नागरिकता कानून के समर्थन में आए अफगानी हिंदू, बोले- हमारा दिल भी हिंदुस्तानी
- पाकिस्तानी हिंदुओं ने पूछा, हमारे अधिकार मिलने से किसी को परेशानी क्यों?
- केंद्र सरकार को कानून पास करने पर दिया धन्यवाद
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नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर देश में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार से कानून वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच कुछ लोगों ने कानून के समर्थन में भी आवाज उठाई है। गुरुवार को महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। पांच सौ से अधिक की संख्या में एकत्रित होकर इन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पास करने के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया।
इन लोगों ने पूछा कि नागरिकता कानून से किसी वर्ग के हितों को नुकसान नहीं पहुंचता है। ऐसे में किसी को इस कानून से परेशानी क्यों होनी चाहिए? भीड़ ने बार-बार 'भारत माता की जय' और 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाए।
अफगानी सिखों के नेता ने कहा
दर्शन सिंह आज से लगभग 30 साल पहले अफगानिस्तान से भागकर दिल्ली आए थे। इस समय वे तिलकनगर की गुरुअमरदास कॉलोनी में रहते हैं। उनके साथ लगभग तीस हजार सिख लोग ऐसे हैं, जो अफगानिस्तान से जान बचाकर भागकर हिंदुस्तान पहुंचे हैं। इनका कहना है कि वे भी पूर्व में अखंड भारत का हिस्सा थे। पूर्व में किन्हीं कारणों से उनका देश अलग कर दिया गया था, तो क्या उन्हें भारत में रहने का विकल्प नहीं मिलना चाहिए?
अफगान अर्थव्यवस्था का एक चौथाई सिखों-हिंदुओं से
अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था आज बदहाल है। उसकी पूरी अर्थव्यवस्था भारत और अमेरिका जैसे देशों से मिल रहे सहयोग पर निर्भर करती है। दर्शन सिंह ने बताया कि उनकी कौम बिजनेस करने वाली है। कभी अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था का लगभग एक चौथाई केवल सिखों और हिंदुओं के बिजनेस से आता था। लेकिन इस्लामी कानूनों की आड़ में उनसे हमेशा लूटपाट की जाती थी।
उनके सामने केवल दो विकल्प रह गए थे- या तो इस्लाम कबूल कर लें या मौत को गले लगा लें। इन्हीं परिस्थितियों में उनके जैसे हजारों सिख परिवारों ने भारत का रुख कर लिया। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें भी इस कानून से अधिकार मिल जाएंगे, तो वे सच्चे भारतवासी बन सकेंगे और भारत के विकास में अपना पूर्ण योगदान दे सकेंगे।
अपने ही देश में भिखारियों जैसी स्थिति
लगभग बीस साल पहले भारत आए किरपाल सिंह सचदेवा ने कहा कि अफगानिस्तान में उन लोगों का जीना मुहाल हो गया था। इस्लामिक कानूनों के चलते अपने ही देश में उनकी स्थिति भिखारियों जैसी हो गई थी। आर्थिक दमन तो किसी प्रकार से सहन कर लिया जाता है, लेकिन महिलाओं के साथ किसी भी वक्त कुछ भी हो जाने की आशंका से उन लोगों ने परिवार के साथ घर-बार छोड़ दिया। वह कहते हैं कि अगर हिंदुस्तान उन्हें शरण नहीं देगा तो वे कहां जाएंगे।
शांतिप्रिय हैं लोग
पाकिस्तानी हिंदुओं के एक दल के साथ यहां पहुंचे हरिओम साहू ने कहा कि दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि बांग्लादेश से आए घुसपैठिये दिल्ली की कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन गए हैं। अनेक अपराधों में उनका नाम हमेशा आता रहता है। लेकिन वहीं पर पाकिस्तान हो या अफगानिस्तान, किसी एक भी हिंदू के खिलाफ आज तक किसी थाने में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं है। ऐसे में उन्हें लगता है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में उनकी दयनीय स्थिति को देखते हुए इन्हें भारत में रहने का अधिकार दे दिया जाना चाहिए।
पुलिस ने कर रखी थी घेराबंदी
शरणार्थी हिंदुओं के इस प्रदर्शन के दौरान पूरे राजघाट और आसपास के इलाकों में पुलिस की जबरदस्त सरगर्मी बनी रही। पुलिस ने दिल्ली गेट, दरिया गंज, आइटीओ और बाहरी मुद्रिका मार्ग पर पूरी चौकसी के साथ निगाहें जमाए रखीं। पुलिस ने आईटीओ जाने वाले मार्ग पर यातायात एक तरफ कर दिया था। इससे किसी भी जगह पर जाम जैसी स्थिति नहीं बनने पाई। इस दौरान किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस ने आसपास के इलाकों में बैरीकेडिंग कर दी थी। सुरक्षा संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।