। यह कानून किसी भारतीय पर लागू नहीं होता।
Ministry of Home Affairs (MHA) sources: #CitizenshipAmendmentAct has nothing to do with deportation of any foreigner. Usual deportation procedure of any foreigner will apply as per already existing acts. The Act doesn't apply for any Indian. pic.twitter.com/lahprtkpmk
— ANI (@ANI) December 17, 2019
जामिया विवाद की रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को मिली
मानव संसाधन मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि 15 दिसंबर को जामिया में हुई हिंसा की रिपोर्ट उन्हें मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय की कार्यकारी समिति ने प्रस्ताव पास किया, जिसमें न्यायिक जांच की मांग की गई है। हालांकि हमें अभी तक औपचारिक निवेदन नहीं मिला है।